क्या असम की जीडीपी 2027 तक 10 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ जाएगी?: हिमंता बिस्वा सरमा
सारांश
Key Takeaways
- असम की जीडीपी 2027 तक 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है।
- राज्य में तेज आर्थिक विकास हो रहा है।
- बिहू, झुमौर, और बागुरुम्बा जैसे नृत्य अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।
- सरकार ने 1.56 लाख युवाओं को रोजगार दिया है।
- असम में प्रोटॉन थेरेपी की सुविधा शुरू होने जा रही है।
डिब्रूगढ़, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को जानकारी दी कि राज्य की जीडीपी 2027 तक 10 लाख करोड़ रुपए के स्तर तक पहुंचने की संभावना है।
77वें गणतंत्र दिवस समारोह में डिब्रूगढ़ के खानिकर परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य के तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य की जीडीपी हर साल 13 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और 2027 तक यह आंकड़ा 10 लाख करोड़ रुपए को छू सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व आर्थिक मंच में असम की पहली भागीदारी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो राज्य के पिछड़े क्षेत्रों को वैश्विक स्तर पर जोड़ने और निवेश के लिए तैयार गंतव्य बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि यह भागीदारी असम की आर्थिक क्षमता में बढ़ते राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विश्वास को प्रदर्शित करती है। पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य ने संस्कृति, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और शांति स्थापना जैसे सभी क्षेत्रों में प्रगति की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहू, झुमौर और बागुरुम्बा जैसे पारंपरिक नृत्य रूपों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है, जबकि असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और गणतंत्र दिवस को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः पुष्टि बताया।
उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को संविधान का मुख्य निर्माता बताते हुए कहा कि संविधान आज भी भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का मार्गदर्शन करता है।
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसके परिणामस्वरूप 1.56 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है।
एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहल की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि असम भारत का पहला राज्य होगा जहां सरकारी अस्पतालों में प्रोटॉन थेरेपी की सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे कैंसर देखभाल को काफी मजबूती मिलेगी।