उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष ने कोटद्वार में महिला हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया, विवादों का समाधान
सारांश
Key Takeaways
- महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाना है।
- कुसुम कंडवाल ने विवादों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाई।
- साइबर सेल महिलाओं से जुड़े ऑनलाइन अपराधों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करेगा।
- महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
- स्थानीय अधिकारियों से सहयोग की अपील की गई।
कोटद्वार, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने शनिवार को कोटद्वार में महिला हेल्प डेस्क और साइबर सेल का आकस्मिक निरीक्षण किया।
इस मौक़े पर उन्होंने हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया और काउंसलिंग सत्र में शामिल होकर उपस्थित पक्षों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने आपसी संवाद और समझदारी से चल रहे विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने का प्रयास किया।
निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष ने हेल्प डेस्क के प्रभारी से पंजीकृत मामलों की संपूर्ण जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में कुल 540 मामले दर्ज किए गए थे, जिनका सफलतापूर्वक समाधान किया गया है। 2026 के पहले दो महीनों (जनवरी-फरवरी) में 112 नए मामले सामने आए हैं, जिन पर सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। कंडवाल ने कहा कि महिला हेल्प डेस्क का मुख्य उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को तुरंत न्याय दिलाना और बिखरते परिवारों को आपसी समझ से जोड़कर बचाना है।
अध्यक्ष ने साइबर सेल का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े ऑनलाइन अपराधों, साइबर बुलिंग और अन्य डिजिटल शोषण के मामलों पर प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में बेटियों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही, निजी संस्थानों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समिति की जानकारी सभी जगह पहुंचाने और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ कठोर कदम उठाने पर जोर दिया।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हेल्प डेस्क और साइबर सेल जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से अपील की कि वे इन केंद्रों को और प्रभावी बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करें।