कर्नाटक के एससी छात्रों को 3 साल में ₹1,178 करोड़ की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, केंद्र ने राज्यसभा में दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कर्नाटक के अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों को केंद्र प्रायोजित पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के अंतर्गत कुल ₹1,178.20 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा जारी किया है। यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने 9 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।
वर्षवार आवंटन का विवरण
मंत्री आठवले द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक को 2023-24 में ₹421.08 करोड़, 2024-25 में ₹422.90 करोड़ और 2025-26 में ₹334.22 करोड़ जारी किए गए। तीनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर यह राशि ₹1,178.20 करोड़ बनती है। 2025-26 में जारी राशि पिछले दो वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही, जो संभवतः राज्य सरकार द्वारा पोर्टल पर सत्यापित डेटा के अंतिम रूप देने की समयसीमा से जुड़ी हो सकती है।
योजना की संरचना और क्रियान्वयन
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग इस योजना को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के माध्यम से केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू करता है। गौरतलब है कि 2021-22 से यह योजना डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मोड के ज़रिए संचालित हो रही है, जिससे छात्रों के बैंक खातों में सीधे धनराशि पहुँचती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।
केंद्रीय हिस्सा जारी करने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर है कि राज्य सरकारें नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर भुगतान का अंतिम रूप से सत्यापित डेटा साझा करें। यह योजना पूरे भारत में मान्यता प्राप्त संस्थानों के सभी पात्र एससी छात्रों के लिए खुली और मांग-आधारित है।
डीएपीएससी ढाँचे की भूमिका
अनुसूचित जातियों के लिए विकास कार्य योजना (डीएपीएससी) के तहत नीति आयोग ने 2017 में फंड आवंटन के दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक संबंधित मंत्रालय या विभाग अपनी योजनाओं के माध्यम से एससी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए धनराशि आवंटित करता है। आवंटित फंड केंद्रीय बजट के व्यय विवरण के स्टेटमेंट 10ए में दर्ज किए जाते हैं।
आम जनता पर असर
यह योजना कर्नाटक के उन एससी छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो मैट्रिक के बाद उच्च शिक्षा जारी रखना चाहते हैं। डीबीटी-आधारित वितरण प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि स्कॉलरशिप की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में एससी छात्रों की भागीदारी बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी हुई है।
आगे की राह
केंद्र सरकार के अनुसार, यह योजना मांग-आधारित है, अर्थात पात्र छात्रों की संख्या बढ़ने पर आवंटन में भी वृद्धि संभव है। राज्य सरकार द्वारा समय पर डेटा सत्यापन और पोर्टल अपलोडिंग से आगामी वर्षों में फंड प्रवाह और सुचारू होने की उम्मीद है।