केडीएमसी अस्पताल में महिला डॉक्टर से मारपीट: गोगावले बोले — शिंदे करेंगे कार्रवाई, पुलिस जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) के शास्त्रीनगर अस्पताल में 8 जुलाई को शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके समर्थकों द्वारा ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ के साथ कथित मारपीट की घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। एनआईसीयू में बेड उपलब्ध न होने के कारण एक गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने से नाराज होकर यह हिंसा हुई बताई जा रही है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के नेताओं ने सख्त प्रतिक्रिया दी है।
मुख्य घटनाक्रम
आरोपों के अनुसार, शिंदे गुट के पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके साथ आए समर्थकों ने केडीएमसी के शास्त्रीनगर अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ के साथ बुरी तरह मारपीट की। विवाद की जड़ यह थी कि एनआईसीयू में बेड खाली न होने के चलते एक गर्भवती महिला को अन्यत्र रेफर किया गया था, जिससे कथित तौर पर पार्षद और उनके समर्थक भड़क उठे।
सरकार की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री भरतशेठ गोगावले ने कहा कि उन्होंने घटना से जुड़ा वीडियो टेलीविजन पर देखा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी' और शिवसेना नेता व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मामले में उचित कार्रवाई करेंगे। गोगावले ने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व पूरे मामले की जांच के बाद ही अंतिम फैसला करेगा।
मंत्री पंकज भोया ने बताया कि मामले में शिकायत प्राप्त हो चुकी है और पुलिस नियमानुसार जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि घटना में जनप्रतिनिधि की भूमिका और उन परिस्थितियों की भी जांच होगी जिनके कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ।
विधायक गायकवाड़ का बयान
शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा कि उन्होंने अब तक ऐसा कोई वीडियो नहीं देखा जिसमें रमेश म्हात्रे को महिला डॉक्टर के साथ मारपीट करते हुए स्पष्ट रूप से पहचाना जा सके। उनके अनुसार, उपलब्ध फुटेज में हाथापाई होती दिखती है, लेकिन वे इससे अधिक कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।
गायकवाड़ ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सिविल अस्पतालों में कर्मचारियों के रवैये को लेकर शिकायतें आती रही हैं और कुछ कर्मचारियों में यह मानसिकता होती है कि वेतन तो मिलता ही रहेगा, इसलिए मरीजों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'किसी भी परिस्थिति में हाथ उठाना उचित नहीं है' और विवाद का समाधान कानून के दायरे में ही होना चाहिए।
आम जनता और चिकित्सा समुदाय पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर बहस जारी है। कल्याण-डोंबिवली जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव पहले से अधिक है, और एनआईसीयू जैसी विशेष सेवाओं की कमी लंबे समय से एक समस्या बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की खामियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस जांच जारी है और पार्टी नेतृत्व द्वारा आंतरिक समीक्षा के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से औपचारिक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। यह देखना होगा कि क्या पार्षद रमेश म्हात्रे के विरुद्ध पार्टी अनुशासनात्मक कदम उठाती है या मामला केवल पुलिस जांच तक सीमित रहता है।