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उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र: हावड़ा का सांस्कृतिक केंद्र और टीएमसी का चुनावी प्रभाव

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उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र: हावड़ा का सांस्कृतिक केंद्र और टीएमसी का चुनावी प्रभाव

सारांश

उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र, जो हावड़ा का प्रवेश द्वार है, अपनी सांस्कृतिक धरोहर और राजनीतिक ताकत के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र का इतिहास और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य इसे खास बनाते हैं। जानिए यहां के चुनावी इतिहास और वाद्य यंत्रों के महत्त्व के बारे में।

मुख्य बातें

उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र की स्थापना 1952 में हुई थी।
यह क्षेत्र 7 विधानसभा सीटों को शामिल करता है।
यहां की कुल जनसंख्या लगभग 20.52 लाख है।
उलूबेरिया का वाद्य यंत्र क्लस्टर देशभर में प्रसिद्ध है।
टीएमसी का यहां राजनीतिक प्रभाव मजबूत है।

कोलकाता, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले का एक प्रमुख संसदीय क्षेत्र है, जिसे इसकी समृद्ध राजनीतिक विरासत, सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।

उलूबेरिया संसदीय क्षेत्र की स्थापना 1952 में हुई थी और इसमें कुल 7 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें उलूबेरिया पूर्व, उलूबेरिया उत्तर (एससी), उलूबेरिया दक्षिण, श्यामपुर, बागनान, अमता और उदयनारायणपुर शामिल हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या लगभग 20.52 लाख है, जिसमें 69.55 प्रतिशत शहरी और 30.45 प्रतिशत ग्रामीण हैं। अनुसूचित जाति की जनसंख्या 19.63 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति की संख्या लगभग 0.15 प्रतिशत है। 2017 की वोटर लिस्ट में यहां लगभग 15.41 लाख मतदाता थे। यहां की मुख्य भाषा बांग्ला है, इसके अलावा अंग्रेजी और उर्दू भी बोली जाती हैं।

हावड़ा जिला, कोलकाता का जुड़वां शहर है, और उलूबेरिया इसका प्रवेश द्वार है। क्षेत्र का इतिहास 500 साल पुराना है, जो प्राचीन 'भुरशुत' साम्राज्य से संबंधित है। 1578 में वेनिस के यात्री सेसारे फेडेरिची ने 'बटोर' का उल्लेख किया, जो आज का बटोर इलाका है। ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां गांवों की स्थापना की। उलूबेरिया-II ब्लॉक (72.21 वर्ग किमी) अर्ध-शहरी है, जहां जूट मिलें और छोटे उद्योग हैं, साथ ही 30 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। यहां 8 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें बनिबन, बासुदेवपुर और जोरगोरी शामिल हैं। यहां की 2011 में साक्षरता दर 78.05 प्रतिशत थी।

उलूबेरिया की विशेष पहचान इसका वाद्य यंत्र क्लस्टर है, जो धुलासिमला, रंगमहल, माइखाली और दादपुर गांवों में फैला हुआ है। आजादी के बाद शुरू हुआ यह क्लस्टर आज देश के सबसे बड़े में से एक बन गया है। यहां सितार, सरोद, गिटार, तानपुरा जैसे वाद्य यंत्र निर्मित होते हैं, जिनकी मधुर ध्वनि और गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग है। यह कारीगरी पीढ़ियों से चली आ रही है और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है।

राजनीतिक इतिहास की बात करें, तो यह क्षेत्र पहले कांग्रेस का गढ़ रहा, लेकिन 1957 में फॉरवर्ड ब्लॉक ने यहां जीत हासिल की। 1960-70 के दशक में कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने मजबूत पकड़ बनाई और हन्नान मोल्लाह जैसे नेता 1980 से 2004 तक लगातार सांसद बने रहे। 2009 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बाजी पलटी और सुल्तान अहमद ने सीपीएम को हराया। 2017 में सुल्तान अहमद के निधन के बाद उपचुनाव में उनकी पत्नी सजदा अहमद ने जीत हासिल की।

2019 में सजदा अहमद ने 6,94,945 वोटों से जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के जॉय बनर्जी दूसरे स्थान पर रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सजदा अहमद (टीएमसी) ने शानदार जीत हासिल की, उन्हें 7,24,622 वोट मिले (52.10 प्रतिशत), भाजपा के अरुणोदय पॉलचौधरी को 5,05,949 वोट (36.38 प्रतिशत) और कांग्रेस के अजहर मल्लिक को 78,589 वोट मिले। टीएमसी यहां मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

वर्तमान समय (2026) में क्षेत्र में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उलूबेरिया पूर्व, उत्तर और दक्षिण जैसी सीटों पर टीएमसी की लगातार जीत का इतिहास है, लेकिन भाजपा चुनौती पेश कर रही है। हाल की खबरों में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) सुनवाई के दौरान उलूबेरिया ब्लॉक में कुछ विवादास्पद घटनाएं हुईं। राजनीतिक दलों के बीच केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप को लेकर तनाव भी बढ़ रहा है, जहां टीएमसी ने राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसके राजनीतिक इतिहास ने इसे महत्वपूर्ण बना दिया है। टीएमसी की मजबूत पकड़ और भाजपा की चुनौती इस क्षेत्र के भविष्य को प्रभावित कर रही है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र की प्रमुख भाषाएँ कौन सी हैं?
उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र की मुख्य भाषा बांग्ला है, इसके अलावा अंग्रेजी और उर्दू भी बोली जाती हैं।
उलूबेरिया की साक्षरता दर क्या है?
2011 में उलूबेरिया की साक्षरता दर 78.05 प्रतिशत थी।
उलूबेरिया की राजनीतिक स्थिति क्या है?
उलूबेरिया क्षेत्र में टीएमसी का दबदबा है, जबकि भाजपा भी चुनौती पेश कर रही है।
उलूबेरिया क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उलूबेरिया का इतिहास 500 साल पुराना है, जो प्राचीन 'भुरशुत' साम्राज्य से जुड़ा है।
उलूबेरिया में वाद्य यंत्रों का क्या महत्व है?
उलूबेरिया का वाद्य यंत्र क्लस्टर देश के सबसे बड़े में से एक है, जहां सितार, सरोद, गिटार आदि बनते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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