13 सितंबर 2026
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कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप: 7,022 मामले, 3,398 मौतें — खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं

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कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप: 7,022 मामले, 3,398 मौतें — खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं

सारांश

कांगो का इबोला प्रकोप कागज़ पर 'काबू में' है — लेकिन 7,022 मामले, 3,398 मौतें और एक ऐसे सातवें प्रांत तक पहुंचा संक्रमण जो किसी भी पहले प्रभावित प्रांत से सटा नहीं है, यह बताता है कि असली युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

डीआरसी सरकार ने 13 सितंबर 2026 को कहा कि इबोला का 17वां प्रकोप काबू में है और अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में चरम पर पहुंचा था।
10 सितंबर 2026 तक 7,022 कन्फर्म मामले और 3,398 मौतें दर्ज; मृत्यु दर 48.4% ।
संक्रमण अब 7 प्रांतों के 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है; सुद-उबांगी नवीनतम प्रभावित प्रांत।
WHO ने प्रकोप को 'अभी भी अनियंत्रित और विषम' बताया — कुछ जगह घट रहा, कुछ जगह बढ़ रहा।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जीन-जैक्स मबुंगानी मबांडा ने आगाह किया कि कुछ क्षेत्रों में कमी का मतलब सर्वत्र नियंत्रण नहीं।
यह प्रकोप डीआरसी का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है; सबसे बड़ा 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में था।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) सरकार ने 13 सितंबर 2026 को घोषणा की कि देश में फैला इबोला का 17वां प्रकोप अब नियंत्रण में है और अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में अपने चरम को पार कर चुका है। बावजूद इसके, सातवें प्रांत सुद-उबांगी तक संक्रमण फैलने और नए मामलों के उभरने से खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है।

सरकार का आकलन और मौजूदा स्थिति

सरकार के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक की रिपोर्ट पढ़ते हुए स्वास्थ्य मंत्री रोजर कंबा के हवाले से कहा, 'इबोला का 17वां प्रकोप काबू में है और अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में यह अपने चरम पर पहुंच गया था।' सरकार का कहना है कि सभी मुख्य संकेत मामलों में गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं।

प्रभावित 10 स्वास्थ्य क्षेत्रों में कम से कम 21 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। इसके साथ ही, प्रकोप के मुख्य केंद्र पूर्वी प्रांत इटुरी के कई इलाकों में संक्रमण की रफ्तार धीमी हुई है। अधिकारियों ने कड़ी निगरानी और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

कांगो के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और मौजूदा सांसद जीन-जैक्स मबुंगानी मबांडा ने इस आकलन को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने शनिवार को कहा कि कुछ इलाकों में मामलों में कमी का अर्थ यह नहीं है कि हर जगह संक्रमण पर काबू पा लिया गया है।

मबांडा के अनुसार, जब संक्रमण कई जगहों से एक साथ फैल रहा हो, तो अलग-अलग क्षेत्र अलग-अलग समय पर अपने चरम पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महामारी का ग्राफ केवल पहचाने गए मामलों को दर्शाता है और समुदायों में मौजूद अज्ञात संक्रमणों की वजह से वास्तविक तस्वीर भिन्न हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मूल्यांकन

अपनी नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि यह प्रकोप 'अभी भी अनियंत्रित और विषम (हेटरोजीनस) बना हुआ है।' संगठन ने स्पष्ट किया कि कुछ क्षेत्रों में संक्रमण घट रहा है, जबकि अन्य जगहों पर यह बढ़ रहा है या भौगोलिक रूप से फैल रहा है। संगठन के शब्दों में, 'यह प्रकोप एक समान रूप से घटने के बजाय भौगोलिक रूप से अलग-अलग तरह का व्यवहार दिखा रहा है।'

सातवें प्रांत तक पहुंचा संक्रमण

डीआरसी सरकार ने गुरुवार को पुष्टि की कि उत्तर-पश्चिमी प्रांत सुद-उबांगी में इबोला का पहला मामला सामने आया है, जिससे यह प्रभावित होने वाला सातवां प्रांत बन गया है। गौरतलब है कि सुद-उबांगी की सीमा पहले से प्रभावित किसी भी प्रांत से नहीं लगती। मबांडा के अनुसार, इस प्रांत में पहुंचा 23 वर्षीय मरीज़ — जिसकी बाद में मृत्यु हो गई — ने सुद-उबांगी आने से पहले कई प्रांतों और पड़ोसी देशों रवांडा तथा युगांडा की यात्रा की थी, जिसमें सड़क और नदी दोनों मार्ग शामिल थे।

