पंजाब विधानसभा हंगामा: चीमा का आरोप — 'कांग्रेस ने हमेशा कानून-व्यवस्था तोड़ी'
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 27 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने पंजाब में सत्ता में रहने के दौरान बार-बार कानून-व्यवस्था का उल्लंघन किया। यह बयान पंजाब विधानसभा के अंतिम सत्र में हुए हंगामे और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के निलंबन के बाद आया है, जिसने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।
विधानसभा में हंगामे का पूरा घटनाक्रम
विधानसभा सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस विधायकों और AAP सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। चीमा के अनुसार, कांग्रेस विधायकों ने सदन के पोडियम पर हंगामा किया, जिसे उन्होंने 'गुंडागर्दी' करार दिया। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ कांग्रेस विधायक दो-तीन बार चुनाव जीत चुके हों, लेकिन उनके आचरण से स्पष्ट है कि वे कानून में विश्वास नहीं रखते।
चीमा ने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा में प्रवेश का अधिकार सभी विधायकों को है और किसी के भी अधिकारों को नहीं छीना गया। उन्होंने उल्लेख किया कि विपक्ष के चार-पाँच विधायक सदन में मौजूद थे और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा स्वयं विधानसभा आए, अपनी बात रखी और चले गए।
खैरा के निलंबन पर AAP का पक्ष
मंत्री चीमा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के निलंबन को उचित ठहराया। उनके अनुसार, कांग्रेस के कई नेता दलित समुदाय और अनुसूचित जातियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे हैं, और इसी वजह से खैरा को निलंबित किया गया। गौरतलब है कि यह निलंबन 2027 के विधानसभा चुनाव से महज कुछ माह पहले हुआ है, जिससे इसके राजनीतिक निहितार्थ और गहरे हो जाते हैं।
भाजपा पर पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा नशे के मुद्दे को उठाए जाने पर चीमा ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और अकाली दल के गठबंधन सरकार के दौरान प्रदेश में नशे ('चिट्टा') का कारोबार फला-फूला। चीमा के अनुसार, भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह निराधार विवाद खड़े करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार — खैरा का बयान
दूसरी ओर, निलंबित कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने AAP पर गंभीर आरोप लगाए। खैरा ने दावा किया कि विधानसभा के अंतिम दिन उन्हें और अन्य कांग्रेस विधायकों को सदन के अंदर नहीं जाने दिया गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने यह भी कहा कि जब कांग्रेस विधायक मीडिया से बात करना चाहते थे, तब पोडियम पर 'नाजायज कब्जा' किया गया और जानबूझकर महिला विधायकों को सामने भेजा गया। खैरा ने अपना निलंबन 'गलत' करार दिया।
आगे की राह
चीमा ने कानून-व्यवस्था पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए चेतावनी दी कि जो भी कानून के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह राजनीतिक संघर्ष आगे और तेज होने की संभावना है, क्योंकि तीनों प्रमुख दल — AAP, कांग्रेस और BJP — एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं।