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गुजरात की 'विकसित डेटा सेंटर नीति 2026-29' लॉन्च, डिप्टी सीएम संघवी ने गिनाई दशकों की सेमीकंडक्टर विफलताएँ

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गुजरात की 'विकसित डेटा सेंटर नीति 2026-29' लॉन्च, डिप्टी सीएम संघवी ने गिनाई दशकों की सेमीकंडक्टर विफलताएँ

सारांश

गुजरात ने देश की पहली समर्पित डेटा सेंटर नीति लॉन्च की — 7.5 गीगावॉट क्षमता, दोगुनी निवेश माँग। डिप्टी सीएम संघवी ने 1976 और 2009 की सेमीकंडक्टर विफलताओं का हवाला देकर कहा: इस बार गुजरात अतीत नहीं दोहराएगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 9 जुलाई 2026 को गांधीनगर में 'विकसित गुजरात – डेटा सेंटर नीति 2026-29' लॉन्च की।
नीति की प्रारंभिक क्षमता 7.5 गीगावॉट ; निवेशकों की माँग पहले ही लगभग दोगुनी हो चुकी है।
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने 1976 और 2006-2009 के सेमीकंडक्टर मिशनों की विफलताओं का उल्लेख किया; 2009 में हैदराबाद सेमीकंडक्टर पार्क की ज़मीन रियल एस्टेट में बदली गई।
गुजरात में चार महीनों में तीन से अधिक सेमीकंडक्टर OSAT इकाइयाँ उद्घाटित हुईं।
नीति में पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क सहायता, कर प्रतिपूर्ति और नवीकरणीय ऊर्जा प्रावधान शामिल।
गुजरात का दावा — देश का पहला राज्य जिसने औपचारिक डेटा सेंटर नीति लागू की।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 9 जुलाई 2026 को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा 'विकसित गुजरात – डेटा सेंटर नीति 2026-29' के शुभारंभ के बाद भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दशकों की नीतिगत विफलताओं का ब्यौरा देते हुए कहा कि गुजरात इस बार अतीत की गलतियाँ नहीं दोहराएगा। राज्य ने देश की पहली औपचारिक समर्पित डेटा सेंटर नीति लागू करने का दावा किया है, जिसकी प्रारंभिक नियोजित क्षमता 7.5 गीगावॉट है — और निवेशकों की माँग पहले ही इससे लगभग दोगुनी हो चुकी है।

दशकों की सेमीकंडक्टर विफलताओं का इतिहास

संघवी ने नीति लॉन्च के बाद संबोधन में भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की दो बड़ी विफलताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'हमने इस देश में वह दौर भी देखा है जब दुनिया सेमीकंडक्टर मिशन में तेज़ी से आगे बढ़ रही थी। वर्ष 1976 में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में हुई कैबिनेट बैठक में सेमीकंडक्टर मिशन पर निर्णय लिया गया था, लेकिन अंततः 1990 तक यह मिशन असफल हो गया।' उन्होंने आगे बताया कि 2006 से 2009 के बीच हैदराबाद में एक सेमीकंडक्टर पार्क स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, जो भी पूरी नहीं हो सकी।

संघवी ने कहा, 'एक बार फिर सेमीकंडक्टर मिशन का सपना अधूरा रह गया। वर्ष 2009 में उस सेमीकंडक्टर पार्क के लिए निर्धारित ज़मीन को रियल एस्टेट परियोजना में बदल दिया गया।' यह संदर्भ इस बात को रेखांकित करता है कि नीतिगत घोषणाएँ और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच का अंतर भारत में एक पुरानी चुनौती रही है।

2021 के बाद गुजरात का उभार

संघवी के अनुसार, वर्ष 2021 में सेमीकंडक्टर मिशन को पुनः गति मिलने के बाद गुजरात इसका प्रमुख लाभार्थी बना। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 से देश में कई सेमीकंडक्टर फैब स्थापित हो रहे हैं और OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग) सुविधाओं का उद्घाटन हो रहा है। उन्होंने कहा, 'केवल चार महीनों के भीतर गुजरात की धरती पर तीन से अधिक सेमीकंडक्टर OSAT इकाइयों का उद्घाटन हो चुका है।' इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार की कार्यान्वयन क्षमता को दिया।

