श्रीनगर 'लॉन्च पैड' प्रदर्शनी: महिला उद्यमियों के ब्रांड 10 लाख लोगों तक पहुंचे, घाटी में उद्यमिता को नई उड़ान
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर में आयोजित 'लॉन्च पैड' प्रदर्शनी जम्मू-कश्मीर की महिला उद्यमियों के लिए आत्मनिर्भरता का सशक्त मंच बनकर उभरी है, जहाँ हस्तशिल्प, ऑनलाइन ब्रांड और स्टार्टअप वेंचर्स को व्यापक जनसमुदाय के सामने प्रदर्शित किया गया। 19 मई को सम्पन्न इस आयोजन में बड़े पैमाने पर जनभागीदारी दर्ज हुई, जिससे घाटी में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को नई पहचान और प्रोत्साहन मिला।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनी में महिला उद्यमियों ने अपने इनोवेशन, हस्तनिर्मित उत्पाद और डिजिटल व्यवसायों को एक ही छत के नीचे प्रस्तुत किया। यह आयोजन 'लॉन्च पैड' श्रृंखला का तीसरा संस्करण था — पहले दो संस्करणों की तुलना में इस बार की पहुँच और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में निजी क्षेत्र की सीमित उपस्थिति और बेरोज़गारी की चुनौती को देखते हुए इस तरह के मंचों की माँग लगातार बढ़ रही है।
उद्यमियों की आवाज़
महिला उद्यमी फातिमा ने बताया कि उनके ब्रांड 'सिस्ट्रोलॉजी' को 'लॉन्च पैड 3' से बड़ी पहचान मिली, जहाँ उनकी वीडियो लगभग 10 लाख लोगों तक पहुँची। उन्होंने कहा, 'लॉन्च पैड' जैसे मंच बिक्री की गारंटी भले न दें, लेकिन प्रचार की गारंटी जरूर देते हैं।
फातिमा के अनुसार, घर से व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं के लिए यह मंच विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यहाँ आने वाले लोग ब्रांड को पहचानते हैं और ज़रूरत पड़ने पर उसे याद भी रखते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 'लॉन्च पैड 1' और 'लॉन्च पैड 2' के दौरान इस पहल की जानकारी बहुत कम लोगों को थी, जबकि तीसरे संस्करण की सफलता ने उनकी बिक्री को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
एक अन्य उद्यमी सोलिया ने कहा कि इससे पहले महिलाओं को ऐसा कोई मंच उपलब्ध नहीं था, जहाँ वे अपने उत्पाद और कार्य को बड़े स्तर पर प्रदर्शित कर सकें। उनके अनुसार, कई युवा उद्यमी व्यवसाय शुरू करने से इसलिए कतराते हैं क्योंकि उन्हें उचित मंच और मार्गदर्शन नहीं मिलता, जिससे वे निजी नौकरियों की ओर रुख कर लेते हैं।
घाटी की बदलती तस्वीर
ऑनलाइन कारोबार से जुड़ी उद्यमी सीरत ने बताया कि कश्मीर घाटी लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों और मानसिक आघात से गुज़री है, लेकिन अब इस तरह के आयोजन युवाओं को नई दिशा और आत्मविश्वास दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने अपना काम ऑनलाइन माध्यम से जारी रखा और 'लॉन्च पैड' ने उन्हें बुनियादी बढ़ावा देते हुए व्यापक पहुँच बनाने में मदद की।
सीरत ने युवा उद्यमियों को संदेश देते हुए कहा कि असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है और पारिवारिक बाधाओं के बावजूद धैर्य और जुनून के साथ आगे बढ़ने पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
आम जनता पर असर
कश्मीर में बेरोज़गारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और निजी क्षेत्र की सीमित उपस्थिति के कारण ऐसे प्लेटफॉर्म युवाओं के लिए और भी अहम हो जाते हैं। फातिमा के अनुसार, पहले महिलाएँ सरकारी और निजी नौकरियों पर अधिक ध्यान देती थीं, लेकिन अब यह सोच बदल रही है और युवा अपना स्वतंत्र व्यवसाय शुरू करने पर विचार करने लगे हैं।
क्या होगा आगे
'लॉन्च पैड' श्रृंखला की बढ़ती सफलता को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले संस्करणों में और अधिक महिला उद्यमी भाग लेंगी। यह आयोजन घाटी में उद्यमशीलता की संस्कृति को मज़बूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंच कश्मीर के आर्थिक परिदृश्य को धीरे-धीरे बदल सकते हैं।