गुजरात में SC छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का विस्तार, ₹18 करोड़ की योजना को मंजूरी — 3,000 नए छात्र होंगे लाभान्वित

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गुजरात में SC छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का विस्तार, ₹18 करोड़ की योजना को मंजूरी — 3,000 नए छात्र होंगे लाभान्वित

सारांश

गुजरात ने SC पुरुष छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ाया — ₹18 करोड़ की योजना में आय सीमा ₹2.5 लाख से ₹6 लाख की गई। 2026-27 से 3,000 अतिरिक्त छात्रों को DBT के जरिए सीधे लाभ मिलेगा।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने ₹18 करोड़ की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को 19 मई 2026 को मंजूरी दी।
वार्षिक पारिवारिक आय सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख की गई, जिससे निम्न-मध्यम आय वर्ग के SC पुरुष छात्र पहली बार पात्र होंगे।
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में अनुमानित 3,000 अतिरिक्त छात्र लाभान्वित होंगे।
सभी भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से सीधे बैंक खातों में जाएंगे; आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
पात्रता के लिए योग्यता परीक्षा में न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य; देखरेख अनुसूचित जाति कल्याण निदेशक करेंगे।
जवाबदेही के लिए सामाजिक ऑडिट और तीसरे पक्ष के सत्यापन का प्रावधान।

गुजरात सरकार ने 19 मई 2026 को ₹18 करोड़ की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत मध्यम आय वाले परिवारों से आने वाले अनुसूचित जाति (SC) के पुरुष छात्रों को पहली बार राज्य-समर्थित शैक्षिक सहायता मिलेगी। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू इस विस्तारित योजना के अंतर्गत अनुमानित तौर पर 3,000 अतिरिक्त छात्र लाभान्वित होंगे।

योजना में क्या बदला

सबसे बड़ा बदलाव वार्षिक पारिवारिक आय सीमा में किया गया है। पहले केंद्र प्रायोजित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत केवल ₹2.5 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के SC छात्र ही पात्र थे। अब इस सीमा को बढ़ाकर ₹6 लाख कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि ₹2.5 लाख से ₹6 लाख के बीच वार्षिक आय वाले परिवारों के छात्रों को अब राज्य की निधि से सहायता प्राप्त होगी।

गौरतलब है कि अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए यह योजना पहले से ही लागू थी। यह विस्तार विशेष रूप से पुरुष छात्रों के लिए उस कवरेज की कमी को दूर करता है जो निम्न-मध्यम आय वर्ग में बनी हुई थी।

पात्रता के मानदंड

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के बयान के अनुसार, योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शैक्षणिक शर्तें पूरी करनी होंगी:

कक्षा 10 या 12 के बाद डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को अपनी योग्यता परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने अनिवार्य हैं। स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए कक्षा 12 में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। उच्च शिक्षा के लिए डिग्री या डिप्लोमा स्तर पर भी निरंतर 50 प्रतिशत से अधिक शैक्षणिक प्रदर्शन बनाए रखना होगा।

वित्तीय सहायता और क्रियान्वयन

यह योजना शैक्षणिक भत्ते के साथ-साथ स्वीकृत गैर-वापसी योग्य शुल्कों की प्रतिपूर्ति भी प्रदान करेगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जाएंगे।

आवेदन से लेकर मंजूरी तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। निगरानी के लिए DBT पोर्टल और मुख्यमंत्री के डैशबोर्ड का उपयोग किया जाएगा। जहाँ आवश्यक हो, उपकरण या किट की खरीद गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से की जाएगी।

जवाबदेही और निगरानी

योजना की देखरेख का जिम्मा अनुसूचित जाति कल्याण निदेशक को सौंपा गया है। विभाग ने समय-समय पर सामाजिक ऑडिट और तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापन का भी प्रावधान किया है, जिनकी रिपोर्ट समीक्षा के लिए राज्य सरकार को सौंपी जाएंगी। यह योजना स्वीकृत बजट आवंटन के दायरे में संचालित होगी और इसमें लाभार्थियों की संख्या 3,000 तक सीमित रहेगी।

यह मंजूरी मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा के नेतृत्व में दी गई है। क्रियान्वयन केंद्र प्रायोजित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के दिशानिर्देशों के अनुरूप होगा।

आगे की राह

यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में SC छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुँच को लेकर नीतिगत बहस तेज है। गुजरात का यह मॉडल — जिसमें DBT, ऑनलाइन प्रक्रिया और सामाजिक ऑडिट को एक साथ जोड़ा गया है — अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से इस योजना के लागू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है। आय सीमा का ₹2.5 लाख से ₹6 लाख तक विस्तार एक सही दिशा में कदम है — यह वह वर्ग है जो न तो गरीबी रेखा के दायरे में आता है और न ही उसके पास उच्च शिक्षा का खर्च उठाने की सामर्थ्य है। हालाँकि, 3,000 की कठोर ऊपरी सीमा एक चिंता का विषय है: यदि माँग इससे अधिक हुई — जो कि आय सीमा के विस्तार को देखते हुए संभव है — तो पात्र छात्र बाहर रह सकते हैं। DBT और सामाजिक ऑडिट के प्रावधान सराहनीय हैं, लेकिन इनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निगरानी तंत्र कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर काम करे।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात की नई पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना क्या है?
यह ₹18 करोड़ की राज्य-समर्थित योजना है जो अनुसूचित जाति के पुरुष छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक स्तर पर वित्तीय सहायता देती है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू इस योजना में आय सीमा बढ़ाकर ₹6 लाख की गई है और 3,000 अतिरिक्त छात्रों को लाभ मिलेगा।
इस योजना के लिए पात्रता की शर्तें क्या हैं?
परिवार की वार्षिक आय ₹6 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। डिप्लोमा या स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए योग्यता परीक्षा में न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य हैं। उच्च शिक्षा में नामांकित छात्रों को डिग्री या डिप्लोमा स्तर पर भी 50% से अधिक प्रदर्शन बनाए रखना होगा।
पहले इस योजना में कौन पात्र था और अब क्या बदला?
पहले केवल ₹2.5 लाख तक की वार्षिक आय वाले SC परिवारों के छात्र ही पात्र थे। अब ₹2.5 लाख से ₹6 लाख के बीच आय वाले परिवारों के छात्रों को भी राज्य की निधि से सहायता मिलेगी। SC छात्राओं के लिए यह योजना पहले से ही उपलब्ध थी।
छात्रवृत्ति की राशि कैसे मिलेगी?
सभी वित्तीय सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसमें शैक्षणिक भत्ता और स्वीकृत गैर-वापसी योग्य शुल्कों की प्रतिपूर्ति शामिल है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
योजना की निगरानी कौन करेगा?
योजना की देखरेख अनुसूचित जाति कल्याण निदेशक करेंगे। DBT पोर्टल और मुख्यमंत्री के डैशबोर्ड से प्रगति की निगरानी होगी। जवाबदेही के लिए समय-समय पर सामाजिक ऑडिट और तीसरे पक्ष के सत्यापन की भी व्यवस्था है।
राष्ट्र प्रेस
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