27 सितंबर 2026
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अखिलेश यादव का आरोप: फॉर्म-7 से 2022 में सपा समर्थकों के वोट काटे, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

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अखिलेश यादव का आरोप: फॉर्म-7 से 2022 में सपा समर्थकों के वोट काटे, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

सारांश

2027 के चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव ने 2022 की हार का हिसाब माँगा — फॉर्म-7 के जरिए वोट कटवाने के आरोप, गोरखपुर में 'नाव चलने' का तंज, और हर सीट पर 27 हजार वोट बढ़ाने का संकल्प। सपा की रणनीति साफ है: इस बार चुनाव से पहले ही मतदाता सूची की लड़ाई जीतनी है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि 2022 UP चुनाव में फॉर्म-7 के जरिए सपा समर्थकों के वोट काटे गए।
लखनऊ में एक व्यक्ति द्वारा 100 से अधिक फॉर्म-7 जमा करने का दावा; नियमानुसार एक व्यक्ति अधिकतम 5 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चुनाव आयोग का बचाव करने पर अखिलेश ने भाजपा की संलिप्तता पर सवाल उठाया।
सपा का 2027 लक्ष्य: हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाना; मतदाता सूची की निगरानी को रणनीति का केंद्र बनाया जाएगा।
गोरखपुर में जलभराव पर कटाक्ष — 'जहाँ मेट्रो चलनी थी, वहाँ नाव चल रही है'; सैफई मॉडल से सीखने की नसीहत।
2027 घोषणापत्र में खिलाड़ियों की माँगें शामिल करने और खेल व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का वादा।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप लगाए कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फॉर्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसके कारण उनकी पार्टी सरकार बनाने में असमर्थ रही। उन्होंने दावा किया कि 2019 में जिन मतदाताओं ने वोट डाला था, उनमें से अनेक को 2022 में मताधिकार से वंचित कर दिया गया।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लोगों ने गाँव-गाँव जाकर विपक्षी मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरकर जमा किए। उनके अनुसार, लखनऊ में एक व्यक्ति ने 100 से अधिक वोट हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किए, जबकि नियमों के तहत एक व्यक्ति अधिकतम 5 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शिकायतों पर चुनाव आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

यादव ने यह भी कहा कि 2017 में पार्टी इस गड़बड़ी को भाँप नहीं सकी, क्योंकि उस समय उसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा था। उनके मुताबिक, 2022 के चुनाव के बाद ही सपा ने मतदाता सूची में अनियमितताओं का मामला उठाया था।

भाजपा और मुख्यमंत्री पर निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चुनाव आयोग का बचाव किए जाने पर अखिलेश ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के पक्ष में बोल रहे हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा कथित वोट कटौती में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनावों में भी पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में तैनात कर मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतें सामने आई थीं।

गौरतलब है कि ये आरोप 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले लगाए जा रहे हैं, जो उन्हें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। सपा के ये दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं; चुनाव आयोग या भाजपा की तरफ से तत्काल कोई आधिकारिक खंडन या प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

2024 लोकसभा से सबक और 2027 की तैयारी

अखिलेश यादव ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाता सूची को लेकर बढ़ी सजगता के कारण सपा ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सांसद जिताए। उन्होंने घोषणा की कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पार्टी मतदाता सूची की निगरानी को अपनी चुनावी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बनाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन के भीतर सपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अखिलेश ने इसे 'रणनीति का हिस्सा' बताते हुए कहा कि चुनावी दौर में राजनीतिक दल अलग-अलग तरीके से अपनी बात रखते हैं।

गोरखपुर और विकास पर कटाक्ष

अखिलेश यादव ने गोरखपुर का जिक्र करते हुए योगी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस शहर को स्पेन जैसा बनाने की बातें की जाती थीं, वहाँ बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव हो रहा है। उनका व्यंग्यपूर्ण बयान — 'जहाँ मेट्रो चलनी थी, वहाँ नाव चल रही है' — सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने सरकार से सैफई के विकास मॉडल से प्रेरणा लेने की अपील की और नेताओं द्वारा 'गोद लिए गए' गाँवों में विकास कार्यों की माँग की।

खेल और घोषणापत्र

सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में खिलाड़ियों की प्रमुख माँगों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक खेलों को बढ़ावा देने और खेल व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का वादा किया। 2027 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए सपा अपनी जमीनी तैयारी को व्यापक आधार देने में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब 2027 की दहलीज पर इन्हें दोबारा उठाना एक सुनिश्चित राजनीतिक रणनीति है। असली सवाल यह है कि जब ये अनियमितताएँ कथित तौर पर उसी वक्त हो रही थीं, तो सपा ने चुनाव परिणामों को न्यायालय में चुनौती क्यों नहीं दी — यह खामोशी उनके दावों की विश्वसनीयता को कमजोर करती है। दूसरी तरफ, फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर बाद में लगाई गई रोक यह संकेत जरूर देती है कि प्रणालीगत कमजोरियाँ वास्तविक थीं। मतदाता सूची की राजनीति 2027 की असली जमीनी जंग बन सकती है, जहाँ संख्या से ज्यादा 'किसका वोट सुरक्षित है' का सवाल निर्णायक होगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव का फॉर्म-7 वाला आरोप क्या है?
अखिलेश यादव का आरोप है कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा समर्थकों ने फॉर्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटवाए। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ में एक व्यक्ति ने 100 से अधिक ऐसे फॉर्म जमा किए, जबकि नियम के अनुसार एक व्यक्ति अधिकतम 5 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है।
क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई कार्रवाई की?
अखिलेश यादव के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस तरह की शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई। चुनाव आयोग की तरफ से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
2027 के चुनाव के लिए सपा की क्या रणनीति है?
समाजवादी पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही पार्टी मतदाता सूची की निगरानी को अपनी चुनावी तैयारी का केंद्रीय हिस्सा बनाएगी।
अखिलेश यादव ने गोरखपुर को लेकर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर को स्पेन जैसा बनाने के दावे किए गए थे, लेकिन बारिश के बाद वहाँ जगह-जगह जलभराव की स्थिति है। उन्होंने व्यंग्यपूर्वक कहा कि 'जहाँ मेट्रो चलनी थी, वहाँ नाव चल रही है' और सरकार से सैफई के विकास मॉडल से प्रेरणा लेने की अपील की।
2024 लोकसभा चुनाव में सपा की सफलता का अखिलेश ने क्या कारण बताया?
अखिलेश यादव ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाता सूची को लेकर बढ़ी सजगता और सतर्कता के कारण सपा उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सांसद जिताने में सफल रही। उनके अनुसार, 2022 की कथित गड़बड़ी से सबक लेकर पार्टी ने 2024 में मतदाता सूची की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया।
राष्ट्र प्रेस
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