कश्मीर महिला संगठन की अध्यक्ष दरख्शां हसन भट: 20 हजार महिलाओं को जोड़ा, 80 लाख तक डिजिटल पहुंच
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीर महिला संगठन की अध्यक्ष दरख्शां हसन भट ने 11 जुलाई 2026 को श्रीनगर में कहा कि उनके संगठन ने अब तक सीधे तौर पर 20 हजार से अधिक महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है, जबकि डिजिटल माध्यमों के ज़रिए इसकी पहुंच 80 लाख से अधिक लोगों तक बन चुकी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं को सशक्त किए बिना एक मज़बूत और शांतिपूर्ण समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
महिलाएं शांति और सामाजिक एकता की धुरी
भट ने कहा कि समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका अपरिहार्य है। उनके अनुसार, महिलाएं परिवार और समाज को जोड़ने का काम करती हैं और संवाद को बढ़ावा देने, हिंसा रोकने तथा स्थायी शांति स्थापित करने में अहम योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने चेताया कि घरेलू हिंसा और परिवार का तनावपूर्ण माहौल बच्चों के मानसिक विकास पर गहरा नकारात्मक असर डालता है और उन्हें गलत रास्तों की ओर धकेल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर में सामाजिक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता — प्रगति की बुनियाद
दरख्शां हसन भट ने शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को महिलाओं की प्रगति की सबसे बड़ी कुंजी बताया। उनका कहना था कि शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम महिलाएं बेहतर निर्णय लेती हैं, परिवार का सहारा बनती हैं और समाज को चरमपंथ तथा अन्य सामाजिक बुराइयों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लैंगिक समानता फेलोशिप और 'दरख्शां सितारे' कार्यक्रम
संगठन की लैंगिक समानता फेलोशिप के तहत युवा महिलाओं को नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, संविधान की जानकारी, जन नीति, डिजिटल साक्षरता और सामुदायिक जुड़ाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। गौरतलब है कि जून 2026 में उपराज्यपाल ने इस फेलोशिप के पहले बैच को सम्मानित किया था, जिससे और अधिक युवतियाँ सार्वजनिक जीवन में आगे आने के लिए प्रेरित हुई हैं।
संगठन का 'दरख्शां सितारे' संवाद कार्यक्रम महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाता है, जिससे अन्य महिलाओं को चुनौतियों का सामना करने और नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलती है। सामाजिक माध्यमों के ज़रिए संगठन नियमित रूप से वीडियो और संवाद कार्यक्रम प्रसारित कर सकारात्मक संदेश फैलाता है।
चुनौतियां और आगे की राह
भट ने स्वीकार किया कि आज भी महिलाओं को सीमित अवसर, घरेलू हिंसा और सामाजिक बाधाओं जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। संगठन जागरूकता अभियान, नेतृत्व प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और गांव-गांव जाकर संवाद के ज़रिए इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है। दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक पहुंचने के लिए नियमित कार्यशालाएं और बैठकें आयोजित की जाती हैं।
उन्होंने नशीली दवाओं की बढ़ती लत पर गहरी चिंता जताई और कहा कि संगठन इस दिशा में जागरूकता अभियान तेज़ करेगा, विशेषज्ञों की मदद से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराएगा तथा परिवारों को भी इस मुहिम से जोड़ेगा।
अगले पाँच वर्षों में संगठन गांव स्तर तक पहुंच बढ़ाने, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने, डिजिटल साक्षरता को मज़बूत करने और निर्णय-प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान देगा — जो कश्मीर के सामाजिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय बदलाव की दिशा में ठोस कदम होगा।