भजन लाल शर्मा ने 23,890 करोड़ की परियोजनाओं की समीक्षा, देरी पर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- राज उन्नति की चौथी बैठक में 23,890 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की समीक्षा 24 अप्रैल को जयपुर में हुई।
- देरी पर दो कर्मचारी निलंबित और एक अधिकारी को नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए।
- राजस्थान मंडपम परियोजना — जयपुर में 90 एकड़ पर — अगले दो वर्षों में पूरी करने का लक्ष्य।
- जयपुर उत्तरी रिंग रोड के लिए जनवरी 2028 तक पूरा करने की समयसीमा तय।
- भरतपुर-डीग, सीकर-झुंझुनू, आबू रोड और बांसवाड़ा में नए हवाई अड्डों के सर्वेक्षण के निर्देश।
- कस्टम हायरिंग सेंटर के 87 प्रस्ताव लंबित, ग्रामीण विकास और सहकारिता विभाग को शीघ्र निपटाने के आदेश।
जयपुर, 24 अप्रैल। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में 'राज उन्नति' की चौथी समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य की लगभग 23,890 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया। बैठक में परियोजनाओं में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।
देरी पर सख्त कार्रवाई — दो कर्मचारी निलंबित, एक को नोटिस
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने बैठक में स्पष्ट किया कि जिन परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब हो रहा है, उनमें जिम्मेदारी तय की जाएगी। शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बरतने पर उन्होंने तत्काल दो कर्मचारियों को निलंबित करने और एक अधिकारी को नोटिस देने के निर्देश दिए।
निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को आदेश दिया कि 'राज उन्नति' बैठकों से कम से कम 15 दिन पहले अपनी आंतरिक समीक्षा अनिवार्य रूप से पूरी करें। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि बैठक तक पहुंचते-पहुंचते हर विभाग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो।
गौरतलब है कि राज उन्नति बैठकों की यह श्रृंखला मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में विकास कार्यों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है। यह चौथी बैठक है, जो दर्शाती है कि सरकार परियोजनाओं की नियमित निगरानी को प्राथमिकता दे रही है।
कस्टम हायरिंग सेंटर और हवाई अड्डों पर अहम निर्देश
बैठक में यह जानकारी सामने आई कि कस्टम हायरिंग सेंटर से जुड़े 87 प्रस्ताव अभी भी प्रक्रिया में लंबित हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि तय समय पर सूची क्यों जारी नहीं की गई। उन्होंने ग्रामीण विकास और सहकारिता विभागों को शीघ्रातिशीघ्र कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
राज्य में हवाई संपर्क को विस्तार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने भरतपुर-डीग, सीकर-झुंझुनू, आबू रोड और बांसवाड़ा में नए हवाई अड्डों के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही बीकानेर नाल हवाई अड्डा परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से संबंधित भूमि अधिग्रहण का कार्य पूर्ण हो चुका है।
राजस्थान मंडपम और जयपुर उत्तरी रिंग रोड को लेकर स्पष्ट समयसीमा
जयपुर में टोंक रोड (बी-2 बाईपास) के निकट लगभग 90 एकड़ भूमि पर निर्मित हो रहे 'राजस्थान मंडपम' की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। यह महत्वाकांक्षी परियोजना जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप विकसित की जा रही है, जिसमें कन्वेंशन सेंटर, प्रदर्शनी हॉल, कार्यालय, होटल और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।
मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), जलदाय विभाग और जिला प्रशासन को एकजुट होकर एक ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा। टोंक रोड और जवाहरलाल नेहरू मार्ग से इस परियोजना की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए, ताकि यह परियोजना अगले दो वर्षों में पूर्ण हो सके।
जयपुर उत्तरी रिंग रोड परियोजना के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की — जून 2026 तक भूमि अधिग्रहण, अक्टूबर 2026 तक निर्माण कार्य का शुभारंभ और जनवरी 2028 तक परियोजना का पूर्ण होना। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने अब तक की प्रगति से अवगत कराया।
राइजिंग राजस्थान, लॉजिस्टिक्स और सामाजिक योजनाओं पर भी फोकस
'राइजिंग राजस्थान' पहल के तहत हुए एमओयू की भी इस बैठक में समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने शहरी विकास विभाग और आवास बोर्ड को जोधपुर में नई तकनीक आधारित कौशल विकास परियोजना हेतु भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जयपुर में एक बड़े इनलैंड कंटेनर डिपो और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क के निर्माण के भी निर्देश दिए गए।
घुमंतू और विमुक्त समुदायों के लिए आवास योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने जिला स्तर पर योजनाएं बनाकर पात्र परिवारों को शीघ्र आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अमृत 2.0 योजना में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव को इस योजना की व्यक्तिगत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया। ऊर्जा विभाग को बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में गति लाने के भी निर्देश दिए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में इस पैमाने पर एक साथ इतनी परियोजनाओं की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से क्रियान्वयन होता है।