6 अक्टूबर 2026
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एसआईआर पर बीजद सांसद सुलता देव का हमला: ओडिशा में 27.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए

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एसआईआर पर बीजद सांसद सुलता देव का हमला: ओडिशा में 27.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए

सारांश

बीजद सांसद सुलता देव ने 6 अक्टूबर को दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के मार्च में शामिल होते हुए एसआईआर प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला — ओडिशा में 27.5 लाख और देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप, सीईसी पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला, और बीजद की स्वतंत्र लेकिन मुखर आवाज़।

मुख्य बातें

बीजद सांसद सुलता देव ने 6 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत ओडिशा में 27.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए।
देशभर में कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए।
धामनगर (भद्रक जिला) के एक वार्ड में 227 अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का विशेष उल्लेख।
सांसद देव ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी और चुनाव आयोग के पत्र पर BJP की मुहर लगने का आरोप लगाया।
बीजद ने स्पष्ट किया कि वह इंडिया ब्लॉक या एनडीए के साथ नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से जनहित में इस विरोध में शामिल है।
नवीन पटनायक पहले भी सीईसी के इस्तीफे की माँग कर चुके हैं।

बीजू जनता दल (बीजद) की सांसद सुलता देव ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में शामिल होते हुए आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत ओडिशा में 27.5 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में यह संख्या 13 करोड़ तक पहुँच चुकी है। देव ने इसे लोकतंत्र के लिए सीधा खतरा बताते हुए कहा कि मतदाता नहीं, बल्कि व्यवस्था यह तय कर रही है कि नेतृत्व किसे मिलेगा।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

सांसद देव ने भद्रक जिले के धामनगर का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि वहाँ बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने स्वयं आपत्ति दर्ज कराई और हालात उजागर किए, जिसके बाद संबंधित चुनाव पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि धामनगर के एक ही वार्ड में 227 अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम काटे गए, जिस पर उन्होंने गहरी चिंता जताई।

देव ने आरोप लगाया कि यदि कोई मतदाता किसी खास दल का समर्थन करता है तो उसका नाम सूची में रहता है, अन्यथा हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन आज नेता यह तय कर रहे हैं कि उनके लिए कौन वोट देगा — ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।'

सुप्रीम कोर्ट और सीईसी पर सवाल

देव ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने पहले दावा किया था कि एसआईआर के सभी फैसले सर्वोच्च न्यायालय की जानकारी में लिए गए थे, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं यह टिप्पणी की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मार्च में चुनाव आयोग के एक पत्र पर चुनाव आयोग की मुहर की जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मुहर लगी पाई गई थी।

देव ने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने न तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया और न ही अपने दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — के निर्देशों का। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'वह किसके ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर रहे थे? क्या भाजपा कार्यालय से आने वाले ज्ञापनों पर?'

बीजद की स्वतंत्र स्थिति

देव ने स्पष्ट किया कि बीजद इस प्रदर्शन में इंडिया ब्लॉक या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) किसी के साथ नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की हैसियत से भाग ले रहा है। उन्होंने कहा कि बीजद के वरिष्ठ नेता नवीन पटनायक का एकमात्र उद्देश्य ओडिशा की जनता के साथ खड़े रहना है। गौरतलब है कि नवीन पटनायक पहले भी सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर चुके हैं।

विरोध प्रदर्शन का स्वरूप

तिरंगा और 'लोकतंत्र बचाओ' जैसे संदेश लिखे बैनर लेकर इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ नारे लगाए। यह विरोध मार्च एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित किया गया था।

आगे की राह

एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों की माँग है कि हटाए गए मतदाताओं की स्वतंत्र जाँच हो और सीईसी इस्तीफा दें। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बाद यह मामला कानूनी मोर्चे पर भी आगे बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न इंडिया ब्लॉक में है न एनडीए में, इस विरोध में शामिल होना इस बात का संकेत है कि आलोचना सिर्फ विपक्षी राजनीति नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय की स्वयं की टिप्पणी कि सीईसी ने उन्हें सूचित नहीं किया — यह एक संवैधानिक गंभीरता का स्तर है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर दरकिनार कर देती है। 13 करोड़ नाम हटाने के दावे का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है, लेकिन जब तक चुनाव आयोग पारदर्शी जवाब नहीं देता, यह संख्या राजनीतिक आख्यान को परिभाषित करती रहेगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा और अद्यतन किया जाता है। विवाद इसलिए है क्योंकि विपक्षी दलों और बीजद का आरोप है कि इस प्रक्रिया में ओडिशा में 27.5 लाख और देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण हटाए गए, जिससे मतदान के अधिकार पर असर पड़ा है।
सुलता देव ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
बीजद सांसद सुलता देव ने आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी की और अपने दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों के निर्देशों का भी पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मार्च में चुनाव आयोग के एक पत्र पर भाजपा की मुहर पाई गई थी।
धामनगर में विशेष रूप से क्या हुआ?
भद्रक जिले के धामनगर में बूथ लेवल ऑफिसर ने खुद आपत्ति दर्ज कराई और स्थिति उजागर की, जिसके बाद संबंधित चुनाव पंजीयन अधिकारी को निलंबित किया गया। इसी इलाके के एक वार्ड में 227 अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिसे देव ने लक्षित कार्रवाई बताया।
बीजद इस विरोध में क्यों शामिल हुई, जबकि वह इंडिया ब्लॉक में नहीं है?
बीजद ने स्पष्ट किया कि वह इंडिया ब्लॉक और एनडीए दोनों से अलग है, लेकिन एक जिम्मेदार राजनीतिक दल के नाते मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस प्रदर्शन में भाग ले रही है। पार्टी नेता नवीन पटनायक पहले भी सीईसी के इस्तीफे की माँग कर चुके हैं।
इस विवाद में सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एसआईआर से जुड़े फैसलों में न्यायालय को सूचित नहीं किया, जो सीईसी के उस दावे के विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी कदम न्यायालय की जानकारी में उठाए गए। यह न्यायिक टिप्पणी इस विवाद को संवैधानिक स्तर पर ले जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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