पेट्रोल-डीजल 86-83 पैसे महंगा: एनडीए नेताओं का दावा — भारत ने वैश्विक संकट बेहतर संभाला
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 19 मई को एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल में 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 83 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि के बाद एनडीए नेताओं ने इसे वैश्विक ऊर्जा संकट से जोड़ते हुए सरकार के प्रबंधन का बचाव किया। नेताओं का कहना है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत कम बढ़ी हैं।
मूल्य वृद्धि की पृष्ठभूमि
यह बढ़ोतरी होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और पश्चिम एशिया में जारी सशस्त्र संघर्ष के बीच हुई है, जिसने वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला को बाधित किया है। यह ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें पहले से ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं और भारतीय तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि वैश्विक संकट और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में रुकावट इस बढ़ोतरी के मूल कारण हैं। उन्होंने कहा, 'एक वैश्विक संकट है। होर्मुज जलडमरूमध्य अवरुद्ध है। दुनिया भर में तेल और गैस की बड़े पैमाने पर कमी है। केवल भारत में ही जनता पर सबसे कम बोझ डाला जा रहा है। ऐसी स्थिति में, विपक्षी नेता बेतुके बयान दे रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।'
उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के संस्थापक संजय निषाद ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बावजूद भारत अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। उन्होंने कहा, 'जब खाड़ी क्षेत्र में कोई संघर्ष होता है, तो यह जाहिर है कि ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। पीएम मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। अभी के लिए, हम बस इतना ही कर सकते हैं।' निषाद ने यह भी कहा कि पिछली सरकारों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए था।
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी इस बढ़ोतरी को वैश्विक परिघटना करार दिया। उन्होंने कहा, 'पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देख रही है। दूसरे देशों की तुलना में, भारत में तेल की कीमतें उतनी ज्यादा नहीं बढ़ी हैं।'
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'जहाँ तक हो सका, प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि लोगों पर इसका बहुत ज्यादा असर न पड़े। लेकिन हमारी तेल कंपनियों पर दबाव है, और उन्हें लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। इसलिए, कीमतों में सिर्फ उतनी ही बढ़ोतरी की गई है, जितनी जरूरी थी।'
आम जनता पर असर
एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी से परिवहन लागत, रसोई गैस और रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ने की आशंका है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है, जो संकट की गंभीरता को रेखांकित करती है।
क्या होगा आगे
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का सीधा असर पड़ता है। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में दीर्घकालिक नीतिगत कदमों की माँग तेज़ होने की संभावना है।