फरीदाबाद में पार्किंग विवाद पर पड़ोसी ने चलाईं 15 गोलियाँ, परमजीत ढांकर की मौत; आरोपी मोनू शर्मा गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
फरीदाबाद के सेक्टर-21सी में 6 नवंबर 2026 की रात पार्किंग विवाद ने खूनी मोड़ ले लिया, जब आरोप है कि पड़ोसी मोहन उर्फ मोनू शर्मा ने अपने लाइसेंसी पिस्तौल से 15 से 16 राउंड फायरिंग की, जिनमें से 8 से 9 गोलियाँ परमजीत ढांकर को लगीं और उनकी मौत हो गई। यह घटना धनतेरस की रात हुई थी। क्राइम ब्रांच सेक्टर-30 ने शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
घटनाक्रम: कैसे बढ़ा विवाद
पुलिस के अनुसार, 6 नवंबर की रात करीब रात 8:30 बजे आरोपी मोहन शर्मा ने घर की घंटी बजाकर परमजीत को बुलाया और वाहन हटाने को कहा। परमजीत के बेटे शौर्य ने अपनी शिकायत में बताया कि वह भी अपने पिता के साथ नीचे उतरा था।
आरोप है कि नीचे आने के बाद दोनों के बीच बहस शुरू हुई जो धीरे-धीरे तीखी होती गई। विवाद के दौरान आरोपी ने पिस्तौल निकालकर परमजीत पर ताबड़तोड़ गोलियाँ दाग दीं। शौर्य पर भी फायरिंग की गई, लेकिन वह खड़ी गाड़ियों के पीछे छिपकर बचने में सफल रहा। वारदात के बाद मोहन शर्मा अपनी कार से मौके से फरार हो गया।
मृतक का परिचय और पृष्ठभूमि
मृतक परमजीत ढांकर घटना से महज दो दिन पहले ही सिंगापुर से लौटे थे — परिवार में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए। वह मकान संख्या 641 के भूतल पर अपने परिवार के साथ रहते थे, जबकि आरोपी मोहन शर्मा उसी मकान की दूसरी मंजिल पर रहता था।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच पहले से तनाव चला आ रहा था और छोटी-छोटी बातों पर अक्सर विवाद होते रहते थे। अधिकारियों के अनुसार, गोलीबारी से करीब पाँच दिन पहले आरोपी ने परमजीत के बेटे शौर्य के साथ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
सूरजकुंड थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच शुरू की। थाना प्रभारी प्रह्लाद कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की टीमों को आरोपी की तलाश के तत्काल निर्देश दिए गए।
क्राइम ब्रांच सेक्टर-30 के प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार के नेतृत्व में टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शनिवार, 7 नवंबर को आरोपी मोहन उर्फ मोनू शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने बताया कि आरोपी को शीघ्र अदालत में पेश कर रिमांड लिया जाएगा, ताकि विस्तृत पूछताछ के ज़रिये मामले से जुड़े सबूत जुटाए जा सकें। जाँच में यह भी पता लगाया जाएगा कि लाइसेंसी हथियार का इस तरह इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ और क्या अन्य लोग भी इस विवाद में शामिल थे।