नीति के प्रमुख प्रावधान

'विकसित गुजरात – डेटा सेंटर नीति 2026-29' के अंतर्गत हाइपरस्केल डेटा सेंटरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनमें पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में सहायता, कर प्रतिपूर्ति (टैक्स रिइम्बर्समेंट) तथा नवीकरणीय ऊर्जा और सतत जल उपयोग को बढ़ावा देने वाले प्रावधान शामिल हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि AI आधारित कंप्यूटिंग और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती माँग के बीच यह नीति डिजिटल अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करेगी।

निवेशकों की माँग और आगे की राह

संघवी ने बताया कि नीति की शुरुआती नियोजित क्षमता 7.5 गीगावॉट रखी गई है, लेकिन पूरे गुजरात में इसके लिए लगभग दोगुनी क्षमता की माँग पहले ही सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा, 'भारत और दुनिया की कई अग्रणी कंपनियों ने गुजरात सरकार को राज्य के विभिन्न स्थानों पर अपने डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अनुरोध पत्र भेजे हैं।' गौरतलब है कि देश के कई अन्य राज्य भी डेटा सेंटर नीति बनाने की बात कर रहे थे, लेकिन संघवी के दावे के अनुसार गुजरात पहला राज्य है जिसने इसे आधिकारिक रूप से लागू किया है। यह नीति यह तय करेगी कि क्या गुजरात डिजिटल अवसंरचना में देश का अग्रणी केंद्र बन पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'विकसित गुजरात – डेटा सेंटर नीति 2026-29' उन्हीं क्रियान्वयन जालों से कैसे बचेगी जो पहले के मिशनों को ले डूबे। 7.5 गीगावॉट की लक्षित क्षमता और 'दोगुनी माँग' के दावे प्रभावशाली हैं, लेकिन निवेशकों के अनुरोध पत्र और वास्तविक निर्माण के बीच की खाई को पाटने के लिए नीति में सत्यापन-योग्य मील के पत्थर और पारदर्शी प्रगति रिपोर्टिंग ज़रूरी होगी। यह भी देखने वाली बात होगी कि अन्य राज्य — जो पहले से डेटा सेंटर की दौड़ में हैं — गुजरात की इस 'पहली नीति' की बढ़त को कितनी जल्दी चुनौती देते हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित गुजरात – डेटा सेंटर नीति 2026-29 क्या है?
यह गुजरात सरकार द्वारा 9 जुलाई 2026 को गांधीनगर में लॉन्च की गई देश की पहली औपचारिक समर्पित डेटा सेंटर नीति है। इसकी प्रारंभिक नियोजित क्षमता 7.5 गीगावॉट है और इसमें हाइपरस्केल डेटा सेंटरों व AI अवसंरचना के लिए पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क सहायता और कर प्रतिपूर्ति जैसे प्रोत्साहन शामिल हैं।
डिप्टी सीएम संघवी ने किन सेमीकंडक्टर विफलताओं का ज़िक्र किया?
संघवी ने दो प्रमुख विफलताओं का उल्लेख किया — पहली, 1976 में कैबिनेट स्तर पर शुरू हुआ सेमीकंडक्टर मिशन जो 1990 तक असफल हो गया; दूसरी, 2006-2009 के बीच हैदराबाद में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क, जिसकी ज़मीन 2009 में रियल एस्टेट परियोजना में बदल दी गई।
गुजरात में अब तक कितनी OSAT इकाइयाँ स्थापित हुई हैं?
संघवी के अनुसार, केवल चार महीनों के भीतर गुजरात में तीन से अधिक सेमीकंडक्टर OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग) इकाइयों का उद्घाटन हो चुका है। यह 2021 में राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन को पुनः गति मिलने के बाद संभव हुआ।
इस नीति से निवेशकों की कितनी रुचि सामने आई है?
राज्य सरकार के दावे के अनुसार, नीति की 7.5 गीगावॉट की लक्षित क्षमता से लगभग दोगुनी माँग पहले ही सामने आ चुकी है। भारत और विश्व की कई अग्रणी कंपनियों ने गुजरात के विभिन्न स्थानों पर डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अनुरोध पत्र भेजे हैं।
क्या गुजरात वाकई डेटा सेंटर नीति लाने वाला देश का पहला राज्य है?
उपमुख्यमंत्री संघवी ने दावा किया है कि गुजरात पहला राज्य है जिसने आधिकारिक तौर पर एक समर्पित डेटा सेंटर नीति लॉन्च की है, जबकि देश के कई अन्य राज्य इस दिशा में काम कर रहे थे। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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