कांगो में इबोला से 1,850 मौतें, 4,053 पुष्ट मामले; बच्चों में मृत्यु दर वयस्कों से दोगुनी
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। 7 अगस्त 2026 तक देश के स्वास्थ्य अधिकारियों के आँकड़ों के अनुसार 4,053 लोगों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 1,850 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। पूर्वी डीआरसी के हालात सबसे अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं, जहाँ स्वास्थ्य तंत्र पर अभूतपूर्व दबाव है।
मौजूदा स्थिति और आँकड़े
स्वास्थ्य विभाग के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, अभी 694 मरीज आइसोलेशन में या अस्पतालों में इलाजरत हैं, जबकि 793 लोग उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन मेडेसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स (डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स) ने बुधवार को चेतावनी दी कि संक्रमण अभूतपूर्व गति से फैल रहा है और इसके धीमा पड़ने के कोई संकेत नहीं हैं।
बच्चों पर सबसे गहरी मार
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने गुरुवार को जानकारी दी कि इस प्रकोप में अब तक 330 बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। यूनिसेफ के अनुसार, 'बच्चों में कुल पुष्ट मामलों का लगभग एक चौथाई हिस्सा है, लेकिन मौतों में उनका हिस्सा लगभग एक तिहाई है। 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं — उनमें मृत्यु दर वयस्कों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।'
यूनिसेफ के डीआरसी प्रतिनिधि जॉन एगबोर ने कहा, 'इबोला का प्रकोप पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को बाधित कर रहा है। इसका सीधा असर मलेरिया, डायरिया और अन्य इलाज योग्य बीमारियों पर पड़ेगा, जो बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजह हैं।'
स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर
यूनिसेफ ने बताया कि इबोला के भय और स्वास्थ्य केंद्रों में व्याप्त रुकावटों के कारण परिवार अस्पताल जाने से कतरा रहे हैं। इसके चलते इतुरी प्रांत में बचपन का टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। गौरतलब है कि यह द्वितीयक स्वास्थ्य संकट अक्सर प्रत्यक्ष इबोला मौतों से अधिक जानलेवा साबित होता है।
अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
मेडेसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स के अनुसार अस्पतालों में बेड की कमी, मेडिकल स्टाफ पर बढ़ता दबाव और समुदायों में व्याप्त भय के कारण मरीज समय पर उपचार नहीं ले पा रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि पूर्वी डीआरसी में स्थिति पहले के किसी भी दौर से अधिक गंभीर है।
आगे की चुनौतियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, डीआरसी में चल रहे सशस्त्र संघर्ष और कमज़ोर बुनियादी ढाँचे ने राहत कार्यों को और जटिल बना दिया है। जब तक समुदाय स्तर पर विश्वास बहाल नहीं होता और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक प्रकोप पर काबू पाना कठिन बना रहेगा।