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पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी में इमारत ढही: 9 लोग बचाए गए, 6-7 अभी भी मलबे में फंसे

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पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी में इमारत ढही: 9 लोग बचाए गए, 6-7 अभी भी मलबे में फंसे

सारांश

पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी में डंपिंग ग्राउंड के पास खड़ी एक इमारत भारी बारिश के बाद कचरे और पानी के दबाव से ढह गई। 22-23 कर्मचारियों में से 9 को बचाया जा चुका है; 6-7 अभी भी मलबे में हैं। NDRF, सेना और दमकल का संयुक्त अभियान जारी है।

मुख्य बातें

पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में बुधवार को एक इमारत ढह गई, जिसमें 22-23 कर्मचारी फंस गए।
गुरुवार सुबह 7 बजे तक बचाव दलों ने 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
DCP गणेश इंगले के अनुसार अभी भी 6-7 लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।
मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि 47 साल पुराने डंपिंग ग्राउंड पर जमा कचरा और बारिश का पानी इमारत पर आ गिरा।
NDRF, सेना, दमकल, पुलिस और मेडिकल टीम संयुक्त बचाव अभियान में जुटी हैं।
म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने इसे प्राकृतिक आपदा बताया।

महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ स्थित मोशी इलाके में बुधवार को एक इमारत ढह गई, जिसमें कई कर्मचारी मलबे में दब गए। गुरुवार, 9 जुलाई की सुबह 7 बजे तक बचाव दलों ने 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दमकल, पुलिस और चिकित्सा टीमें मलबे में अभी भी फंसे लोगों को खोजने और बचाने के अभियान में जुटी हैं।

इमारत क्यों गिरी

मंत्री गिरीश महाजन ने घटनास्थल पर पत्रकारों को बताया कि यह पिंपरी-चिंचवड़ का डंपिंग ग्राउंड है, जो 1982 से यहाँ स्थित है और लगभग 47 साल पुराना है। उन्होंने कहा, 'वहाँ कचरे का एक बहुत बड़ा पहाड़ जमा हो गया है। विभाग ने पास ही एक इमारत बनाई थी। पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है। बारिश की वजह से कचरा और पानी इमारत पर आ गिरा। इमारत का आधा हिस्सा ढह गया।' महाजन के अनुसार इमारत के अंदर 22-23 कर्मचारी थे, हालाँकि कुछ लोग उस समय लंच पर गए हुए थे। इमारत ढहते ही 5 लोग स्वयं बाहर निकलने में सफल रहे।

बचाव अभियान की स्थिति

उपायुक्त पुलिस (DCP) गणेश इंगले ने बताया कि तलाशी अभियान बुधवार दोपहर से ही जारी है। उन्होंने कहा कि अभी भी लगभग 6-7 लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं और उन्हें जल्द से जल्द बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सेना, NDRF, दमकल विभाग, पुलिस और मेडिकल टीम सहित सभी एजेंसियाँ संयुक्त रूप से बचाव कार्य में लगी हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने इसे प्राकृतिक आपदा करार दिया। उन्होंने कहा, 'भूस्खलन होने पर मजबूत इमारतें भी गिर सकती हैं।' सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि बचाव अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है और मलबे को व्यवस्थित तरीके से हटाया जा रहा है। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून की भारी बारिश जारी है।

आगे क्या

बचाव दल मलबे में फंसे शेष लोगों को निकालने के लिए अभियान जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, फंसे लोगों की सटीक संख्या स्पष्ट होती जाएगी। प्रशासन ने इमारत की संरचनात्मक स्थिति और डंपिंग ग्राउंड के प्रबंधन को लेकर भविष्य में जाँच के संकेत दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी निवारक कदम नहीं उठाए गए। म्युनिसिपल कमिश्नर का 'प्राकृतिक आपदा' वाला बयान जवाबदेही से बचने की कोशिश लग सकता है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या इस स्थान पर इमारत बनाने की अनुमति देना ही मूल चूक थी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी में इमारत क्यों गिरी?
मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार, मोशी के 47 साल पुराने डंपिंग ग्राउंड पर जमा कचरे के पहाड़ पर लगातार दो दिनों की भारी बारिश के कारण कचरा और पानी पास की सरकारी इमारत पर आ गिरा, जिससे इमारत का आधा हिस्सा ढह गया। म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने इसे भूस्खलन जनित प्राकृतिक आपदा बताया।
मोशी इमारत हादसे में अब तक कितने लोगों को बचाया गया है?
गुरुवार, 9 जुलाई की सुबह 7 बजे तक 9 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। DCP गणेश इंगले के अनुसार अभी भी 6-7 लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
बचाव अभियान में NDRF, सेना, दमकल विभाग, पुलिस और मेडिकल टीम संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। DCP गणेश इंगले ने बताया कि बुधवार दोपहर से ही तलाशी अभियान जारी है।
इमारत में कितने लोग फंसे थे?
मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार इमारत में उस समय 22-23 कर्मचारी थे, हालाँकि कुछ लोग लंच के लिए बाहर गए हुए थे। इमारत ढहते ही 5 लोग स्वयं बाहर निकलने में सफल रहे।
क्या इस हादसे में कोई मौत हुई है?
अभी तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है। बचाव अभियान जारी है और मलबे में फंसे शेष लोगों की स्थिति तलाशी पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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