एनएच-701ए बीरवाह से गुजरे: महबूबा मुफ्ती ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र, 2,000 परिवारों की आजीविका का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-701ए के प्रस्तावित मार्ग को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है। उन्होंने माँग की है कि इस राजमार्ग का निर्माण बीरवाह कस्बे से होकर गुजरने वाले मौजूदा मार्ग को अपग्रेड करके किया जाए, न कि बाईपास बनाकर।
मुद्दे की पृष्ठभूमि
बीरवाह मध्य कश्मीर का एक प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक केंद्र है। महबूबा मुफ्ती के अनुसार, बीरवाह सिविल सोसायटी, ट्रेड फेडरेशन, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, बाज़ार संघों और स्थानीय प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर यह मामला उनके संज्ञान में लाया था। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप की माँग की।
वर्तमान सड़क सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, बैंकों, बाज़ारों और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को आपस में जोड़ती है, जिस पर आसपास के कई गाँवों के हज़ारों लोग रोज़मर्रा के कामों के लिए निर्भर हैं।
बाईपास से आजीविका पर संकट
महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में चेताया कि यदि बाईपास बनाया गया तो व्यापारिक गतिविधियाँ कस्बे से बाहर स्थानांतरित हो जाएँगी। इससे इस मार्ग के किनारे कारोबार करने वाले 2,000 से अधिक परिवारों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी। यह ऐसे समय में विशेष चिंता का विषय है जब जम्मू-कश्मीर में आर्थिक पुनरुद्धार की प्रक्रिया जारी है।
मौजूदा मार्ग को अपग्रेड करने की दलील
महबूबा मुफ्ती के अनुसार, मौजूदा सड़क को चौड़ा और आधुनिक बनाना कई दृष्टियों से अधिक लाभकारी होगा। इससे श्रीनगर, रिंग रोड और एयरपोर्ट तक बेहतर संपर्क स्थापित होगा। साथ ही उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की ज़रूरत कम होगी, बाग-बगीचों की सुरक्षा होगी और बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन से भी बचा जा सकेगा।
सरकार से माँग
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह किया है कि वे जनहित, आर्थिक हित और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों को एनएच-701ए का मार्ग बीरवाह कस्बे से ही बनाए रखने के निर्देश दें। गौरतलब है कि राजमार्ग परियोजनाओं में बाईपास बनाम अपग्रेड का विकल्प अक्सर स्थानीय समुदायों और नियोजकों के बीच टकराव का कारण बनता है, और बीरवाह का यह मामला उसी बड़ी बहस का हिस्सा है।
अब यह देखना होगा कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय इस माँग पर क्या रुख अपनाता है और क्या एनएच-701ए के अंतिम मार्ग में स्थानीय हितों को प्राथमिकता दी जाती है।