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एसआईआर के खिलाफ सीजेपी का संघर्ष जारी रहेगा: अभिजीत दिपके का कोच्चि में ऐलान

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एसआईआर के खिलाफ सीजेपी का संघर्ष जारी रहेगा: अभिजीत दिपके का कोच्चि में ऐलान

सारांश

कोच्चि में सीजेपी के 'जंतर-मंतर' विरोध प्रदर्शन में अभिजीत दिपके ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखे आरोप लगाए। उनका दावा है कि देशभर में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं — और यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक निष्पक्ष चुनाव प्रणाली बहाल नहीं होती।

मुख्य बातें

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने 7 नवंबर को कोच्चि में एसआईआर के खिलाफ 'जंतर-मंतर' प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध अभियान जारी रखने का ऐलान किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं और कोई राज्य अछूता नहीं है।
अभिनेता प्रकाश राज सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और नागरिक अधिकार समर्थक इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
दिपके ने भविष्यवाणी की कि 2029 के चुनाव में एनडीए सत्ता से बाहर होगा।
सीजेपी पर लगाए गए विदेशी चंदे के आरोपों को दिपके ने सिरे से खारिज किया।

सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 7 नवंबर को कोच्चि में आयोजित 'जंतर-मंतर' विरोध प्रदर्शन में स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध उनका अभियान तब तक नहीं थमेगा, जब तक देश में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली स्थापित नहीं हो जाती। इस प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ता, नागरिक अधिकार समर्थक और आम नागरिक शामिल हुए।

मुख्य घटनाक्रम

कोच्चि हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध यह अभियान तब तक चलता रहेगा, जब तक निष्पक्ष चुनावी ढाँचा सुनिश्चित नहीं किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके से उसकी 'कायरता' उजागर होती है।

विरोध प्रदर्शन में अभिनेता प्रकाश राज भी शामिल हुए, जिससे इस आयोजन को व्यापक सार्वजनिक ध्यान मिला।

एसआईआर पर आरोप

दिपके ने कथित तौर पर दावा किया कि पूरे देश में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं और एसआईआर प्रक्रिया से कोई भी राज्य अछूता नहीं है। उनका आरोप है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में होने वाले चुनावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता और एक राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने के लिए इनमें हेरफेर की जा रही है। ये गंभीर आरोप हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

उन्होंने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी नियुक्तियाँ चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करती हैं।

सरकार के आरोपों पर पलटवार

दिपके ने बताया कि सरकार ने सीजेपी पर विदेशी चंदा लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कारण जेल जा चुके हैं और देश में जहाँ भी जाएँगे, तिरंगा अपने साथ ले जाएँगे।

सीजेपी कार्यकर्ताओं को 'अराजकतावादी' कहे जाने को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया कि वे वास्तव में 'अंबेडकरवादी' हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पिछले तीन महीनों में 50 से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं।

राजनीतिक भविष्यवाणी

दिपके ने भविष्यवाणी की कि 2029 के चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सत्ता से बाहर हो जाएगा और यह बदलाव लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से आएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने में एकजुट दिख रहे हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विवाद देशभर में फैल रहा है और विभिन्न नागरिक समाज संगठन इसके विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं। सीजेपी के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अन्य शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है — और यही इस पूरी बहस की केंद्रीय समस्या है। एसआईआर को लेकर विपक्ष और नागरिक समाज की चिंताएँ वैध हो सकती हैं, परंतु जब तक ठोस डेटा सामने नहीं आता, 'हेरफेर' के दावे राजनीतिक आरोप की श्रेणी में ही रहेंगे। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि चुनाव आयोग ने इन आरोपों का जवाब क्यों नहीं दिया — या दिया तो वह कहाँ है। जवाबदेही दोनों तरफ से होनी चाहिए: सरकार को एसआईआर की पारदर्शी समीक्षा करानी चाहिए, और विरोधी दलों को दावों के साथ सत्यापन-योग्य साक्ष्य भी पेश करने चाहिए।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' मतदाता सूचियों की समीक्षा की एक प्रक्रिया है जिसे चुनाव आयोग समय-समय पर आयोजित करता है। सीजेपी और कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करता है।
सीजेपी कौन है और अभिजीत दिपके कौन हैं?
सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) एक नागरिक अधिकार संगठन है और अभिजीत दिपके इसके संस्थापक हैं। दिपके कथित तौर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के एक मामले में जेल भी जा चुके हैं और खुद को अंबेडकरवादी विचारधारा का समर्थक बताते हैं।
कोच्चि विरोध प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल हुए?
7 नवंबर को कोच्चि में आयोजित 'जंतर-मंतर' प्रदर्शन में सीजेपी कार्यकर्ताओं के अलावा अभिनेता प्रकाश राज, नागरिक अधिकार समर्थक और सैकड़ों आम नागरिक शामिल हुए।
दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
दिपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में होने वाले चुनावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता और एक राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने के लिए चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर की जा रही है। ये आरोप कथित तौर पर लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सीजेपी का आगे क्या कार्यक्रम है?
दिपके के अनुसार, सीजेपी का एसआईआर विरोधी अभियान देशभर में जारी रहेगा और जब तक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रणाली सुनिश्चित नहीं होती, यह आंदोलन नहीं रुकेगा। उन्होंने अन्य शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के संकेत दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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