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अखिलेश यादव का बड़ा हमला: UP में आम जनता को न्याय मिलना हो रहा कठिन, BJP सरकार पर गंभीर आरोप

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अखिलेश यादव का बड़ा हमला: UP में आम जनता को न्याय मिलना हो रहा कठिन, BJP सरकार पर गंभीर आरोप

सारांश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर UP की BJP सरकार पर न्याय व्यवस्था, जमीन कब्जे, कानून-व्यवस्था और महिला सम्मान को लेकर तीखे आरोप लगाए। PDA फॉर्मूले को धार देते हुए 2027 चुनाव की जमीन तैयार करने के संकेत दिए।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 24 अप्रैल 2025 को लखनऊ में प्रेस वार्ता कर UP की BJP सरकार पर कड़े आरोप लगाए।
हाथरस, गाजीपुर, कानपुर, हरदोई और मेरठ की घटनाओं का हवाला देकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
सपा ने आरोप लगाया कि सत्ता से जुड़े लोग सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।
PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को फिर से आगे बढ़ाते हुए 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के संकेत दिए।
BJP की पदयात्राओं में महिलाओं के साथ व्यवहार पर सवाल उठाए और महिला सम्मान का मुद्दा उठाया।
अखिलेश ने कहा — लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है और मतदाता आने वाले चुनाव में जवाब देंगे।

लखनऊ, 24 अप्रैल 2025 (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम जनता को न्याय मिलना लगातार कठिन होता जा रहा है और प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कानून-व्यवस्था से लेकर चुनावी माहौल तक पर सत्ता पक्ष को घेरा।

न्याय व्यवस्था पर सीधा प्रहार

अखिलेश यादव ने हाथरस सहित कई संवेदनशील घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा कार्यकर्ताओं की आवाज को भी जानबूझकर दबाया जा रहा है और उनके साथ अन्याय हो रहा है।

सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोग सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए जमीनों पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने गाजीपुर, कानपुर, हरदोई और मेरठ की हालिया घटनाओं का उल्लेख कर कहा कि ये सब प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की तस्वीर पेश करती हैं।

लोकतंत्र और संविधान की दुहाई

अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की मूल भावना की रक्षा करना हर नागरिक और सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भारी सुरक्षाबल तैनाती के बावजूद जनता निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करती है।

उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के दौरान भी व्यापक और निष्पक्ष सुरक्षा व्यवस्था की मांग की जाएगी, ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के वोट डाल सकें।

प्रशासनिक अधिकारियों पर तंज और PDA का मुद्दा

सपा अध्यक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अधिकारी बदलते राजनीतिक संकेतों को भांपकर अपनी कार्यशैली बदल रहे हैं — जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।

उन्होंने 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया और कहा कि इन वर्गों की उपेक्षा भाजपा सरकार की नीतिगत विफलता को दर्शाती है।

BJP की पदयात्राओं पर सवाल और महिला सम्मान का मुद्दा

अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्राओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन कार्यक्रमों में महिलाओं को पर्याप्त जानकारी दिए बिना बुलाया गया। उन्होंने महिला सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष से जवाब मांगा।

उन्होंने अंत में कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला हमेशा जनता का होता है और आने वाले चुनावों में उत्तर प्रदेश की जनता इन सभी सवालों का जवाब मतपेटी के जरिए देगी।

गहरा संदर्भ: विपक्ष की रणनीति और UP की राजनीतिक जमीन

गौरतलब है कि अखिलेश यादव के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा ने PDA फॉर्मूले के दम पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया था और 37 सीटें जीती थीं — जो पार्टी के लिए एक बड़ा उभार था।

आलोचकों का कहना है कि हाथरस जैसी घटनाएं और जमीन कब्जे के मामले भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने इन मुद्दों को उठाया हो — लेकिन 2025 में इनकी पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि सपा इन्हें चुनावी एजेंडे के केंद्र में रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

आने वाले हफ्तों में सपा की जिलेवार प्रेस वार्ताओं और PDA सम्मेलनों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जो 2027 की चुनावी जमीन तैयार करने की दिशा में एक सुनियोजित कदम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी मांग उनके अपने कार्यकाल में भी उठती रही थी — इसलिए असली कसौटी यही होगी कि जनता इस बार मुद्दों को नेताओं के ट्रैक रिकॉर्ड से जोड़कर देखती है या नहीं। मुख्यधारा की कवरेज इस प्रेस वार्ता को बयानबाजी मान सकती है, लेकिन गाजीपुर, हरदोई और मेरठ जैसे जिलों का जिक्र बताता है कि सपा जमीनी स्तर पर डेटा एकत्र कर रही है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने UP की BJP सरकार पर न्याय व्यवस्था की विफलता, जमीन कब्जे, सपा कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और महिला सम्मान के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने हाथरस, गाजीपुर, कानपुर, हरदोई और मेरठ की घटनाओं का हवाला दिया।
PDA फॉर्मूला क्या है और अखिलेश ने इसे क्यों उठाया?
PDA का मतलब है पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — यह सपा की चुनावी रणनीति का मुख्य आधार है। 2024 लोकसभा चुनाव में इस फॉर्मूले से सपा को 37 सीटें मिली थीं और अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में इसे फिर से धार दी जा रही है।
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल का जिक्र क्यों किया?
अखिलेश यादव ने बंगाल का उदाहरण देकर कहा कि वहां भारी सुरक्षाबल तैनाती के बावजूद जनता स्वतंत्र रूप से मतदान करती है। इसके जरिए उन्होंने UP में भी निष्पक्ष चुनावी सुरक्षा व्यवस्था की मांग का संकेत दिया।
क्या UP में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है?
हां, अखिलेश यादव की इस प्रेस वार्ता को राजनीतिक विश्लेषक 2027 विधानसभा चुनाव की पूर्व तैयारी के रूप में देख रहे हैं। PDA एजेंडे को जमीनी मुद्दों से जोड़ना और जिलेवार घटनाओं का उल्लेख इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अखिलेश यादव ने BJP की पदयात्राओं पर क्या कहा?
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि BJP की पदयात्राओं में महिलाओं को पर्याप्त जानकारी दिए बिना बुलाया गया। उन्होंने इसे महिला सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।
राष्ट्र प्रेस
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