यादों में मन्ना डे: स्कूल के संगीत टॉपर से सचिन देव बर्मन के सहयोगी तक का सफ़र

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यादों में मन्ना डे: स्कूल के संगीत टॉपर से सचिन देव बर्मन के सहयोगी तक का सफ़र

सारांश

मन्ना डे की कहानी है एक संगीत प्रेमी की जो कोलकाता के स्कूल के टॉपर से शुरू करके हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग के सबसे विश्वस्त पार्श्व गायक बने। शास्त्रीय संगीत की गहराई को फिल्मी गीतों में जीवंत करना — यही उनकी विरासत है।

Key Takeaways

मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था; असली नाम प्रबोध चंद्र डे । स्कूल में संगीत के टॉपर; गायन प्रतियोगिताओं में लगातार तीन वर्ष प्रथम स्थान । 1942 में मुंबई आए, सचिन देव बर्मन के सहायक बने। फिल्म 'तमन्ना' से पार्श्व गायन शुरू; 'मशाल' का गीत "ऊपर गगन विशाल" अत्यंत प्रसिद्ध। हिंदी, बांग्ला, मराठी, गुजराती, पंजाबी, उड़िया समेत कई भाषाओं में गीत गाए। पद्मश्री, पद्मभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित। 24 अक्टूबर 2013 को निधन।

मुंबई, 30 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग में मन्ना डे एक ऐसा नाम रहे जो शास्त्रीय संगीत की गरिमा को फिल्मी गीतों में जीवंत करने के लिए जाने जाते हैं। वह न केवल एक बहुमुखी गायक थे, बल्कि भारतीय संगीत परंपरा को आधुनिक सिनेमा से जोड़ने वाले एक सेतु भी थे। उनकी विरासत आज भी लाखों संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवंत है।

जन्म, शिक्षा और प्रारंभिक संगीत प्रशिक्षण

मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। उनका असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। संगीत जगत में उन्हें मन्ना डे के नाम से जाना गया। उनके चाचा कृष्णचंद्र डे (केसी डे), जो स्वयं एक प्रसिद्ध संगीतकार थे, का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा और उस्ताद दाबिर खान से प्राप्त की। इंदु बाबुर पाठशाला में उनकी शुरुआती पढ़ाई हुई, और बाद में वह कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेजिएट स्कूल में पढ़े। उन्होंने विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की उपाधि अर्जित की।

स्कूल और कॉलेज में संगीत की प्रतिभा

स्कूली दिनों में मन्ना डे संगीत के असाधारण छात्र रहे। वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सदा आगे रहते थे और गायन प्रतियोगिताओं में लगातार तीन वर्षों तक प्रथम स्थान प्राप्त किए। यह उनकी प्रतिभा और समर्पण का प्रमाण था कि उन्होंने बचपन से ही संगीत के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता दिखाई।

मुंबई आगमन और सचिन देव बर्मन के साथ कार्य

1942 में मन्ना डे अपने चाचा केसी डे के साथ मुंबई आ गए। शुरुआत में वह अपने चाचा के सहायक के रूप में काम करते थे। बाद में उन्हें महान संगीतकार सचिन देव बर्मन के साथ काम करने का अवसर मिला। मुंबई में संगीत की यह यात्रा काफी संघर्षपूर्ण थी, लेकिन उनकी मेहनत और असाधारण संगीत प्रतिभा ने उन्हें आगे बढ़ाया।

संगीतकार के रूप में प्रारंभिक काम

स्वतंत्र संगीतकार के रूप में मन्ना डे की पहली फिल्म 'महापूजा' थी। इसके बाद उन्होंने 'घर घर की बात', 'शिव कन्या', 'कमला', 'जय महादेव' और 'विश्वामित्र' जैसी कई फिल्मों में संगीत दिया। फिल्म 'तमाशा' में उन्होंने खेमचंद प्रकाश और एस.के. पाल के साथ संगीत निर्देशन किया। गौरतलब है कि संगीतकार के रूप में उनका काम महत्वपूर्ण रहा, लेकिन उन्हें पार्श्व गायक के रूप में अधिक ख्याति मिली।

पार्श्व गायन में उदय और प्रसिद्ध गीत

मन्ना डे ने 1942 में फिल्म 'तमन्ना' से पार्श्व गायन की शुरुआत की। सचिन देव बर्मन द्वारा संगीतबद्ध फिल्म 'मशाल' में उनका गीत

Point of View

मन्ना डे ने राग-आधारित गीतों को इस तरह प्रस्तुत किया कि वे जनसाधारण के लिए भी सुलभ बन गए। उनकी विरासत यह सवाल उठाती है: क्या आज का हिंदी सिनेमा उसी तरह की संगीत गहराई और शास्त्रीय पवित्रता को बनाए रख पाता है? मन्ना डे के जमाने में, संगीत केवल पृष्ठभूमि नहीं था — वह फिल्म की आत्मा था।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

मन्ना डे का असली नाम क्या था और उन्हें 'मन्ना डे' नाम कैसे मिला?
मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। उन्होंने अपने चाचा कृष्णचंद्र डे (केसी डे) के प्रभाव में आकर संगीत जगत में 'मन्ना डे' नाम से प्रसिद्धि पाई। यह नाम उनके परिवार के संगीत परंपरा से जुड़ा हुआ था।
मन्ना डे ने संगीत की शिक्षा कहाँ से और किससे प्राप्त की?
मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा कृष्णचंद्र डे और उस्ताद दाबिर खान से प्राप्त की। बाद में उन्होंने उस्ताद अमान अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान से शास्त्रीय संगीत की गहराई सीखी।
मन्ना डे ने पार्श्व गायन कब शुरू किया और उनका सबसे प्रसिद्ध गीत कौन-सा था?
मन्ना डे ने 1942 में फिल्म 'तमन्ना' से पार्श्व गायन की शुरुआत की। सचिन देव बर्मन के संगीत में फिल्म 'मशाल' का गीत 'ऊपर गगन विशाल' उनका सबसे प्रसिद्ध गीत माना जाता है, जो राज कपूर के लिए गाया गया था।
मन्ना डे ने कितनी भाषाओं में गीत गाए?
मन्ना डे ने हिंदी के अलावा बांग्ला, मराठी, गुजराती, पंजाबी और उड़िया समेत कई भाषाओं में गीत गाए। उन्होंने साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन की कृति 'मधुशाला' को भी अपने स्वर से जीवंत किया।
मन्ना डे को किन-किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया?
मन्ना डे को भारत सरकार ने पद्मश्री, पद्मभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। ये पुरस्कार भारतीय संस्कृति और सिनेमा में उनके असाधारण योगदान की स्वीकृति थे।
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