'वंदे मातरम' राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, विरोध पर श्याम रजक ने माँगा आत्ममंथन
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने 23 सितंबर 2026 को पटना में कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर उठे विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'वंदे मातरम' न तो गैरकानूनी है और न ही राष्ट्रविरोधी — बल्कि यह देश की आज़ादी की लड़ाई से जुड़ी राष्ट्रभक्ति की सबसे गहरी अभिव्यक्ति है। इसके साथ ही उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति और जमुई की घटना पर भी अपनी बात रखी।
'वंदे मातरम' और राष्ट्रीय विरासत
श्याम रजक ने कहा कि 'वंदे मातरम' में राष्ट्रीयता की भावना समाई हुई है। उन्होंने बताया कि इस गान के छह छंद हैं और इसका उल्लेख शरत चंद्र के लेखन में भी मिलता है। उनके अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों ने 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते हुए अंग्रेज़ों के खिलाफ जागृति पैदा की थी।
रजक ने कहा कि जो लोग इस गान का विरोध करते हैं, उन्हें इन ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम' गाने में किसी की बात को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।
SIR विवाद पर चुनाव आयोग को जवाबदेही
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति के सवाल पर श्याम रजक ने कहा कि वे इस मामले में निर्वाचन आयोग के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं। उनके अनुसार, इस विषय पर जो सवाल उठाए गए हैं, उनका जवाब देने के लिए सबसे उपयुक्त संस्था स्वयं चुनाव आयोग है।
गौरतलब है कि SIR पर विपक्षी दलों की ओर से भी आपत्तियाँ जताई जाती रही हैं, और आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरें हाल के दिनों में चर्चा में रही हैं।
जमुई घटना: राजनीति से ऊपर उठने की अपील
जमुई में हुई संवेदनशील घटना पर रजक ने कहा कि यह मामला सभी को मर्माहत करने वाला है और ऐसे विषयों पर राजनीति उचित नहीं है। उन्होंने सत्ता पक्ष, विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर समाधान तलाशने की अपील की।
रजक ने कहा कि समाज की मानसिकता में बदलाव लाना और युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करना ज़रूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जीतन राम मांझी के बयान पर संयमित प्रतिक्रिया
बिहार में अपराध को लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी के 'जीरो टॉलरेंस' वाले बयान पर श्याम रजक ने टिप्पणी करने से परहेज़ किया। उन्होंने कहा कि मांझी बड़े नेता हैं, इसलिए वे उन पर सीधी टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालाँकि, उन्होंने यह ज़रूर कहा कि जब लालू यादव की सरकार में मांझी भी शामिल थे, तब यदि उन्हें अपराध की स्थिति गंभीर लगती थी तो उस समय ही बोलना और इस्तीफ़ा देना उचित होता।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। रजक की यह प्रतिक्रिया जदयू के भीतर अनुशासित संवाद की रणनीति को भी दर्शाती है।