कांगो में इबोला के मामले बढ़कर 896, 232 मौतें; 33 स्वास्थ्य क्षेत्र प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप गंभीर होता जा रहा है — 19 जून 2026 तक पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 896 हो गई है और अब तक 232 लोगों की मौत हो चुकी है। डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी दैनिक रिपोर्ट में यह आँकड़े जारी किए हैं।
ताज़ा स्थिति और नए मामले
बुधवार को अकेले पूर्वी प्रांतों इटुरी और नॉर्थ किवू में 21 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें 6 मौतें भी शामिल हैं। उसी दिन 151 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए, जिनमें 35 मौतें शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह प्रकोप बंडिबुग्यो इबोला वायरस से फैला है और पूर्वी डीआरसी के तीन प्रांतों — इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू — के 33 स्वास्थ्य क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले चुका है।
मरीजों की स्थिति
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल 383 मरीज या तो आइसोलेशन में हैं या अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं, 78 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जिनमें 11 ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिन्हें नियंत्रण जाँच (कंट्रोल टेस्ट) में नकारात्मक परिणाम आने के बाद स्वस्थ घोषित किया गया।
संपर्क निगरानी और फॉलो-अप
तीनों प्रांतों में कुल 6,367 संपर्कों (कॉन्टैक्ट्स) की निगरानी की जा रही है। इनमें से 4,525 लोगों तक रिपोर्टिंग अवधि के दौरान पहुँच बनाई गई, जो 71.1 प्रतिशत की फॉलो-अप दर को दर्शाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पुष्ट मामलों की संख्या सप्ताह-दर-सप्ताह लगातार बढ़ रही है, जो समुदाय स्तर पर संक्रमण के जारी रहने का संकेत देती है।
चेतावनी और भौगोलिक विस्तार का खतरा
रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को शीघ्रता से लागू नहीं किया गया, तो संक्रमण का भौगोलिक विस्तार तेज़ी से हो सकता है। गौरतलब है कि यह डीआरसी में इबोला का 17वाँ प्रकोप है, जिसे आधिकारिक रूप से 15 मई 2026 को घोषित किया गया था।
इबोला: पृष्ठभूमि और लक्षण
इबोला रोग पहली बार वर्ष 1976 में दो समानांतर प्रकोपों के रूप में सामने आया था — पहला सूडान वायरस रोग का प्रकोप नजारा (वर्तमान साउथ सूडान) में, और दूसरा इबोला वायरस रोग का प्रकोप यामबुकु (वर्तमान डीआरसी) में, जो इबोला नदी के निकट एक गाँव में फैला था। इसी नदी के नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया।
इस रोग के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं — बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश से शुरुआत होती है। बाद में उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते तथा गुर्दे व यकृत की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसे गंभीर लक्षण उभर सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्यकर्मियों और देखभाल से जुड़े कर्मचारियों को इन लक्षणों की सतर्कतापूर्वक निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।