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क्या एसआईआर के खिलाफ डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है?

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क्या एसआईआर के खिलाफ डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है?

सारांश

डीएमके नेतृत्व वाला गठबंधन एसपीए ने एसआईआर के खिलाफ 11 नवंबर को तमिलनाडु में राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इस आंदोलन का उद्देश्य चुनाव आयोग के एकतरफा निर्णयों का विरोध करना है। जानिए इस आंदोलन के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।

मुख्य बातें

डीएमके ने 11 नवंबर को राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।
आंदोलन का कारण एसआईआर के खिलाफ विरोध है।
आंदोलन में कई राजनीतिक दलों का सहयोग है।
गिनती के समय और प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है।
गठबंधन ने अनियमितताओं की ओर भी इशारा किया है।

चेन्नई, 8 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। डीएमके के नेतृत्व वाला धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने 11 नवंबर को तमिलनाडु के सभी जिलों में एक राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यह आंदोलन भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में है।

गठबंधन सहयोगियों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि कई राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बावजूद चुनाव आयोग ने संशोधन को एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है। यह आरोप लगाया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया 'राजनीति से प्रेरित' है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची से अल्पसंख्यकों और भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम हटाना है।

बयान में तमिलनाडु सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर लागू करने के निर्णय को अलोकतांत्रिक बताया गया है, जिसका लक्ष्य नागरिकों के मताधिकार को 'कमजोर' करना है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि बिहार की मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने में चुनाव आयोग ने कथित तौर पर विफलता दिखाई है।

नेताओं ने यह भी तर्क दिया कि बिना मौजूदा भ्रमों को दूर किए संशोधन करने की चुनाव आयोग की जल्दी ने इस प्रक्रिया में जनता का विश्वास कम कर दिया है।

गठबंधन ने गिनती के समय को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की हैं। तमिलनाडु में गिनती का समय उत्तर-पूर्वी मानसून के साथ मेल खा रहा है, जिससे जिला और स्थानीय अधिकारी पहले से ही बारिश की राहत और आपदा में व्यस्त होंगे। इससे संशोधन प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाएगी।

इसके अलावा, गठबंधन ने इस प्रक्रिया के प्रारंभिक चरणों में कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया है।

गठबंधन का कहना है कि कई क्षेत्रों में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने अब तक गणना फॉर्म वितरित करना शुरू नहीं किया है और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के साथ उचित संचार चैनल स्थापित नहीं किए गए हैं।

गठबंधन ने यह भी बताया कि 2002 और 2005 की मतदाता सूचियां, जो वर्तमान में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, अधूरी हैं और अधिकारियों तथा राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच भ्रम पैदा कर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा संबंध लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से है। एसपीए का आंदोलन एक महत्वपूर्ण संकेत है कि राजनीतिक दल अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए सक्रिय हैं। हमें इस प्रक्रिया को देखना होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और इसका नागरिकों के मताधिकार पर क्या असर पड़ता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएमके का इस आंदोलन में क्या उद्देश्य है?
डीएमके का उद्देश्य चुनाव आयोग के एकतरफा निर्णयों का विरोध करना और मतदाता सूची में अल्पसंख्यकों के नामों को सुरक्षित रखना है।
इस आंदोलन का संभावित प्रभाव क्या हो सकता है?
इस आंदोलन का संभावित प्रभाव राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव और नागरिकों के मताधिकार पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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