मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एकजुट, बीजेडी भी उतरी मैदान में; BJP ने कहा — नौटंकी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया, जब बीजू जनता दल (बीजेडी) भी इस मुहिम में शामिल हो गई। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इस कदम को महज राजनीतिक नाटकबाजी करार दिया। यह घटनाक्रम देश में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (SIR) को लेकर उठे तीखे विवाद की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
बीजेडी के आरोप — लोकतंत्र पर हमला
बीजेडी सांसद सुलता देव ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, 'सीईसी ज्ञानेश कुमार ने जो किया, वह लोकतंत्र की हत्या है। जहाँ तक एसआईआर प्रक्रिया की बात है, ओडिशा में 27.50 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं। पूरे देश में 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए हैं। यह किसके कहने पर किया गया? यह किस तरह का लोकतंत्र है? यह लोकतंत्र बिल्कुल नहीं है।'
सुलता देव ने भद्रक जिले के धामनगर का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहाँ के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने खुद सामने आकर बताया कि क्या हो रहा था, और इसके बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को भी कथित तौर पर निलंबित कर दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को BJP दफ्तर से आदेश मिल रहे थे और वे उन पर हस्ताक्षर कर रहे थे — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बीजेडी की स्वतंत्र पहचान — न इंडिया, न NDA
सांसद सुलता देव ने स्पष्ट किया कि बीजेडी का यह कदम किसी गठबंधन की छत्रछाया में नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारे नेता नवीन पटनायक का यह साफ बयान है कि हम न तो इंडिया गठबंधन के साथ हैं और न ही एनडीए के साथ। एक जिम्मेदार राजनीतिक पार्टी के तौर पर अपने लोगों के लिए आवाज उठाना हमारा अधिकार है। नवीन पटनायक शुरू से ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।'
गौरतलब है कि बीजेडी पारंपरिक रूप से केंद्र के साथ संतुलित रिश्ते बनाकर चलती रही है। ऐसे में उसका इस प्रदर्शन में शरीक होना राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BJP का पलटवार — विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं से अविश्वास का आरोप
रांची में BJP के पूर्व सांसद दीपक प्रकाश ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'नौटंकीबाज नौटंकी करने से बाज नहीं आ रहे। ये देश की जनता के सामने जोकर की तरह व्यवहार कर रहे हैं।'
दीपक प्रकाश ने कहा कि विपक्ष को किसी भी संवैधानिक संस्था पर भरोसा नहीं है — न सर्वोच्च न्यायालय पर, न भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) पर, न संसद पर और न ही चुनाव आयोग पर।
उन्होंने विपक्षी दलों को एक नैतिक चुनौती देते हुए कहा, 'अगर उनको चुनाव आयोग में गड़बड़ी लगती है, तो झारखंड में उन्होंने चुनाव जीता है — यहाँ के विधायकों को इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वे भी EVM मशीन के ज़रिये जीते हैं। चुनाव आयोग द्वारा संचालित चुनाव में जीते हुए कर्नाटक के विधायकों को भी इस्तीफा देना चाहिए। तब पता चलेगा कि नैतिकता भी कोई चीज है।'
मतदाता सूची विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय और गहरा हो गया है जब विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए हैं। विपक्ष के अनुसार, देश भर में कथित तौर पर 13 करोड़ वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिनमें अकेले ओडिशा से 27.50 लाख नाम शामिल बताए जाते हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी होंगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या अन्य विपक्षी दल इस प्रदर्शन में और ताकत जोड़ते हैं।