रोहित शेट्टी: पिता के निधन के बाद संघर्षों से भरा जीवन, 'एक्शन किंग' बनने की कहानी

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रोहित शेट्टी: पिता के निधन के बाद संघर्षों से भरा जीवन, 'एक्शन किंग' बनने की कहानी

सारांश

रोहित शेट्टी की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। पिता के निधन के बाद आर्थिक संकट का सामना करते हुए, उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया और आज वे बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में से एक हैं। जानिए उनके सफर के बारे में।

Key Takeaways

  • संघर्ष और मेहनत से सफलता संभव है।
  • पिता की मौत के बाद रोहित ने आर्थिक संकट का सामना किया।
  • उन्होंने छोटे-छोटे कामों से अपने करियर की शुरुआत की।
  • 'सिंघम' और 'गोलमाल' जैसे फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई।
  • रोहित शेट्टी का एक्शन सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान है।

मुंबई, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कहते हैं कि सफलता कभी भी मुफ्त में नहीं मिलती, यह संघर्ष और जज्बे के रूप में अपनी कीमत वसूल करती है। जितने बड़े सपने होते हैं, उतना ही कठिन सफर होता है। बॉलीवुड के 'एक्शन किंग' रोहित शेट्टी भी इसी तरह की विषम परिस्थितियों से गुजरे हैं। आज उनकी फिल्में करोड़ों रुपये कमा रही हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब वाहन के लिए पैसे न होने पर उन्हें कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था और कई बार तो उन्हें भूखे भी रहना पड़ा।

पिता की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा, फिर भी रोहित ने हार नहीं मानी और मेहनत से खुद को 'सिंघम' जैसा मजबूत बनाया। छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करने वाले रोहित शेट्टी आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सफल और लोकप्रिय निर्देशकों में शुमार हैं। हालांकि, उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।

१४ मार्च १९७४ को मुंबई में जन्मे रोहित शेट्टी के पिता, एमबी शेट्टी, एक मशहूर स्टंटमैन और अभिनेता थे, जिन्होंने १९७०-८० के दशक में फिल्मों में आइकॉनिक विलेन के रोल निभाए। मां रत्ना शेट्टी जूनियर आर्टिस्ट थीं और छोटे-मोटे रोल करती थीं। लेकिन रोहित महज पाँच वर्ष के थे, जब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की चार बहनों और दो भाइयों के साथ घर चलाना काफी मुश्किल हो गया। ऐसे में रोहित ने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू किया।

कई संघर्षों के बाद १७ साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'फूल और कांटे' में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में कदम रखा। इसके बाद 'सुहाग' में अक्षय कुमार के स्टंट डबल बने। 'हकीकत' जैसी फिल्मों में तब्बू के कपड़े प्रेस करने जैसे छोटे-छोटे काम भी उन्होंने किए। कम ही लोग जानते हैं कि उनकी पहली कमाई सिर्फ ३५ रुपए थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि "मुझे खाने और बस के किराए में से एक का चुनाव करना पड़ता था। कई बार भूखा सोना पड़ा। मुझे पैदल चलकर सेट पर जाना पड़ता था।"

ये मुसीबतें उन्हें तोड़ने की बजाय और मजबूत बनाती गईं। धीरे-धीरे रोहित ने स्टंट और एक्शन में महारत हासिल की। उन्होंने कई फिल्मों में स्टंट कोरियोग्राफी की और फिर निर्देशन की ओर रुख किया। उनकी पहली बड़ी सफलता 'गोलमाल' सीरीज से मिली, जो आज भी हंसी-मजाक की मिसाल है। 'चेन्नई एक्सप्रेस' जैसी रोमांटिक कॉमेडी ने उनके करियर में चार चांद लगाए। लेकिन असली पहचान उन्हें 'सिंघम' सीरीज से मिली, जहां एक्शन के स्तर को उन्होंने नए आयाम दिए।

आज इंडस्ट्री में एक्शन का नाम ही रोहित शेट्टी बन चुका है। उनकी फिल्मों में गाड़ियां उड़ाना, बड़े-बड़े धमाके, और हाई-ऑक्टेन थ्रिल ये सब उनके ट्रेडमार्क बन चुके हैं। उनकी 'कोप यूनिवर्स' में 'सिंघम', 'सिम्बा', 'सूर्यवंशी', और 'सिंघम अगेन' जैसी सुपरहिट फिल्में हैं। 'गोलमाल' फ्रेंचाइजी ने परिवारों को थिएटर में बांध रखा है।

Point of View

NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

रोहित शेट्टी का जन्म कब हुआ?
रोहित शेट्टी का जन्म १४ मार्च १९७४ को मुंबई में हुआ।
रोहित शेट्टी की पहली फिल्म कौन-सी थी?
रोहित शेट्टी ने १७ साल की उम्र में फिल्म 'फूल और कांटे' में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में कदम रखा।
रोहित शेट्टी को किस फिल्म से पहचान मिली?
रोहित शेट्टी को 'सिंघम' सीरीज से असली पहचान मिली।
रोहित शेट्टी का ट्रेडमार्क क्या है?
रोहित शेट्टी की फिल्मों में गाड़ियां उड़ाना, धमाके, और हाई-ऑक्टेन थ्रिल उनके ट्रेडमार्क हैं।
रोहित शेट्टी की प्रमुख फिल्में कौन-सी हैं?
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'गोलमाल', 'सिंघम', 'सिम्बा', और 'सूर्यवंशी' शामिल हैं।
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