एससी-ओबीसी छात्रवृत्ति: डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त, 1.2 करोड़ छात्रों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 19 जून 2025 को अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को बड़ी प्रशासनिक राहत देते हुए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत डोमिसाइल (निवास) प्रमाण पत्र जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के इस फैसले से हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ छात्र लाभान्वित होते हैं।
मुख्य बदलाव क्या हुआ
अब तक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एससी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को अपने गृह राज्य का डोमिसाइल प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होता था। यह शर्त विशेष रूप से उन छात्रों के लिए बाधा बनती थी जो अपने गृह राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य के शैक्षणिक संस्थान में अध्ययनरत हैं। इस अनिवार्यता को हटाने से दस्तावेज़ी औपचारिकताएँ घटेंगी और आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल एवं छात्र-अनुकूल बनेगी।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल गवर्नेंस और 'ईज़ ऑफ लिविंग' को व्यापक नीतिगत प्राथमिकता दे रही है। गौरतलब है कि दस्तावेज़ी बाधाएँ अक्सर पात्र परंतु वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति से दूर रखती हैं।
उमंग पर 'सेतु' प्लेटफॉर्म की शुरुआत
डिजिटल सुधारों को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने उमंग (UMANG) प्लेटफॉर्म पर एसईटीयू (SETU — शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप) नामक व्यापक डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस एकीकृत मंच पर पात्र छात्र, संस्थागत नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी और राज्य स्तरीय अधिकारी — सभी एक ही स्थान पर आवेदन पंजीकरण, निगरानी, सत्यापन और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी और छात्रों का समय व धन दोनों की बचत होगी।
आम छात्रों पर असर
इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ उन हज़ारों विद्यार्थियों को मिलेगा जो उच्च शिक्षा के लिए अपने गृह राज्य से बाहर गए हैं और डोमिसाइल प्रमाण पत्र बनवाने में आने वाली कठिनाइयों के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते थे। सरकार का कहना है कि यह कदम समावेशी विकास को बढ़ावा देने और कल्याणकारी योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
वित्तीय आँकड़े और व्यय में वृद्धि
वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹7,981.47 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई। छात्रवृत्ति योजनाओं पर व्यय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है — प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में 21%, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में 11.23% और टॉप क्लास एजुकेशन छात्रवृत्ति में 13.5% की वृद्धि हुई है।
आगे क्या
विभाग ने दोहराया है कि वह तकनीक-आधारित सुधारों के ज़रिये अधिकाधिक छात्रों तक पहुँच बनाने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। एसईटीयू प्लेटफॉर्म के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया और तेज़ होने की उम्मीद है।