कल्याण अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट: शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे समेत चार गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के कल्याण स्थित नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल में 8 जुलाई 2026 को शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके तीन साथियों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ मारपीट की। पूरी घटना अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए म्हात्रे सहित आरोपियों को हिरासत में लिया।
घटनाक्रम: कैसे हुई मारपीट
सहायक पुलिस आयुक्त सुहास हेमाडे ने मीडिया को बताया कि एक महिला मरीज इलाज के लिए शास्त्री नगर अस्पताल पहुँची थी। उसके उपचार को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद मरीज के रिश्तेदार आरोपियों के साथ अस्पताल पहुँचे और ड्यूटी पर मौजूद डॉ. वैभव सालुंखे, एक महिला डॉक्टर और एक नर्स के साथ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी दी।
हेमाडे के अनुसार, इस मामले में चार आरोपी हैं — पार्षद रमेश म्हात्रे, अक्षय करंडे, राजेश पवार और प्रमोद निकम। डॉ. सालुंखे की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
वीडियो वायरल, स्वास्थ्यकर्मियों में आक्रोश
घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिससे चिकित्सा समुदाय और आम नागरिकों में तीव्र रोष फैल गया। कई स्वास्थ्यसेवा संगठनों ने आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'चाहे डॉक्टर पुरुष हो या महिला, किसी के साथ मारपीट करना बहादुरी का काम नहीं है। सिर्फ इसलिए कि वह व्यक्ति हमारी पार्टी का है, हम उसके कामों का बचाव नहीं करेंगे।' हालाँकि, शिरसाट ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में डॉक्टरों का व्यवहार भी उचित नहीं होता और उन्होंने डॉक्टरों से मरीजों के साथ संवेदनशील रवैया अपनाने का आग्रह किया।
आरोपी पार्षद का पक्ष
आरोपों के बावजूद म्हात्रे ने महिला डॉक्टर पर शारीरिक हमले से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने डॉक्टर पर नहीं, बल्कि उनके मोबाइल फोन पर थप्पड़ मारा था क्योंकि वह उनके सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं। म्हात्रे ने तर्क दिया कि वह मरीज और नवजात शिशु की जान बचाने के लिए डॉक्टर का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे थे।
म्हात्रे ने स्पष्ट किया कि वे इस घटना के लिए माफी नहीं माँगेंगे। उन्होंने कहा कि उनके हस्तक्षेप से महिला और बच्चे की जान बचाने में मदद मिली। उन्होंने शर्त रखी कि यदि डॉक्टर अपने व्यवहार के लिए खेद व्यक्त करते हैं, तभी वे भी खेद जताएँगे।
आगे क्या होगा
पुलिस ने कहा है कि सभी चारों आरोपियों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया जारी है। गौरतलब है कि यह मामला महाराष्ट्र में अस्पतालों में हिंसा की बढ़ती घटनाओं की पृष्ठभूमि में सामने आया है। स्वास्थ्यकर्मी संगठनों ने राज्य सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी ढाँचे की माँग दोहराई है।