उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 4.50 करोड़ नामांकन, छात्राओं का GER 31.2 पर पहुंचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा नामांकन 4.50 करोड़ के नए शिखर पर पहुंच गया है — और इस उपलब्धि में सबसे बड़ी भूमिका छात्राओं की रही है। 2014-15 में जहाँ कुल नामांकन 3.42 करोड़ था, वहीं एक दशक में यह संख्या 1 करोड़ से अधिक बढ़ चुकी है।
नामांकन में एक दशक की छलांग
AISHE 2022-23 और 2023-24 की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2023-24 के बीच उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 3.42 करोड़ से बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली अब समाज के व्यापक तबकों तक अपनी पहुँच बना रही है। गौरतलब है कि यह वृद्धि केवल संस्थानों की संख्या बढ़ने से नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से वंचित वर्गों और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से भी संभव हुई है।
छात्राओं की अग्रणी भूमिका
रिपोर्ट के सबसे उल्लेखनीय तथ्यों में से एक यह है कि छात्राओं का नामांकन 1.57 करोड़ से बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया — यानी 42 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। सकल नामांकन अनुपात (GER) के मामले में भी छात्राएँ आगे हैं: उनका GER 31.2 तक पहुंच गया है, जो छात्रों के GER से अधिक है। लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) 2023-24 में 1.08 दर्ज किया गया, और यह लगातार सात वर्षों से 1 से ऊपर बना हुआ है — जो इस बात का प्रमाण है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों से अधिक है।
सामाजिक समावेशन की तस्वीर
रिपोर्ट सामाजिक समावेशन के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत देती है। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों का नामांकन 46.07 लाख से बढ़कर 69.72 लाख हो गया है। अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की संख्या 16.41 लाख से बढ़कर 28.83 लाख तक पहुंच गई है। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों का नामांकन 1.13 करोड़ से बढ़कर 1.80 करोड़ हो गया है। ये आँकड़े संकेत देते हैं कि उच्च शिक्षा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक समावेशी हो रही है।
STEM में बढ़ती रुचि, महिलाओं की हिस्सेदारी 44%
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में युवाओं की रुचि उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। इन विषयों में कुल नामांकन 1.02 करोड़ तक पहुंच गया है। विशेष बात यह है कि STEM पाठ्यक्रमों में छात्राओं की हिस्सेदारी बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई है — जो तकनीकी शिक्षा में बदलती सामाजिक सोच का स्पष्ट संकेत है।
शिक्षक संख्या में भी वृद्धि, महिला शिक्षकों की बड़ी भूमिका
उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है। 2023-24 में देश में 17.32 लाख शिक्षक कार्यरत थे, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिला शिक्षकों की संख्या एक दशक में 5.69 लाख से बढ़कर 7.78 लाख हो गई है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार ये आँकड़े उच्च शिक्षा के विस्तार और नई शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति के प्रमाण हैं। आने वाले वर्षों में GER को और ऊपर ले जाने के लिए नीतिगत प्रयास जारी रहने की उम्मीद है।