ज्ञानेश कुमार पर चीमा का बड़ा हमला: SIR से वोट काटने की साजिश उजागर, लोकतंत्र को खतरा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 23 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। चीमा ने कहा कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से मतदाता सूचियों से नाम काटने की कथित कोशिश अब देशवासियों के सामने उजागर हो चुकी है और यह लोकतंत्र के विरुद्ध गहरी साजिश है।
मुख्य आरोप: वोट काटने की कथित साजिश
चीमा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने SIR की आड़ में लोकतंत्र के खिलाफ षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का कथित तौर पर इस्तेमाल करते हुए ज्ञानेश कुमार ने बड़े पैमाने पर वोट काटे, जिससे लोकतंत्र की 'हत्या' हुई। उनके अनुसार, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली समेत जिन राज्यों में हाल ही में चुनाव हुए, वहाँ कथित तौर पर वोट काटकर और वोट चोरी करके चुनाव जीते गए।
चीमा ने माँग की कि चुनाव आयोग को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने इसे महज चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना पर प्रहार बताया।
पंजाब में कथित तौर पर 20 लाख वोट काटे गए
चीमा ने दावा किया कि केवल पंजाब में ही लगभग 20 लाख मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि BJP संविधान की आत्मा को कमज़ोर करने में लगी है।
गौरतलब है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ हाल के हफ्तों में राष्ट्रीय स्तर पर उठती रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर इस तरह के गंभीर सवाल उठे हों।
पराली मुद्दे पर किसानों के पक्ष में चीमा
पराली जलाने को लेकर जारी किए गए आदेश पर भी चीमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने पंजाब के किसानों के विरुद्ध यह फरमान सादी बदले की भावना से जारी किया है। उनका कहना था कि किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन किया था, और उसी का बदला लेने के लिए अब पराली पर ऐसे आदेश जारी किए जा रहे हैं।
चीमा ने स्पष्ट किया कि पराली की समस्या का समाधान किसानों को आर्थिक सहायता और तकनीकी सहयोग देने से होगा, न कि दंडात्मक आदेशों से। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के हित में ठोस कदम उठाने की माँग की।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर कई विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई।
आगे क्या होगा
AAP सहित कई विपक्षी दलों द्वारा SIR के खिलाफ संयुक्त मोर्चे की संभावना बन रही है। इस मामले में आगे न्यायिक या संसदीय हस्तक्षेप की माँग भी उठ सकती है। चीमा के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में नई हलचल की उम्मीद है।