मामलों और मौतों का आँकड़ा

10 सितंबर 2026 तक डीआरसी में इबोला के 7,022 कन्फर्म मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 3,398 मौतें शामिल हैं। मृत्यु दर 48.4% दर्ज की गई है। यह बीमारी अब सात प्रांतों के 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुकी है।

मई 2026 में घोषित यह प्रकोप डीआरसी के इतिहास में इबोला की सबसे बड़ी और सबसे घातक महामारी बन गया है। विश्व स्तर पर यह दूसरी सबसे बड़ी महामारी है — इससे बड़ी महामारी 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैली थी। आने वाले हफ्तों में सुद-उबांगी जैसे नए और दूरस्थ प्रांतों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और टीकाकरण अभियान की सफलता यह तय करेगी कि यह प्रकोप वाकई अंतिम चरण में है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन WHO की 'विषम और अनियंत्रित' वाली भाषा एक अलग ही तस्वीर पेश करती है — और यह अंतर्विरोध ध्यान देने योग्य है। सुद-उबांगी का मामला विशेष रूप से चिंताजनक है: एक ऐसा प्रांत जो किसी भी पहले प्रभावित क्षेत्र से सटा नहीं, वहाँ तक एक यात्री के ज़रिए वायरस पहुंचना यह दर्शाता है कि नदी और सड़क मार्गों से संक्रमण की निगरानी में गंभीर खामियाँ हैं। 48.4% मृत्यु दर — जो ऐतिहासिक औसत से भी अधिक है — और 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैलाव बताता है कि यह प्रकोप स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता की सीमाओं को परख रहा है। बिना ठोस कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और सीमापार समन्वय के, 'चरम पार हो गया' जैसी घोषणाएं समय से पहले साबित हो सकती हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप क्या है?
यह डीआरसी में मई 2026 में घोषित इबोला महामारी है, जो देश के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे घातक इबोला महामारी बन चुकी है। 10 सितंबर 2026 तक 7,022 कन्फर्म मामले और 3,398 मौतें दर्ज हो चुकी हैं, और संक्रमण 7 प्रांतों के 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है।
क्या कांगो में इबोला का खतरा अब खत्म हो गया है?
नहीं। डीआरसी सरकार ने कहा है कि प्रकोप नियंत्रण में है और अगस्त 2026 में चरम पार कर चुका है, लेकिन WHO ने प्रकोप को 'अभी भी अनियंत्रित और विषम' बताया है। सातवें प्रांत सुद-उबांगी में नए मामले और अज्ञात समुदायी संक्रमणों की आशंका से खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
सुद-उबांगी में इबोला कैसे पहुंचा?
अधिकारियों के अनुसार, एक 23 वर्षीय मरीज़ — जिसकी बाद में मृत्यु हो गई — ने सुद-उबांगी पहुंचने से पहले कई प्रांतों और पड़ोसी देशों रवांडा तथा युगांडा की यात्रा की थी। इस यात्रा में सड़क और नदी दोनों मार्ग शामिल थे, जो संक्रमण के दूरस्थ प्रांतों तक फैलने के खतरे को रेखांकित करता है।
यह प्रकोप दुनिया के अन्य इबोला प्रकोपों की तुलना में कितना बड़ा है?
यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है। इससे बड़ा प्रकोप 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैला था। डीआरसी के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप है, जिसकी मृत्यु दर 48.4% है।
आगे क्या उपाय किए जा रहे हैं?
अधिकारियों ने कड़ी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और उन इलाकों में कड़ी निगरानी का निर्देश दिया है जहाँ हाल ही में मामले बढ़े हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मबांडा ने आगाह किया है कि महामारी का ग्राफ केवल पहचाने गए मामलों को दर्शाता है और समुदायों में अज्ञात संक्रमणों पर भी नज़र रखनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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