23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अखिलेश यादव का तंज: भाजपा वोट चोरी के लिए विश्वविद्यालय खोले, कार्यकर्ताओं को तीन साल का कोर्स कराए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अखिलेश यादव का तंज: भाजपा वोट चोरी के लिए विश्वविद्यालय खोले, कार्यकर्ताओं को तीन साल का कोर्स कराए

सारांश

अखिलेश यादव का तंज — भाजपा 'वोट चोरी के लिए विश्वविद्यालय खोले' — सिर्फ व्यंग्य नहीं है। विधान परिषद के सीमित मतदाता वाले चुनाव में धांधली के आरोप लगाकर सपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की लड़ाई का माहौल अभी से बनाना शुरू कर दिया है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 23 अक्टूबर 2026 को सैफई में भाजपा पर विधान परिषद चुनाव में फर्जी मतदान और धांधली का आरोप लगाया।
उन्होंने व्यंग्य में कहा — भाजपा को वोट चोरी के लिए विश्वविद्यालय खोलकर तीन साल का कोर्स चलाना चाहिए।
सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग (ECI) और प्रशासन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
अखिलेश ने दावा किया कि 2022 से सपा मतदाता सूची गड़बड़ियों का मुद्दा उठाती आ रही है।
2027 विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के जरिए भाजपा को हराने का एलान किया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 23 अक्टूबर 2026 को सैफई में मतदान के बाद मीडिया से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और फर्जी मतदान कराने का आरोप लगाया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि भाजपा को वोट चोरी के लिए एक विश्वविद्यालय स्थापित कर देना चाहिए और अपने कार्यकर्ताओं के लिए कम-से-कम तीन साल का पाठ्यक्रम चलाना चाहिए।

सैफई में मतदान के बाद बोले अखिलेश

अखिलेश यादव आगरा-अलीगढ़ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने के लिए सैफई पहुँचे थे। मतदान के उपरांत पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की सीमित संख्या होने के बावजूद भाजपा हार के भय से बुरी तरह घबराई हुई है। उनका आरोप था कि भाजपा से जुड़े लोगों ने जगह-जगह फर्जी मतदान का प्रयास किया और सपा के मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुँचने से रोका।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने 'गुंडों और भ्रष्ट अधिकारियों' को आगे कर दिया — एक आरोप जिसे सत्यापित नहीं किया जा सका है और जिसे सपा का कथित दावा मानना उचित होगा। पूरे प्रदेश से ऐसी सूचनाएँ मिलने की बात कहते हुए अखिलेश ने दावा किया कि यह अलग-थलग घटनाएँ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कोशिश है।

चुनाव आयोग और प्रशासन पर निशाना

सपा प्रमुख ने प्रशासन और चुनाव आयोग (ECI) पर भी तीखा हमला बोला। उनके अनुसार प्रशासन मूकदर्शक बना रहा और चुनाव आयोग ने शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी 'नींद की गोली खाकर सोए हुए हैं।' इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2022 से ही सपा मतदाता सूची में गड़बड़ियाँ और वोट चोरी के मुद्दे उठाती आ रही है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों में भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत है — एक गंभीर आरोप जिस पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

शासन-विफलता पर व्यापक हमला

अखिलेश यादव ने केवल चुनावी धांधली तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार, महंगाई और अन्याय को बढ़ावा देने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं, युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिला और अस्पतालों को 'खुद इलाज की जरूरत है।' एंबुलेंस सेवाओं, एक्सप्रेसवे की खराब हालत और किसानों को खाद न मिलने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।

पुलिस व्यवस्था पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि प्रदेश में 'हथेली गरम तो पुलिस नरम' जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आरक्षण को कमजोर कर रही है, प्राथमिक विद्यालय बंद कर रही है और शराब की दुकानें खुलवा रही है।

केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल

सपा प्रमुख ने केंद्र सरकार की व्यापार नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खाद के लिए आवश्यक रसायनों की आपूर्ति चीन और अन्य देशों से होती है, और केंद्र की व्यापार नीति देश के हितों के अनुरूप नहीं है — जिसका सीधा असर किसानों को खाद की उपलब्धता पर पड़ रहा है।

2027 विधानसभा चुनाव का एलान

अखिलेश यादव ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा का 'सफाया' कर देगी। उन्होंने कहा कि सपा और इंडिया गठबंधन पूरी तरह तैयार हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को अगले विधानसभा चुनाव की दिशा का संकेत माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि उन्होंने चुनाव आयोग पर जो गंभीर आरोप लगाए — वे सिद्ध तथ्य हैं या राजनीतिक आख्यान? सपा 2022 से यही आरोप लगाती आ रही है, फिर भी अब तक कोई स्वतंत्र जाँच परिणाम सार्वजनिक नहीं हुई। विधान परिषद चुनाव में सीमित मतदाता आधार होने के कारण छोटी-सी हेराफेरी भी नतीजों को पलट सकती है — यही इस चुनाव की संवेदनशीलता है। लेकिन जब तक सपा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, इसे राजनीतिक बयानबाजी और जमीनी सच्चाई के बीच के धुंधलेपन में देखना जरूरी है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में फर्जी मतदान कराया और सपा के मतदाताओं को रोकने की कोशिश की। उन्होंने इसे 'सुनियोजित वोट चोरी' बताते हुए चुनाव आयोग और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने 'वोट चोरी विश्वविद्यालय' का तंज क्यों कसा?
23 अक्टूबर 2026 को सैफई में मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि भाजपा को वोट चोरी में इतनी महारत हासिल है कि उसे इसके लिए एक विश्वविद्यालय खोलकर कार्यकर्ताओं को तीन साल का कोर्स कराना चाहिए। यह बयान भाजपा पर चुनावी बेईमानी के कथित आरोपों को उजागर करने का व्यंग्यात्मक तरीका था।
सपा ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने धांधली की शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में गड़बड़ियों में भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत है — हालाँकि यह एक कथित आरोप है जिसे सत्यापित नहीं किया जा सका।
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर अखिलेश का क्या रुख है?
अखिलेश यादव ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा का 'सफाया' कर देगी और इंडिया गठबंधन जीत हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि सपा पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतरेगी।
अखिलेश ने उत्तर प्रदेश की किन समस्याओं का जिक्र किया?
सपा प्रमुख ने डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतें, युवा बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं की खराब हालत, पुलिस में भ्रष्टाचार, किसानों को खाद की अनुपलब्धता और आरक्षण को कमजोर करने जैसे मुद्दे उठाए। ये सभी बातें उन्होंने भाजपा सरकार के शासनकाल की विफलता के रूप में प्रस्तुत कीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले