डीआर कांगो में इबोला का कहर: 600 मौतें, 1,759 पुष्ट मामले; WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल
सारांश
मुख्य बातें
लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में बुंडीबुग्यो इबोला वायरस का प्रकोप गंभीर रूप धारण कर चुका है — देश के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 9 जुलाई 2026 तक मृतकों की संख्या 600 तक पहुँच गई है और 1,759 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है, जो इस संगठन की सर्वोच्च अलर्ट श्रेणी है।
मौजूदा स्थिति और अस्पतालों पर दबाव
बुधवार देर रात जारी आधिकारिक अपडेट के अनुसार, अभी 750 मरीज आइसोलेशन केंद्रों या अस्पतालों में भर्ती हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि अस्पतालों के 94 प्रतिशत बेड पहले से भरे हुए हैं, जिससे नए मरीजों के लिए जगह की भारी कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य तंत्र पर यह दबाव प्रकोप नियंत्रण को और जटिल बना रहा है।
यह प्रकोप 15 मई 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था और डीआरसी का 17वाँ इबोला प्रकोप है। यह तीन प्रांतों — इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु — के 37 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है।
नियंत्रण में आ रही बाधाएँ
स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि इस प्रकोप से निपटना असाधारण रूप से कठिन है। प्रमुख बाधाओं में शामिल हैं:
पोस्टमार्टम के लिए सैंपल लेने का सामुदायिक विरोध, अपर्याप्त उपचार क्षमता, कमज़ोर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, सीमित चिकित्सा आपूर्ति, और सबसे बड़ी बाधा — हथियारबंद सशस्त्र समूहों के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँच का अवरुद्ध होना। गौरतलब है कि नॉर्थ किवु और साउथ किवु वर्षों से सशस्त्र संघर्ष के केंद्र रहे हैं, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा भी खतरे में है।
इबोला वायरस: क्या है यह बीमारी
इबोला एक दुर्लभ, अत्यंत गंभीर और प्रायः जानलेवा वायरल बीमारी है। यह वायरस फ्रूट बैट जैसे जंगली जानवरों से इंसानों में आता है और संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 2 से 21 दिनों के भीतर प्रकट होते हैं।
इनमें अचानक तेज़ बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर मामलों में बिना स्पष्ट कारण के रक्तस्राव या शरीर पर निशान पड़ना शामिल है। अंततः शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बुंडीबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, हालाँकि संभावित वैक्सीन पर शोध जारी है। तुलनात्मक रूप से, मई 2018 में डीआरसी और युगांडा में आए इबोला प्रकोप में भी यही प्रजाति शामिल थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे की चुनौतियाँ
WHO द्वारा PHEIC घोषित किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेज़ होने की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार मानवीय संकट, दूरस्थ और घनी आबादी वाले क्षेत्र, तथा भारी जनसंख्या एवं व्यापारिक आवागमन इस प्रकोप को विशेष रूप से जटिल बनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी पहले से ही दशकों पुराने सशस्त्र संघर्ष और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है। आने वाले हफ्तों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को मज़बूत करना और सुरक्षित क्षेत्रों में उपचार क्षमता बढ़ाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।