23 सितंबर 2026
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'वंदे मातरम' राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, विरोध पर श्याम रजक ने माँगा आत्ममंथन

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'वंदे मातरम' राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, विरोध पर श्याम रजक ने माँगा आत्ममंथन

सारांश

जदयू नेता श्याम रजक ने साफ कहा — 'वंदे मातरम' न गैरकानूनी है, न राष्ट्रविरोधी। भगत सिंह से अशफाक तक के बलिदान का हवाला देते हुए उन्होंने विरोधियों से आत्ममंथन माँगा। साथ ही SIR विवाद की जवाबदेही चुनाव आयोग पर डाली और जमुई मामले पर राजनीति से परहेज़ की अपील की।

मुख्य बातें

जदयू नेता श्याम रजक ने 23 सितंबर 2026 को पटना में 'वंदे मातरम' को राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया।
रजक ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद , भगत सिंह , सुखदेव , राजगुरु और अशफाक उल्ला खान ने 'वंदे मातरम' के उद्घोष के साथ आज़ादी की लड़ाई लड़ी।
SIR पर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति के सवाल पर रजक ने कहा कि जवाब निर्वाचन आयोग को देना चाहिए।
जमुई घटना पर रजक ने राजनीति से परहेज़ की अपील करते हुए सभी पक्षों से मिलकर समाधान खोजने को कहा।
जीतन राम मांझी के 'जीरो टॉलरेंस' बयान पर रजक ने टिप्पणी से परहेज़ किया, लेकिन परोक्ष रूप से सवाल उठाए।

जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने 23 सितंबर 2026 को पटना में कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर उठे विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'वंदे मातरम' न तो गैरकानूनी है और न ही राष्ट्रविरोधी — बल्कि यह देश की आज़ादी की लड़ाई से जुड़ी राष्ट्रभक्ति की सबसे गहरी अभिव्यक्ति है। इसके साथ ही उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति और जमुई की घटना पर भी अपनी बात रखी।

'वंदे मातरम' और राष्ट्रीय विरासत

श्याम रजक ने कहा कि 'वंदे मातरम' में राष्ट्रीयता की भावना समाई हुई है। उन्होंने बताया कि इस गान के छह छंद हैं और इसका उल्लेख शरत चंद्र के लेखन में भी मिलता है। उनके अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों ने 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते हुए अंग्रेज़ों के खिलाफ जागृति पैदा की थी।

रजक ने कहा कि जो लोग इस गान का विरोध करते हैं, उन्हें इन ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम' गाने में किसी की बात को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।

SIR विवाद पर चुनाव आयोग को जवाबदेही

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति के सवाल पर श्याम रजक ने कहा कि वे इस मामले में निर्वाचन आयोग के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं। उनके अनुसार, इस विषय पर जो सवाल उठाए गए हैं, उनका जवाब देने के लिए सबसे उपयुक्त संस्था स्वयं चुनाव आयोग है।

गौरतलब है कि SIR पर विपक्षी दलों की ओर से भी आपत्तियाँ जताई जाती रही हैं, और आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरें हाल के दिनों में चर्चा में रही हैं।

जमुई घटना: राजनीति से ऊपर उठने की अपील

जमुई में हुई संवेदनशील घटना पर रजक ने कहा कि यह मामला सभी को मर्माहत करने वाला है और ऐसे विषयों पर राजनीति उचित नहीं है। उन्होंने सत्ता पक्ष, विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर समाधान तलाशने की अपील की।

रजक ने कहा कि समाज की मानसिकता में बदलाव लाना और युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करना ज़रूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

जीतन राम मांझी के बयान पर संयमित प्रतिक्रिया

बिहार में अपराध को लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी के 'जीरो टॉलरेंस' वाले बयान पर श्याम रजक ने टिप्पणी करने से परहेज़ किया। उन्होंने कहा कि मांझी बड़े नेता हैं, इसलिए वे उन पर सीधी टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालाँकि, उन्होंने यह ज़रूर कहा कि जब लालू यादव की सरकार में मांझी भी शामिल थे, तब यदि उन्हें अपराध की स्थिति गंभीर लगती थी तो उस समय ही बोलना और इस्तीफ़ा देना उचित होता।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। रजक की यह प्रतिक्रिया जदयू के भीतर अनुशासित संवाद की रणनीति को भी दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्थानीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय पहचान की बहस बन चुका है। यह उल्लेखनीय है कि एक ऐसे नेता, जिनकी पार्टी जदयू बिहार में सत्ता की साझेदार है, इतिहास और बलिदान के संदर्भ से बात करते हैं — यह संकेत देता है कि राष्ट्रवादी प्रतीकों पर सर्वदलीय सहमति बनाने की कोशिश है। SIR पर जवाबदेही से पीछे हटना यह भी बताता है कि गठबंधन की राजनीति में कुछ प्रश्नों को 'तटस्थ' रहकर ही साधा जाता है। जमुई पर राजनीति छोड़ने की अपील सही दिशा में है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब समाधान की माँग नारों से आगे ठोस नीतिगत कदमों में बदले।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वंदे मातरम' विवाद क्या है और श्याम रजक ने क्या कहा?
कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर एक विवाद उठा है, जिस पर जदयू नेता श्याम रजक ने स्पष्ट किया कि यह गान न गैरकानूनी है और न राष्ट्रविरोधी। उन्होंने इसे स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जोड़ते हुए विरोधियों से आत्ममंथन की अपील की।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) पर श्याम रजक का क्या रुख है?
श्याम रजक ने कहा कि SIR से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए वे निर्वाचन आयोग के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं। उनके अनुसार, यह जवाबदेही चुनाव आयोग की है।
जमुई घटना पर श्याम रजक की क्या प्रतिक्रिया रही?
रजक ने जमुई घटना को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर समाधान खोजने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
जीतन राम मांझी के 'जीरो टॉलरेंस' बयान पर जदयू की प्रतिक्रिया क्या रही?
श्याम रजक ने मांझी पर सीधी टिप्पणी से परहेज़ किया, लेकिन परोक्ष रूप से कहा कि जब मांझी लालू यादव की सरकार में थे, तब भी यदि उन्हें स्थिति खराब लगती थी तो उन्हें उसी समय इस्तीफ़ा देना चाहिए था।
'वंदे मातरम' की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है जिसका रजक ने उल्लेख किया?
रजक के अनुसार, 'वंदे मातरम' के छह छंद हैं और इसका उल्लेख शरत चंद्र के लेखन में मिलता है। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अशफाक उल्ला खान ने इसी उद्घोष के साथ स्वतंत्रता संग्राम लड़ा था।
राष्ट्र प्रेस
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