अनुसूचित जाति के 75 लाख लाभार्थियों को केंद्र सरकार ने जारी किए ₹7,981 करोड़, शिक्षा योजनाओं में बड़ा उछाल
सारांश
Key Takeaways
- ₹7,981.47 करोड़ की राशि वित्त वर्ष 2025-26 में 75 लाख से अधिक एससी लाभार्थियों को जारी की गई।
- पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में 21 प्रतिशत की सर्वाधिक सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
- श्रेष्ठा योजना के व्यय में पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- एनएसकेएफडीसी ने 29,448 लाभार्थियों को ₹223.47 करोड़ वितरित किए, जिसमें 97%25 महिलाएं शामिल हैं।
- औसत ऋण राशि ₹77,000 हुई — पिछले वर्ष से 16.67%25 अधिक।
- निगम ने अब तक 6.08 लाख से अधिक व्यक्तियों को कुल ₹3,340.67 करोड़ का ऋण दिया।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति (एससी) के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹7,981.47 करोड़ की धनराशि वितरित की है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई। यह राशि मुख्यतः एससी वर्ग के हाशिए पर खड़े छात्रों के शैक्षिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से दी गई है।
छात्रवृत्ति योजनाओं में सालाना वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के व्यय में उल्लेखनीय सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अनुसूचित जाति और अन्य के लिए पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो सबसे अधिक है।
अनुसूचित जाति के लिए स्नातकोत्तर छात्रवृत्ति योजना में 11.23 प्रतिशत और उच्च स्तरीय शिक्षा हेतु केंद्रीय क्षेत्र छात्रवृत्ति में 13.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दलित छात्रों की उच्च शिक्षा पर सरकार का विशेष ध्यान है।
श्रेष्ठा योजना में भी बढ़ा खर्च
अनुसूचित जाति के लिए लक्षित क्षेत्रों के उच्च विद्यालयों में आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्ठा) के अंतर्गत व्यय में वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह योजना एससी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही है।
श्रेष्ठा योजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों के छात्रों को लक्षित करती है जहां अनुसूचित जाति की आबादी अधिक है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सीमित है।
एनएसकेएफडीसी ने महिलाओं को दी प्राथमिकता
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 29,448 लाभार्थियों को ₹223.47 करोड़ का रियायती वित्त वितरित किया। इसमें उल्लेखनीय तथ्य यह है कि वितरित कुल राशि में से लगभग 97 प्रतिशत महिला लाभार्थियों को जारी की गई।
औसत ऋण राशि बढ़कर ₹77,000 हो गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 16.67 प्रतिशत अधिक है। 785 करोड़ रुपए की अधिकृत शेयर पूंजी और 720 करोड़ रुपए की चुकता पूंजी के साथ निगम ने अब तक कुल ₹3,340.67 करोड़ का ऋण वितरित किया है, जिससे 6.08 लाख से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।
एनएसकेएफडीसी की भूमिका और व्यापक सामाजिक दायित्व
अक्टूबर 1997 से कार्यरत एनएसकेएफडीसी रियायती वित्त और सहायता हस्तक्षेपों के जरिए सफाई कर्मचारियों, कचरा बीनने वालों, हाथ से मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान पर केंद्रित है। यह संस्था उन वर्गों के लिए वित्तीय सेतु का काम करती है जो पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से प्रायः वंचित रह जाते हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग विभिन्न अधिनियमों और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, विअधिसूचित और खानाबदोश जनजातियों (डीएनटी) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के उत्थान की दिशा में काम कर रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में अनुसूचित जाति कल्याण बजट में लगातार वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में छात्रवृत्ति योजनाओं में दोहरे अंक की वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकार दलित समुदाय की शैक्षिक भागीदारी बढ़ाने को नीतिगत प्राथमिकता दे रही है। आने वाले महीनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा और लाभार्थियों की संख्या में और विस्तार की संभावना है।