असम की राष्ट्रीय GDP में हिस्सेदारी 1.71% से बढ़कर 1.95% हुई, CM हिमंता सरमा ने गिनाईं उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 मई 2026 को प्रमुख आर्थिक संकेतक साझा करते हुए कहा कि राज्य मजबूत वित्तीय अनुशासन और निरंतर आर्थिक विस्तार के बल पर 'विकसित असम' के लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में असम की हिस्सेदारी 2020-21 के 1.71 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 1.95 प्रतिशत हो गई है।
मुख्य आर्थिक उपलब्धियाँ
मुख्यमंत्री द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, असम ने 2020 से 2025 तक लगातार पाँच वर्षों तक राजस्व अधिशेष बनाए रखा है — अर्थात् राज्य ने प्रत्येक वर्ष व्यय की तुलना में अधिक राजस्व अर्जित किया। यह उपलब्धि सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में अनुशासन की दृष्टि से उल्लेखनीय मानी जाती है। सरमा ने इसे 'अटल, अविचल और अग्रगामी असम' के निर्माण की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
सरकार की प्राथमिकताएँ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान बुनियादी ढाँचे के विकास, निवेश संवर्धन, वित्तीय अनुशासन और जन-कल्याणकारी शासन पर केंद्रित रहा है। अधिकारियों ने बताया कि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए कनेक्टिविटी सुधार, औद्योगिक निवेश और वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों को मज़बूत करने पर काम जारी है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में सरमा ने कहा, 'एक विकसित असम की नींव वित्तीय समझदारी और लगातार आर्थिक विस्तार पर टिकी होती है।'
पूर्वोत्तर में उभरते निवेश केंद्र के रूप में असम
यह आँकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब असम खुद को पूर्वोत्तर भारत के एक प्रमुख आर्थिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। राज्य सरकार उद्योग, कृषि, पर्यटन और सेवा क्षेत्रों में विकास की गति तेज़ करने पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश आकर्षित करना केंद्र सरकार की 'एक्ट ईस्ट' नीति का भी अहम हिस्सा रहा है।
आगे की राह
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जन-कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं को लागू करते समय वित्तीय समझदारी प्रमुख प्राथमिकता बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि GDP हिस्सेदारी में यह वृद्धि तब और अधिक अर्थपूर्ण होगी जब यह रोज़गार सृजन और प्रति व्यक्ति आय में वास्तविक सुधार से जुड़े।