दिल्ली पुलिस ने ₹44 लाख की दिनदहाड़े डकैती सुलझाई, मुख्य साजिशकर्ता 'डेविल' समेत 6 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने ₹44 लाख की दिनदहाड़े हुई डकैती का मामला सुलझाते हुए मुख्य साजिशकर्ता सत्यम विश्वकर्मा उर्फ डेविल सहित सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच के दौरान लूटी गई नकदी में से ₹26.41 लाख, अपराध में इस्तेमाल एक पिस्तौल, एक कार और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। यह डकैती 27 अगस्त को एमएस पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में की गई थी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
27 अगस्त को हुई इस डकैती के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। जाँच में एक अंतरराज्यीय आपराधिक गिरोह की संलिप्तता उजागर हुई, जिसमें एक आंतरिक मुखबिर की सूचना निर्णायक साबित हुई। शाहदरा ज़िले में हुए इस अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी निगरानी और क्षेत्रीय अभियानों सहित व्यापक जाँच शुरू की।
पुलिस टीम और जाँच प्रक्रिया
एसएचओ राजेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में, एसीपी सीमापुरी मुकेश कुमार के मार्गदर्शन और शाहदरा डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीना के समग्र नेतृत्व में एक समर्पित टीम ने यह जाँच संचालित की। प्रारंभिक चरण में पुलिस ने पाँच आरोपियों — प्रांजय तिवारी, सरब तिवारी उर्फ प्रफुल्ल, गौरव तिवारी, अंबरीश तिवारी उर्फ चंचल और रामजीत — को गिरफ्तार किया। इस दौरान ₹3.90 लाख की नकदी, अपराध में उपयोग की गई एक कार और तीन मोबाइल फोन ज़ब्त किए गए।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और उत्तर प्रदेश से बरामदगी
मुख्य आरोपी सत्यम विश्वकर्मा प्रारंभिक गिरफ्तारियों के बाद भी फरार रहा। पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश में लगातार छापेमारी करते हुए उसका पता लगाया। विशिष्ट सूचना के आधार पर सुल्तानपुर जिले के एरुल गाँव में सत्यम की 19 वर्षीय बहन के पास से ₹22.51 लाख बरामद किए गए। नकदी छिपाने में सहायता करने के आरोप में उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत ज़मानत पर रिहा किया गया।
उत्तर प्रदेश से प्रोडक्शन वारंट पर लाए जाने के बाद सत्यम को 16 अक्टूबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। चार दिन की पुलिस हिरासत के दौरान वह जाँचकर्ताओं को सुल्तानपुर में गोमती कुरवार पुल के पास हलियापुर-कुरवार रोड पर ले गया, जहाँ 18 अक्टूबर को सड़क किनारे झाड़ियों से एक पिस्तौल और मैगजीन बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, लूट के बाद भागते समय उसने यह हथियार फेंका था। वर्तमान में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
किसने क्या भूमिका निभाई
पुलिस जाँच के अनुसार, प्रांजय तिवारी ने नकदी के बारे में गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराई और मुख्य साजिशकर्ता की भूमिका निभाई। सरब तिवारी ने उसे गिरोह से मिलवाया और गुरुग्राम में सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराए। अंबरीश तिवारी ने बैग छीनने में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि गौरव तिवारी ने रहने की व्यवस्था और निगरानी की जिम्मेदारी संभाली। रामजीत ने गाड़ी चलाई और मुख्य आरोपी को गिरफ्तारी से बचाने में मदद की।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, सत्यम और सरब के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पूर्व से आपराधिक मामले दर्ज हैं। अंबरीश पर बुलंदशहर जिले में भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। यह गिरोह की अंतरराज्यीय पहुँच और संगठित स्वरूप को दर्शाता है, जो ऐसे मामलों में जाँच को और जटिल बना देता है। पुलिस फिलहाल गिरोह के अन्य संभावित संपर्कों की जाँच जारी रखे हुए है।