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असम में उच्च शिक्षा पर ₹176 करोड़ का निवेश: 2.5 लाख से अधिक छात्रों को मिला लाभ

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असम में उच्च शिक्षा पर ₹176 करोड़ का निवेश: 2.5 लाख से अधिक छात्रों को मिला लाभ

सारांश

असम सरकार ने 2025-26 में निजुत मोइना और निजुत बाबू आसोनी योजनाओं के ज़रिए उच्च शिक्षा पर ₹176 करोड़ से अधिक खर्च किए। 2.5 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हुए — यह राज्य की शिक्षा-केंद्रित मानव संसाधन रणनीति का अब तक का सबसे बड़ा एकल-वर्षीय व्यय है।

मुख्य बातें

असम सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में उच्च शिक्षा योजनाओं पर ₹176 करोड़ से अधिक का निवेश किया।
मुख्यमंत्री निजुत मोइना आसोनी योजना से 2,00,727 छात्रों को ₹167.05 करोड़ की सहायता मिली।
मुख्यमंत्री निजुत बाबू आसोनी योजना के तहत 49,438 लाभार्थियों को ₹9.78 करोड़ प्रदान किए गए।
दोनों योजनाओं को मिलाकर 2.5 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हुए।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी साझा की और शिक्षा को राज्य की सर्वोच्च नीतिगत प्राथमिकता बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 25 जून 2025 को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दो प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से उच्च शिक्षा क्षेत्र में ₹176 करोड़ से अधिक का निवेश किया है, जिससे 2.5 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए आंकड़ों के ज़रिए यह जानकारी दी।

दोनों योजनाओं का ब्यौरा

मुख्यमंत्री निजुत मोइना आसोनी योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 2,00,727 छात्रों को ₹167.05 करोड़ की वित्तीय सहायता वितरित की गई। वहीं, मुख्यमंत्री निजुत बाबू आसोनी योजना के अंतर्गत 49,438 लाभार्थियों को ₹9.78 करोड़ की राशि प्रदान की गई। दोनों योजनाओं को मिलाकर कुल वित्तीय सहायता ₹176 करोड़ से अधिक हो गई।

सरकार की मंशा और लक्ष्य

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, 'पिछले वर्ष हमने असम की सबसे बड़ी ताकत — हमारे युवाओं — में ₹176 करोड़ से अधिक का निवेश किया। निजुत मोइना और बाबू आसोनी योजनाओं के माध्यम से हम अपने बच्चों को उच्च शिक्षा तक पहुँच प्रदान कर रहे हैं, ताकि वे असम में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के वाहक बन सकें।' अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं का उद्देश्य विशेष रूप से आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा को सुलभ बनाना है।

शिक्षा नीति की व्यापक रणनीति

असम सरकार ने शिक्षा को अपनी मानव संसाधन विकास रणनीति का केंद्रीय स्तंभ घोषित किया है। इस रणनीति के तहत नामांकन दर बढ़ाने, स्कूल छोड़ने की दर घटाने और छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कई पहलें लागू की जा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व भारत के कई राज्य उच्च शिक्षा में नामांकन के राष्ट्रीय औसत से पीछे हैं।

आगे की राह

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शैक्षिक बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना और छात्र कल्याण पहलों का विस्तार करना सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में बना रहेगा। सरमा के अनुसार, शिक्षा में किया गया यह निवेश एक कुशल और शिक्षित पीढ़ी तैयार करेगा जो असम के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और सामाजिक उन्नति में सक्रिय भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन योजनाओं से लाभान्वित छात्र वास्तव में अपनी डिग्री पूरी कर पा रहे हैं या नहीं — केवल नामांकन संख्या नहीं, बल्कि उत्तीर्णता और रोज़गार दर ही सफलता का वास्तविक पैमाना होगी। उत्तर-पूर्व भारत में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत से पीछे रहा है, और वित्तीय सहायता ज़रूरी है लेकिन पर्याप्त नहीं। बिना गुणवत्तापूर्ण संस्थागत ढाँचे और रोज़गार-संबद्ध पाठ्यक्रमों के, यह निवेश दीर्घकालिक परिवर्तन की बजाय अल्पकालिक राहत बनकर रह सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम की निजुत मोइना आसोनी और निजुत बाबू आसोनी योजनाएँ क्या हैं?
ये असम सरकार की दो प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाएँ हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय बाधाएँ योग्य छात्रों की उच्च शिक्षा में रुकावट न बनें।
2025-26 में इन योजनाओं से कितने छात्रों को लाभ मिला?
वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों योजनाओं को मिलाकर 2.5 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हुए। निजुत मोइना आसोनी से 2,00,727 और निजुत बाबू आसोनी से 49,438 छात्रों को सहायता मिली।
असम सरकार ने उच्च शिक्षा पर कुल कितना खर्च किया?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में दोनों योजनाओं पर कुल ₹176 करोड़ से अधिक खर्च किए गए — जिसमें ₹167.05 करोड़ निजुत मोइना और ₹9.78 करोड़ निजुत बाबू आसोनी के तहत वितरित हुए।
इन योजनाओं का लाभ किन छात्रों को मिलता है?
अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं का लाभ विशेष रूप से आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के पात्र छात्रों को मिलता है जो उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित हैं। योजनाओं का उद्देश्य अधिक समावेशी उच्च शिक्षा प्रणाली बनाना है।
असम सरकार की शिक्षा नीति का दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है?
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, शिक्षा में यह निवेश एक कुशल और शिक्षित पीढ़ी तैयार करने के लिए है जो असम के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और सामाजिक उन्नति में योगदान दे सके। शैक्षिक बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना और छात्र कल्याण पहलों का विस्तार सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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