26 सितंबर 2026
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एसआईआर विवाद पर रामदास अठावले बोले — चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था, सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं

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एसआईआर विवाद पर रामदास अठावले बोले — चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था, सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं

सारांश

केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने जयपुर में साफ कहा — एसआईआर सरकार का नहीं, चुनाव आयोग का मामला है। राहुल गांधी की इस्तीफे की माँग को राजनीतिक बताया और सीजेपी पर 'इस्तीफा जनता पार्टी' का तंज कसा।

मुख्य बातें

रामदास अठावले ने 26 सितंबर 2026 को जयपुर में कहा कि एसआईआर विशुद्ध रूप से भारत निर्वाचन आयोग का आंतरिक विषय है।
संविधान के अनुसार चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है — सरकार और आयोग के बीच सीधा हस्तक्षेप संभव नहीं।
राहुल गांधी की ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को अठावले ने राजनीतिक मुद्दा करार दिया।
एसआईआर का निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिया था; बाद में विरोध की खबरें आईं, पर घोषणा सामूहिक रही।
सीजेपी की 48 घंटे में इस्तीफे की माँग पर अठावले ने तंज — संगठन का नाम 'इस्तीफा जनता पार्टी' होना चाहिए।

केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने 26 सितंबर 2026 को जयपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर सीधी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर पूरी तरह चुनाव आयोग का आंतरिक मामला है और केंद्र सरकार की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं है।

अठावले का स्पष्ट रुख

अठावले ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और सरकार उसके आंतरिक निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर पर अपना पक्ष पहले ही सामने रखा है और इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग पर अठावले ने कहा कि यह विशुद्ध राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित कदम है और इसे गंभीर संवैधानिक विमर्श के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

एसआईआर का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

अठावले ने एसआईआर की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और शुद्ध बनाना था। जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जोड़े गए हैं, उन्हें सूची से हटाया जाना ज़रूरी है।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी एक पते पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में नाम दर्ज हैं, तो उनकी जाँच होना अनिवार्य थी। उल्लेखनीय है कि एसआईआर का निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सामूहिक रूप से लिया था। हालाँकि बाद में दोनों चुनाव आयुक्तों के विरोध की खबरें सामने आईं, परंतु अंततः तीनों ने मिलकर इसकी औपचारिक घोषणा की।

सीजेपी की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया

सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) द्वारा 48 घंटों में इस्तीफे की माँग न मानने पर आंदोलन की धमकी पर भी अठावले ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सीजेपी ने इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन किया था और उस दौरान तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।

अठावले ने व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल उठाया कि क्या सीजेपी का एकमात्र उद्देश्य हर मुद्दे पर इस्तीफे की माँग करना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर यही एजेंडा है, तो संगठन का नाम बदलकर 'इस्तीफा जनता पार्टी' रख देना चाहिए।

विशेषज्ञ और राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि एसआईआर विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव चुनाव से पहले एक संवेदनशील मुद्दा बन जाता है और इस पर पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए।

अठावले की प्रतिक्रिया सत्ताधारी गठबंधन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें निर्वाचन आयोग को सरकार के प्रभाव से मुक्त और संविधानसम्मत संस्था के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल एक प्रक्रिया पर — और इस सवाल का जवाब किसी मंत्री के बयान से नहीं, बल्कि पारदर्शी आंतरिक प्रक्रिया से मिलेगा। सीजेपी पर 'इस्तीफा जनता पार्टी' का तंज राजनीतिक दृष्टि से चतुर हो सकता है, पर मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर उठे मूल सवालों से ध्यान भटकाने का भी जोखिम उठाता है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची से फर्जी, मृत या दोहरे नाम हटाए जाते हैं। विवाद इसलिए है क्योंकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए गए और इसका निर्णय आयोग के भीतर ही असहमति के साथ लिया गया।
रामदास अठावले ने एसआईआर विवाद पर क्या कहा?
अठावले ने कहा कि एसआईआर पूरी तरह चुनाव आयोग का मामला है और केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता के लिए ऐसी प्रक्रिया आवश्यक थी।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा क्यों माँगा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एसआईआर प्रक्रिया के क्रियान्वयन और आयोग के भीतर असहमति की खबरों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगा। अठावले ने इसे राजनीतिक मुद्दा बताया।
सीजेपी ने 48 घंटे में इस्तीफे की चेतावनी क्यों दी?
सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटों के भीतर इस्तीफे की माँग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी। अठावले ने इस पर तंज कसते हुए संगठन का नाम 'इस्तीफा जनता पार्टी' रखने की बात कही।
क्या चुनाव आयोग सरकार से स्वतंत्र है?
हाँ, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। अठावले ने इसी आधार पर कहा कि सरकार आयोग के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करती।
राष्ट्र प्रेस
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