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ठाणे अस्पताल हमला: डरे डॉक्टर ने दिया इस्तीफा, बोले — 'गुंडे निगरानी कर रहे हैं, शहर नहीं लौटूंगा'

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ठाणे अस्पताल हमला: डरे डॉक्टर ने दिया इस्तीफा, बोले — 'गुंडे निगरानी कर रहे हैं, शहर नहीं लौटूंगा'

सारांश

ठाणे के डोंबिवली अस्पताल में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की मारपीट ने एक डॉक्टर को शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। NICU में बेड न होने की जानकारी देने पर भड़के पार्षद ने डॉक्टरों को पीटा — सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ, छह गिरफ्तार। यह घटना देश में डॉक्टरों की सुरक्षा पर फिर सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

6 जुलाई 2026 को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे और समर्थकों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की।
पीड़ित डॉक्टरों में से एक ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और हमेशा के लिए शहर छोड़ दिया।
विवाद की जड़ NICU में बेड न होने की जानकारी थी, जिस पर परिजनों ने पार्षद को बुलाया।
सीसीटीवी फुटेज में म्हात्रे को महिला डॉक्टर का मोबाइल छीनते और कर्मचारियों से मारपीट करते देखा गया।
पुलिस ने रमेश म्हात्रे सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया; म्हात्रे को बाद में ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
म्हात्रे ने माफी मांगने से इनकार किया और दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से एक नवजात की जान बची ।

महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में 6 जुलाई 2026 को शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके समर्थकों द्वारा की गई मारपीट के बाद पीड़ित डॉक्टरों में से एक ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले डॉक्टर ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है और वह हमेशा के लिए शहर छोड़ चुके हैं।

डॉक्टर ने क्या कहा

पीड़ित डॉक्टर ने अपना बयान देते हुए कहा, 'मैंने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि मुझे बहुत डर लग रहा है। गुंडे हमारी निगरानी कर रहे हैं और मैं शहर छोड़ चुका हूं। वे बहुत खतरनाक लोग हैं। दूसरे डॉक्टर वहां काम जारी रख सकते हैं, लेकिन मैं नहीं। मैं दोबारा वहां कभी नहीं जाऊंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है और अब वह अस्पताल में काम करने के लिए खुद को सुरक्षित नहीं मानते।

घटनाक्रम: कैसे भड़का विवाद

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब एक पुरुष और एक महिला डॉक्टर ने एक नवजात शिशु के परिजनों को बताया कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम द्वारा संचालित इस अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) पूरी तरह भरी हुई है, इसलिए बेहतर इलाज के लिए बच्चे को किसी अन्य अस्पताल में ले जाना जरूरी है। परिजनों ने इस पर स्थानीय पार्षद रमेश म्हात्रे से संपर्क किया, जो इसके बाद अपने कई समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे।

घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें म्हात्रे और उनके समर्थक पहले डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों से बहस करते और फिर मारपीट करते दिखे। फुटेज में यह भी दिखा कि जब एक महिला डॉक्टर मोबाइल पर बात कर रही थीं, तब म्हात्रे ने उनका फोन झटककर जमीन पर गिरा दिया। घटना में एक डॉक्टर के घायल होने की भी खबर है।

आरोपी पार्षद का पक्ष

मामला बढ़ने पर रमेश म्हात्रे ने महिला डॉक्टर से मारपीट के आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल मोबाइल इसलिए हटाया क्योंकि डॉक्टर उनकी बात का जवाब नहीं दे रही थीं। म्हात्रे ने माफी मांगने से भी इनकार करते हुए दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से एक नवजात की जान बची। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया है।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने रमेश म्हात्रे और उनके पाँच सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद तबीयत खराब होने की शिकायत पर म्हात्रे को ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

आम जनता और चिकित्सा समुदाय पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है। गौरतलब है कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के बाद पूरे देश में चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर माँग उठी थी। इस ताज़ा मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति अस्पतालों में कानून-व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं। डॉक्टर के इस्तीफे और शहर छोड़ने की घटना ने चिकित्सा जगत में गहरी चिंता पैदा की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक भय का प्रतीक है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को खोखला कर रहा है। NICU में बेड न होना एक प्रशासनिक सच्चाई थी, न कि लापरवाही — फिर भी डॉक्टरों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। जब तक राजनीतिक दलों के भीतर ऐसे कार्यकर्ताओं पर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक 'डॉक्टर सुरक्षा कानून' की माँग सिर्फ कागजों पर ही रहेगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ठाणे के शास्त्री नगर अस्पताल में क्या हुआ था?
6 जुलाई 2026 को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके समर्थकों ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ मारपीट की। विवाद तब शुरू हुआ जब डॉक्टरों ने नवजात के परिजनों को बताया कि NICU भरी हुई है और बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाना होगा।
डॉक्टर ने इस्तीफा क्यों दिया?
पीड़ित डॉक्टर ने कहा कि हमले के बाद वह मानसिक रूप से टूट गए हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा का गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने बताया कि गुंडे उनकी निगरानी कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देकर हमेशा के लिए शहर छोड़ दिया।
रमेश म्हात्रे के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस ने रमेश म्हात्रे और उनके पाँच सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सभी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद तबीयत खराब होने की शिकायत पर म्हात्रे को ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रमेश म्हात्रे ने अपने बचाव में क्या कहा?
म्हात्रे ने महिला डॉक्टर से मारपीट के आरोप से इनकार किया और कहा कि उन्होंने केवल मोबाइल इसलिए हटाया क्योंकि डॉक्टर उनकी बात का जवाब नहीं दे रही थीं। उन्होंने माफी मांगने से भी इनकार किया और दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से एक नवजात की जान बची।
यह घटना डॉक्टरों की सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम है?
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। एक डॉक्टर का डर के कारण इस्तीफा देकर शहर छोड़ना यह दर्शाता है कि राजनीतिक दबाव और हिंसा की आशंका चिकित्सा सेवाओं को किस हद तक प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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