पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव, चीमा ने BJP पर वोट चोरी का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 23 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्ताव का बचाव किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर विपक्षी दलों के मतदाताओं के वोट छीनने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा के निलंबन और मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े दिल्ली एयरपोर्ट विवाद पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव
चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है, जिसे आगे की कार्रवाई के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। उन्होंने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय करार दिया।
चीमा ने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर विपक्षी दलों के मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं और उनके संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को संविधान के तहत मतदान का अधिकार प्राप्त है, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित संवैधानिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है।
सुखपाल सिंह खैरा का निलंबन
कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा के विधानसभा से निलंबन पर चीमा ने कहा कि पंजाब विधानसभा के नियमों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार खैरा का आचरण सदन की मर्यादा और लोकतंत्र की परंपराओं के अनुकूल नहीं था, इसीलिए उन्हें शेष सत्र में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया। चीमा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर संसदीय मर्यादाओं की अनदेखी करते हैं।
दिल्ली एयरपोर्ट विवाद और CM भगवंत मान का अपमान
मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े दिल्ली एयरपोर्ट विवाद पर चीमा ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और उसके विभिन्न विभाग पंजाब के चुने हुए मुख्यमंत्री का अपमान करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवंत मान पंजाब के लोगों, पंजाबी मुद्दों और पंजाब के गौरव की आवाज़ उठाते हैं, और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जाता है।
चीमा ने एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री के साथ हुए व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए माँग की कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उनके पद की परवाह किए बिना विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी चुने हुए मुख्यमंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में स्वीकार्य नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य विधानसभा ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया हो, लेकिन इस कदम से केंद्र-राज्य संबंधों में एक नया मोर्चा खुलने की संभावना है।
पंजाब विधानसभा में पारित यह प्रस्ताव अब राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद केंद्र की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग का रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।