7 अगस्त 2026
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डीआरसी इबोला प्रकोप: 330 बच्चों की मौत, 743 पुष्ट मामले — यूनिसेफ की चेतावनी

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डीआरसी इबोला प्रकोप: 330 बच्चों की मौत, 743 पुष्ट मामले — यूनिसेफ की चेतावनी

सारांश

डीआरसी में इबोला ने 330 बच्चों की जान ली है — और असली संकट इससे भी गहरा है। पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर वयस्कों से दोगुनी है, टीकाकरण ठप है, और किंशासा के पास एक संदिग्ध मामले ने राजधानी तक फैलाव की आशंका बढ़ा दी है।

मुख्य बातें

यूनिसेफ के अनुसार 2 अगस्त 2026 तक डीआरसी में 17 वर्ष और उससे कम उम्र के 743 बच्चों में इबोला की पुष्टि हुई, जिनमें 330 की मौत हो चुकी है।
पुष्ट मामलों में हर चौथा बच्चा है, लेकिन कुल मौतों में बच्चों की हिस्सेदारी एक-तिहाई है।
पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर वयस्कों से दोगुने से अधिक है।
15 मई 2026 से अब तक डीआरसी में कुल 3,973 पुष्ट मामले और 1,801 मौतें दर्ज।
डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने पूर्वी डीआरसी की स्थिति को 'पहले से कहीं अधिक गंभीर' बताया।
किंशासा के बाहर एक यात्री नाव रोकी गई; एक संदिग्ध मामले की जाँच जारी, पुष्टि अभी नहीं।

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप बच्चों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने 6 अगस्त 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2 अगस्त तक 17 वर्ष और उससे कम उम्र के बच्चों में इबोला के 743 पुष्ट मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 330 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस प्रकोप का सबसे गहरा असर इतुरी प्रांत की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है।

बच्चों पर असंगत प्रभाव

यूनिसेफ के आँकड़ों के अनुसार, पुष्ट मामलों में से लगभग हर चौथा मामला बच्चों का है, लेकिन कुल मौतों में उनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई तक पहुँच गई है। यह अनुपात बताता है कि बच्चे, विशेषकर पाँच वर्ष से कम उम्र के शिशु, इस बीमारी के सामने कहीं अधिक असुरक्षित हैं। इस आयु वर्ग में मृत्यु दर वयस्कों की तुलना में दोगुने से भी अधिक दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य तंत्र पर व्यापक दबाव

यूनिसेफ ने चेताया है कि इबोला प्रकोप सीधे मौतों से परे भी नुकसान पहुँचा रहा है। बच्चों के टीकाकरण अभियानों, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य नियमित चिकित्सा सुविधाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है। संक्रमण के भय और स्वास्थ्य केंद्रों में बाधाओं के कारण कई परिवार समय पर इलाज तक नहीं पहुँच पा रहे।

डीआरसी में यूनिसेफ के प्रतिनिधि जॉन एगबोर ने कहा, "इबोला का प्रकोप पूरे स्वास्थ्य तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। इसका असर मलेरिया, दस्त और अन्य इलाज योग्य बीमारियों के मामलों पर भी पड़ रहा है, जो बच्चों की मौत के सबसे बड़े कारणों में से हैं।"

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की गंभीर चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने बुधवार को आगाह किया कि पूर्वी डीआरसी की स्थिति 'पहले से कहीं अधिक गंभीर' हो चुकी है। संगठन के अनुसार, बीमारी बेहद तेज़ और अभूतपूर्व गति से फैल रही है और फिलहाल इसके धीमा पड़ने के कोई संकेत नहीं हैं। 15 मई 2026 को प्रकोप घोषित किए जाने के बाद से डीआरसी में इबोला के कुल 3,973 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 1,801 लोगों की मौत हो चुकी है।

किंशासा के पास नाव रोकी गई

इसी बीच, स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार को किंशासा के बाहर एक यात्री नाव को रोका। यह नाव इबोला-प्रभावित त्शोपो प्रांत से आ रही थी और इसे मध्य किंशासा से लगभग 65 किलोमीटर दूर रोका गया। स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने बताया कि अलर्ट तब जारी किया गया जब मोंगाला प्रांत में नाव से उतरने वाले एक यात्री में बुखार और दस्त के लक्षण दिखे और बाद में उसकी मौत हो गई।

काम्बा ने स्पष्ट किया, "हम एहतियात बरत रहे हैं। फिलहाल यह केवल एक संदिग्ध मामला है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।" सरकारी प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने बाद में बताया कि नाव के आसपास सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी का घेरा बनाया गया है और एक मोबाइल प्रयोगशाला की मदद से सभी यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों की जाँच की गई है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और कुपोषण की चुनौतियों से जूझ रहा है, जो इबोला नियंत्रण प्रयासों को और जटिल बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बहाल नहीं होती, बच्चों में मृत्यु दर ऊँची बनी रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता का दर्पण है। बच्चों में मृत्यु दर का वयस्कों से दोगुना होना बताता है कि कुपोषण और कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता इस संकट को और घातक बना रही है। गौरतलब है कि डीआरसी इबोला का यह दसवाँ से अधिक प्रकोप झेल रहा है, फिर भी स्वास्थ्य ढाँचा उतना ही भंगुर है। किंशासा तक फैलाव की आशंका इस बात की याद दिलाती है कि घनी आबादी वाले शहरी केंद्र तक पहुँचने पर यह प्रकोप वैश्विक चिंता का विषय बन सकता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरसी में इबोला से कितने बच्चों की मौत हुई है?
यूनिसेफ के अनुसार 2 अगस्त 2026 तक 17 वर्ष और उससे कम उम्र के 330 बच्चों की इबोला से मौत हो चुकी है और 743 पुष्ट मामले दर्ज हैं। पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं।
डीआरसी में इबोला प्रकोप कब शुरू हुआ?
डीआरसी में वर्तमान इबोला प्रकोप 15 मई 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था। तब से अब तक 3,973 पुष्ट मामले और 1,801 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।
इबोला से बच्चों की मृत्यु दर अधिक क्यों है?
यूनिसेफ के आँकड़ों के अनुसार, पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर वयस्कों से दोगुने से अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार कुपोषण, कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता और समय पर इलाज न मिल पाना इसके प्रमुख कारण हैं।
किंशासा के पास नाव क्यों रोकी गई?
स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक यात्री नाव को किंशासा से लगभग 65 किलोमीटर दूर रोका, क्योंकि उससे उतरे एक यात्री में बुखार और दस्त के लक्षण दिखे और बाद में उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने स्पष्ट किया कि यह अभी केवल संदिग्ध मामला है, पुष्टि नहीं हुई है।
इबोला प्रकोप का स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या असर पड़ा है?
यूनिसेफ के अनुसार इबोला के कारण बच्चों के टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं में भारी गिरावट आई है। संक्रमण के भय से कई परिवार स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुँच पा रहे, जिससे मलेरिया और दस्त जैसी इलाज योग्य बीमारियों से भी मौतें बढ़ रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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