बीआरएस में बड़ा फेरबदल: केसीआर ने वद्दीराजू रविचंद्र को राज्यसभा में संसदीय दल का नेता नियुक्त किया
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने 9 जुलाई 2026 को पार्टी के संसदीय ढाँचे में अहम बदलाव करते हुए राज्यसभा सदस्य वद्दीराजू रविचंद्र को बीआरएस संसदीय दल का नेता और राज्यसभा में पार्टी का नेता नियुक्त किया। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पूर्व नेता के.आर. सुरेश रेड्डी का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया।
पदोन्नति की पृष्ठभूमि
वद्दीराजू रविचंद्र इससे पहले बीआरएस संसदीय दल के उपनेता के रूप में कार्यरत थे। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, केसीआर ने उनकी संगठन के प्रति समर्पित सेवाओं तथा पिछड़ा वर्ग (बीसी) और बहुजन समाज के उत्थान के लिए किए गए कार्यों को देखते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
गौरतलब है कि केसीआर ने रविचंद्र पर पहले भी भरोसा जताया था — जब राज्यसभा सदस्य डॉ. बांदा प्रकाश मुदिराज विधान परिषद में चले गए, तब उस रिक्त सीट के लिए रविचंद्र को चुना गया था। बाद में केसीआर के समर्थन से वे दूसरी बार भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।
बीआरएस का राज्यसभा में मौजूदा स्वरूप
वर्तमान में बीआरएस के चार राज्यसभा सदस्य हैं — के.आर. सुरेश रेड्डी, दिवाकोंडा दामोदर राव, डॉ. बांदा पार्थसारथी रेड्डी, और वद्दीराजू रविचंद्र। रविचंद्र का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक है, जो उन्हें दीर्घकालिक नेतृत्व की स्थिरता प्रदान करता है।
संसदीय समितियों में भूमिका
रविचंद्र संसद की पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस संबंधी स्थायी समिति के सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त वे कोयला और खान मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन समितियों में उनकी उपस्थिति तेलंगाना के ऊर्जा और खनिज हितों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रविचंद्र की प्रतिक्रिया
नई जिम्मेदारी मिलने पर वद्दीराजू रविचंद्र ने केसीआर और बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'एक पिछड़े समुदाय के व्यक्ति के रूप में मुझे न केवल दो बार राज्यसभा भेजा गया, बल्कि अब संसदीय दल का नेता भी बनाया गया है — यह मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है।'
उन्होंने यह भी कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएंगे, संसद में तेलंगाना के लोगों की आवाज़ मजबूती से उठाएंगे, पार्टी को और सुदृढ़ करेंगे तथा केसीआर को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत करेंगे।
यह नियुक्ति बीआरएस के लिए संसदीय रणनीति के दृष्टिकोण से निर्णायक साबित हो सकती है, खासकर तब जब पार्टी तेलंगाना में सत्ता गँवाने के बाद अपनी पुनर्स्थापना की कोशिशों में जुटी है।