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एससी-ओबीसी छात्रवृत्ति: डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त, 1.2 करोड़ छात्रों को राहत

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एससी-ओबीसी छात्रवृत्ति: डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त, 1.2 करोड़ छात्रों को राहत

सारांश

केंद्र सरकार ने एससी और ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति प्रक्रिया से डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता हटा दी है — एक कदम जो हर साल 1.2 करोड़ विद्यार्थियों को सीधे राहत देगा। उमंग पर 'सेतु' पोर्टल के साथ यह सुधार दस्तावेज़ी बाधाओं को कम कर वंचित छात्रों तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है।

मुख्य बातें

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 19 जून 2025 को एससी और ओबीसी छात्रवृत्ति के लिए डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त की।
इस फैसले से प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाओं के तहत हर वर्ष लाभान्वित होने वाले लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को राहत मिलेगी।
गृह राज्य से बाहर पढ़ रहे छात्रों को सबसे अधिक लाभ — डोमिसाइल प्रमाण पत्र बनवाना उनके लिए सबसे बड़ी बाधा थी।
उमंग प्लेटफॉर्म पर एसईटीयू (SETU) पोर्टल लॉन्च; आवेदन, निगरानी और सत्यापन एक ही जगह।
वित्त वर्ष 2025-26 में एससी वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹7,981.47 करोड़ वितरित।
प्री-मैट्रिक में 21% , पोस्ट-मैट्रिक में 11.23% और टॉप क्लास एजुकेशन में 13.5% व्यय वृद्धि दर्ज।

केंद्र सरकार ने 19 जून 2025 को अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को बड़ी प्रशासनिक राहत देते हुए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत डोमिसाइल (निवास) प्रमाण पत्र जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के इस फैसले से हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ छात्र लाभान्वित होते हैं।

मुख्य बदलाव क्या हुआ

अब तक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एससी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को अपने गृह राज्य का डोमिसाइल प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होता था। यह शर्त विशेष रूप से उन छात्रों के लिए बाधा बनती थी जो अपने गृह राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य के शैक्षणिक संस्थान में अध्ययनरत हैं। इस अनिवार्यता को हटाने से दस्तावेज़ी औपचारिकताएँ घटेंगी और आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल एवं छात्र-अनुकूल बनेगी।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल गवर्नेंस और 'ईज़ ऑफ लिविंग' को व्यापक नीतिगत प्राथमिकता दे रही है। गौरतलब है कि दस्तावेज़ी बाधाएँ अक्सर पात्र परंतु वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति से दूर रखती हैं।

उमंग पर 'सेतु' प्लेटफॉर्म की शुरुआत

डिजिटल सुधारों को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने उमंग (UMANG) प्लेटफॉर्म पर एसईटीयू (SETU — शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप) नामक व्यापक डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस एकीकृत मंच पर पात्र छात्र, संस्थागत नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी और राज्य स्तरीय अधिकारी — सभी एक ही स्थान पर आवेदन पंजीकरण, निगरानी, सत्यापन और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

मंत्रालय के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी और छात्रों का समय व धन दोनों की बचत होगी।

आम छात्रों पर असर

इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ उन हज़ारों विद्यार्थियों को मिलेगा जो उच्च शिक्षा के लिए अपने गृह राज्य से बाहर गए हैं और डोमिसाइल प्रमाण पत्र बनवाने में आने वाली कठिनाइयों के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते थे। सरकार का कहना है कि यह कदम समावेशी विकास को बढ़ावा देने और कल्याणकारी योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

वित्तीय आँकड़े और व्यय में वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹7,981.47 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई। छात्रवृत्ति योजनाओं पर व्यय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है — प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में 21%, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में 11.23% और टॉप क्लास एजुकेशन छात्रवृत्ति में 13.5% की वृद्धि हुई है।

आगे क्या

विभाग ने दोहराया है कि वह तकनीक-आधारित सुधारों के ज़रिये अधिकाधिक छात्रों तक पहुँच बनाने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। एसईटीयू प्लेटफॉर्म के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया और तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि पात्र छात्रों तक छात्रवृत्ति की वास्तविक पहुँच क्यों सीमित रही है — दस्तावेज़ी बाधाएँ एकमात्र कारण नहीं थीं। जागरूकता की कमी, बैंक खाता न होना और संस्थागत सत्यापन में देरी जैसी समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं। एसईटीयू पोर्टल डिजिटल बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करता है, परंतु ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच और डिजिटल साक्षरता की सीमाएँ इसकी प्रभावशीलता को परखेंगी। ₹7,981 करोड़ के वितरण के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या यह सुधार वास्तव में 'लास्ट माइल' तक पहुँचता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससी और ओबीसी छात्रवृत्ति के लिए डोमिसाइल प्रमाण पत्र क्यों हटाया गया?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने दस्तावेज़ी बोझ कम करने और छात्रवृत्ति प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने के लिए यह अनिवार्यता समाप्त की है। विशेष रूप से गृह राज्य से बाहर पढ़ रहे छात्रों को डोमिसाइल प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाई होती थी, जिससे वे छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते थे।
इस बदलाव से कितने छात्रों को फायदा होगा?
सरकार के अनुसार प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ छात्र लाभान्वित होते हैं। डोमिसाइल अनिवार्यता हटने से इन सभी छात्रों की आवेदन प्रक्रिया सरल होगी।
उमंग पर एसईटीयू (SETU) पोर्टल क्या है?
एसईटीयू (शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप) उमंग प्लेटफॉर्म पर शुरू किया गया एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल है। इस पर छात्र, संस्थागत नोडल अधिकारी, जिला और राज्य स्तरीय अधिकारी एक ही जगह से आवेदन पंजीकरण, निगरानी और सत्यापन कर सकते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में एससी छात्रों को कितनी छात्रवृत्ति राशि मिली?
वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹7,981.47 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई। प्री-मैट्रिक में 21%, पोस्ट-मैट्रिक में 11.23% और टॉप क्लास एजुकेशन छात्रवृत्ति में 13.5% व्यय वृद्धि दर्ज की गई।
क्या अब छात्रवृत्ति के लिए कोई दस्तावेज़ नहीं देना होगा?
केवल डोमिसाइल (निवास) प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त की गई है। जाति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ पहले की तरह लागू रहेंगे। यह बदलाव विशेष रूप से उन छात्रों के लिए राहतकारी है जो अपने गृह राज्य से बाहर पढ़ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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