27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धर्मेंद्र कश्यप सपा में शामिल; अखिलेश यादव का दावा — तारीख घोषित होते ही भाजपा की हार तय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धर्मेंद्र कश्यप सपा में शामिल; अखिलेश यादव का दावा — तारीख घोषित होते ही भाजपा की हार तय

सारांश

2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा को बड़ा सियासी बूस्ट — भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और BSP के आबिद अली ने पार्टी की सदस्यता ली। अखिलेश यादव ने न सिर्फ भाजपा की हार का दावा किया, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और बैलेट पेपर पर तीखे सवाल उठाए।

मुख्य बातें

भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और बेटी कीर्ति कश्यप ने 27 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली।
BSP के सैयद आबिद अली भी इसी अवसर पर सपा में शामिल हुए।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि 2027 विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित होते ही भाजपा की हार तय हो जाएगी।
अखिलेश ने लखनऊ के 97 बूथों पर बिना मुड़े बैलेट पेपर मिलने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
सपा अध्यक्ष ने मतदाता पहचान को आधार और बायोमेट्रिक से जोड़ने और सत्ता में आने पर मेटल वोटर आईडी कार्ड देने का वादा किया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आंवला लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप को उनकी बेटी कीर्ति कश्यप और समर्थकों सहित पार्टी में शामिल कराया। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सैयद आबिद अली ने भी इसी अवसर पर सपा की सदस्यता ग्रहण की। अखिलेश ने इस घटनाक्रम को 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक न्याय की लड़ाई को मज़बूती देने वाला कदम बताया।

मुख्य घटनाक्रम

बरेली की आंवला लोकसभा सीट से जुड़े तीन प्रमुख नेता — धर्मेंद्र कश्यप, नीरज मौर्य और सैयद आबिद अली — 2024 के लोकसभा चुनाव में अलग-अलग दलों से एक-दूसरे के विरुद्ध लड़े थे। अखिलेश यादव ने कहा कि ये तीनों आज एक ही मंच पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा को 'टाटा-बाय बाय' कहा था, उसी दिन से उनकी इच्छा थी कि वे सपा में आएं।

अखिलेश ने कहा कि पार्टी धर्मेंद्र कश्यप को पूरा राजनीतिक सम्मान और उचित स्थान देने में कोई कमी नहीं रखेगी। उन्होंने दावा किया कि जिस दिन 2027 विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होगी, उसी दिन भाजपा की हार सुनिश्चित हो जाएगी।

चुनाव आयोग पर सवाल

सपा अध्यक्ष ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लखनऊ में 97 बूथों पर बैलेट बॉक्स के भीतर बिना मुड़े हुए बैलेट पेपर मिलने की बात सामने आई है और यह किसी बड़ी साजिश का संकेत हो सकता है — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) के बहाने मतदाताओं के नाम काटे जाने का भी आरोप लगाया।

अखिलेश ने चुनाव आयोग (ECI) और सरकार से माँग की कि उत्तर प्रदेश सहित उन सभी राज्यों की मतदाता सूचियाँ दुरुस्त कराई जाएँ जहाँ आगामी चुनाव होने हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावों और 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची से नाम काटे जाने के पुराने आरोपों का भी हवाला दिया।

बायोमेट्रिक मतदान और मेटल वोटर कार्ड की वकालत

अखिलेश यादव ने मतदाता पहचान को आधार और बायोमेट्रिक व्यवस्था से जोड़ने की माँग की। उनका तर्क था कि जब राशन वितरण में बायोमेट्रिक तकनीक का इस्तेमाल हो सकता है, तो निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए भी इसका उपयोग होना चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनने पर नागरिकों को मेटल वोटर आईडी कार्ड जारी किए जाएँगे।

भाजपा और 'प्रीपेड पार्टियों' पर निशाना

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव जीतने का 'कॉरपोरेट तरीका' अपना लिया है और बड़ी राजनीतिक प्रबंधन कंपनियाँ चुनाव परिणाम पहले से तय करने का दावा करती हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को 'प्रीपेड पार्टियों' से सावधान रहना होगा जो दूसरों के इशारे पर लाउडस्पीकर बनकर काम करती हैं।

अखिलेश ने यह भी कहा कि आगामी चुनाव केवल सत्ता हासिल करने की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने का चुनाव है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को पीडीए — यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग — की एकजुटता से भय है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में दल-बदल की गतिविधियाँ 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ तेज़ होती जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2022 में नहीं हो सकी थी। चुनाव आयोग पर उनके आरोप — बैलेट पेपर से लेकर SIR तक — राजनीतिक रूप से धारदार हैं, लेकिन जब तक स्वतंत्र जाँच नहीं होती, इन्हें सत्यापित दावों की बजाय चुनावी कथा-निर्माण के हिस्से के रूप में देखा जाएगा। बायोमेट्रिक मतदान और मेटल कार्ड की माँग नई नहीं है — सवाल यह है कि सपा इसे अपने घोषणापत्र की ठोस प्रतिबद्धता में बदल पाती है या नहीं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र कश्यप कौन हैं और वे सपा में क्यों शामिल हुए?
धर्मेंद्र कश्यप बरेली की आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद हैं, जिन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को अपनी बेटी कीर्ति कश्यप और समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। अखिलेश यादव के अनुसार, भाजपा छोड़ते समय 'टाटा-बाय बाय' कहने के बाद से ही उनका सपा में आना तय माना जा रहा था।
अखिलेश यादव ने 2027 चुनाव को लेकर क्या दावा किया?
अखिलेश यादव ने दावा किया कि जिस दिन 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होगी, उसी दिन भाजपा की हार तय हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पीडीए — पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — वर्ग की एकजुटता से भाजपा को भय है।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि लखनऊ में 97 बूथों पर बैलेट बॉक्स के भीतर बिना मुड़े बैलेट पेपर मिले, जिसे उन्होंने बड़ी साजिश का संकेत बताया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने SIR के ज़रिए मतदाताओं के नाम काटने और सपा प्रभाव वाले बूथों पर जानबूझकर कम मशीनें लगाने के आरोप भी लगाए।
सपा के मेटल वोटर आईडी कार्ड और बायोमेट्रिक मतदान के प्रस्ताव क्या हैं?
अखिलेश यादव ने वादा किया कि उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनने पर नागरिकों को धातु (मेटल) से बना मतदाता पहचान पत्र जारी किया जाएगा। उन्होंने मतदाता पहचान को आधार और बायोमेट्रिक व्यवस्था से जोड़ने की भी वकालत की।
इस दल-बदल का 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव पर क्या असर होगा?
धर्मेंद्र कश्यप और आबिद अली का सपा में शामिल होना आंवला क्षेत्र में पार्टी के जातीय और सामाजिक आधार को मज़बूत करने की कोशिश है। 2027 से पहले यह दल-बदल उत्तर प्रदेश में बदलते सियासी समीकरणों का संकेत है, जहाँ सपा पीडीए गठबंधन के ज़रिए भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले