11 जुलाई 2026
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ओडिशा एसआईआर पर बीजद सतर्क: देबी प्रसाद मिश्रा बोले — 'किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेंगे'

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ओडिशा एसआईआर पर बीजद सतर्क: देबी प्रसाद मिश्रा बोले — 'किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेंगे'

सारांश

ओडिशा में 1 जुलाई से शुरू होने वाले एसआईआर को लेकर बीजद ने आक्रामक रुख अपनाया है — पार्टी ने सीईओ से बीएलओ प्रशिक्षण और पारदर्शिता पर जवाब माँगा है। साथ ही बीजद सांसद सुलता देव के वेरिफाइड मेटा अकाउंट के सस्पेंड होने पर भाजपा पर सीधा आरोप लगाया गया है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 14 मई को ओडिशा में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अधिसूचित किया; प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू होगी।
बीजद नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से बीएलओ प्रशिक्षण और बूथ एजेंट जागरूकता की समय-सीमा पर स्पष्टीकरण माँगा।
सीईओ ने खामियों को 'चूक' माना और सुधार का आश्वासन दिया, बीजद ने निगरानी जारी रखने की बात कही।
बीजद सांसद सुलता देव का वेरिफाइड मेटा अकाउंट सस्पेंड हुआ; उन्होंने भाजपा पर विपक्षी आवाज दबाने का आरोप लगाया।
बीजद ने हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए सतर्कता का संकल्प दोहराया।

बीजू जनता दल (बीजद) ने ओडिशा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राज्य सरकार और चुनावी तंत्र पर कड़े सवाल उठाए हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने यह प्रक्रिया 14 मई को अधिसूचित की थी और इसके 1 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन तैयारियों में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष का असंतोष बढ़ता जा रहा है।

बीजद का रुख और मुख्य मांगें

बीजद नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने कहा कि उनकी पार्टी की टीम ने ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया, 'हमने बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारियों) के प्रशिक्षण, मॉड्यूल्स और राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों को जागरूक करने की समय-सीमा के बारे में जानकारी मांगी। कुछ अस्पष्ट क्षेत्रों पर भी स्पष्टता की जरूरत थी।'

मिश्रा के अनुसार, सीईओ ने इन खामियों को एक 'चूक' करार दिया और आश्वासन दिया कि ऐसी गलतियों को सुधारा जाएगा। बीजद ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले पर निरंतर निगरानी रखेगी।

अन्य राज्यों से जोड़ते हुए चेतावनी

मिश्रा ने हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा, 'इसलिए हम पूरी तरह सचेत हैं और किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ बढ़ रही हैं।

पारदर्शिता पर विपक्ष का जोर

बीजद का कहना है कि एसआईआर की तैयारियों में पारदर्शिता की कमी है और राज्य सरकार इस प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त रूप से गंभीर नहीं दिख रही। विपक्ष की प्रमुख माँग है कि मतदाता सूची संशोधन का यह अभियान निष्पक्ष ढंग से संचालित हो, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे।

सुलता देव के मेटा अकाउंट सस्पेंशन पर विवाद

इस राजनीतिक तनाव के बीच एक अलग विवाद भी उभरा है। बीजद सांसद सुलता देव के वेरिफाइड मेटा अकाउंट के सस्पेंड होने पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'भाजपा मेरे सोशल मीडिया अकाउंट को बंद करवाना चाहती है। यह वेरिफाइड अकाउंट था। मैंने गरीबों को पानी नहीं मिलने, रहने की जगह न होने जैसे कई मुद्दे उठाए। लाइव जाकर जनता की आवाज बनी।' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी।

आगे क्या

एसआईआर की प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू होनी है और बीजद ने संकेत दिया है कि वह हर चरण पर निगरानी रखेगी। गौरतलब है कि ओडिशा में अगले विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया विवादों में घिरी रही। असली सवाल यह है कि क्या ईसीआई बूथ-स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त तंत्र तैयार कर रहा है, या यह आश्वासन केवल बैठकों तक सीमित रहेगा। सुलता देव के मेटा अकाउंट सस्पेंशन का मुद्दा चाहे जो भी हो, यह डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर विपक्षी राजनेताओं की पहुँच की नाजुकता को उजागर करता है — और यह सवाल उठाता है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों की नीतियाँ राजनीतिक जवाबदेही के लिए पर्याप्त रूप से तटस्थ हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक विशेष प्रक्रिया है। ओडिशा में यह प्रक्रिया 14 मई को अधिसूचित की गई और 1 जुलाई से शुरू होने वाली है।
बीजद को एसआईआर की तैयारियों पर क्या आपत्ति है?
बीजद का कहना है कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के प्रशिक्षण, मॉड्यूल्स और बूथ एजेंटों को जागरूक करने की समय-सीमा स्पष्ट नहीं की गई। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से इन बिंदुओं पर जवाब माँगा है और पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है।
सीईओ ने बीजद की आपत्तियों पर क्या कहा?
बीजद नेता देबी प्रसाद मिश्रा के अनुसार, ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन खामियों को 'चूक' माना और आश्वासन दिया कि ऐसी गलतियों को सुधारा जाएगा।
बीजद सांसद सुलता देव का मेटा अकाउंट क्यों सस्पेंड हुआ?
इस बारे में कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं हुआ है। सुलता देव ने कथित तौर पर भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी विपक्षी आवाज को दबाने के लिए उनका वेरिफाइड मेटा अकाउंट बंद कराया गया। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
एसआईआर प्रक्रिया ओडिशा के मतदाताओं को कैसे प्रभावित करेगी?
एसआईआर के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है — नए नाम जोड़े जाते हैं और अपात्र नाम हटाए जाते हैं। विपक्ष की मुख्य चिंता यह है कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं हुई, तो पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हट सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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