27 अक्टूबर 2026
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चुनाव आयोग के हलफनामे से विपक्ष पर एनडीए का हमला: 'SIR पर सर्वसम्मति थी, वोट चोरी का दावा झूठा'

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चुनाव आयोग के हलफनामे से विपक्ष पर एनडीए का हमला: 'SIR पर सर्वसम्मति थी, वोट चोरी का दावा झूठा'

सारांश

चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा कि SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए, फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं। एनडीए ने इसे विपक्ष के वोट चोरी के दावों की 'पोल खुलना' बताया। मामला अदालत में जारी है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा कि SIR के सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए।
आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ, जैसा विपक्ष का आरोप था।
BJP , जदयू और अन्य एनडीए घटकों ने हलफनामे को राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों का खंडन बताया।
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्ताव और राष्ट्रपति की सहमति जरूरी।
सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई अभी जारी है; विपक्ष को हलफनामे पर जवाब देना होगा।

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने मंगलवार को विपक्ष पर तीखा हमला बोला। एनडीए नेताओं ने कहा कि इस हलफनामे से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत इंडी गठबंधन के तमाम नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ निराधार आरोप लगाए थे। आयोग के हलफनामे में दर्ज है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए थे।

हलफनामे में क्या कहा आयोग ने

सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल इस हलफनामे में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीनों आयुक्तों के बीच किसी भी विषय पर मतभेद नहीं था। आयोग के अनुसार, फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया और SIR से संबंधित निर्णय-प्रक्रिया पूरी तरह एकमत रही। गौरतलब है कि विपक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आयुक्तों में गहरे मतभेद होने का दावा किया था, जिसे अब आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अस्वीकार कर दिया है।

एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता ने कहा, 'राहुल गांधी की झूठ की पोल खुल गई है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त की सहमति से SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। अब साफ हो गया है कि राहुल गांधी ने वोट चोरी का मुद्दा देश को भ्रमित करने के लिए उठाया था।'

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'विपक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों में मतभेद का मुद्दा उठाया था। तीनों चुनाव आयुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि हर फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह विपक्ष को करारा जवाब है।'

जदयू नेता श्याम रजक ने भी इसी सुर में कहा कि हलफनामे से पुष्टि हो गई है कि विपक्ष ने वोट चोरी और फॉर्म-6 में बदलाव के दावों के ज़रिये जनता को भ्रमित किया।

ओमप्रकाश राजभर का तीखा बयान

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होना और राष्ट्रपति की सहमति अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी और अखिलेश यादव के शोर मचाने से मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं हटेंगे। लगातार चुनाव हारने के कारण विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त पर झूठा आरोप लगा रहे हैं।' राजभर ने आगे यह भी कहा कि जब 14 प्रांतीय कमेटी बनी और मतदान के लिए 14 लोगों को अधिकार मिला, तब 11 वोट सरदार पटेल, 2 वोट जवाहर लाल नेहरू और 1 वोट जिन्ना को मिले थे — फिर भी 2 वोट पाकर नेहरू प्रधानमंत्री बने। उन्होंने इसे 'कांग्रेस की वोट चोरी' की मिसाल बताया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में संशोधनों को लेकर लंबे समय से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहा है। विपक्ष का आरोप था कि फॉर्म-6 में बदलावों के ज़रिये मतदाताओं को सूची से हटाया जा रहा है और आयोग के भीतर गहरे मतभेद हैं। अब आयोग के इस हलफनामे के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला आगे भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई में विपक्षी दलों को आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। आलोचकों का कहना है कि हलफनामे में प्रक्रियागत सर्वसम्मति और मूल नीतिगत सवालों के बीच अंतर को स्पष्ट किया जाना बाकी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले राज्य चुनावों से पहले चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता को लेकर बहस को और तेज़ कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल नीतिगत सवाल — क्या SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता पर्याप्त थी — का उत्तर नहीं देता। एनडीए का इसे विपक्ष की 'पोल खुलना' बताना राजनीतिक दृष्टि से सुविधाजनक है, पर जवाबदेही की दृष्टि से अपर्याप्त। असली सवाल यह है कि आयोग की प्रक्रियागत एकता और उसकी नीतियों की स्वतंत्र जाँच दो अलग-अलग विषय हैं — और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई में यही अंतर उजागर होना चाहिए। चुनावी विश्वसनीयता लंबे समय में न्यायिक पारदर्शिता से बनती है, राजनीतिक जीत के दावों से नहीं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे में क्या कहा?
चुनाव आयोग ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए और फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ। आयोग ने तीनों सदस्यों के बीच किसी मतभेद से इनकार किया।
SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) विवाद क्या है?
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में बदलाव कर मतदाताओं को हटाया जा रहा है और आयुक्तों में इस पर गहरे मतभेद हैं। चुनाव आयोग के हलफनामे में इन दोनों दावों को अस्वीकार किया गया है।
एनडीए ने इस हलफनामे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
एनडीए के BJP, जदयू और अन्य घटक दलों के नेताओं ने कहा कि यह हलफनामा राहुल गांधी के वोट चोरी के दावों को झूठा साबित करता है। नेताओं ने इसे विपक्ष की 'साजिश की पोल खुलना' बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है?
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रस्ताव पास होना और राष्ट्रपति की सहमति अनिवार्य है। केवल विपक्षी नेताओं की माँग से यह संभव नहीं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी है और विपक्षी दलों को आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करना होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार यह विवाद आने वाले राज्य चुनावों से पहले चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर बहस को और तेज़ कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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