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AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर सियासी तूफान, अशोक पराशर का बड़ा बयान

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AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर सियासी तूफान, अशोक पराशर का बड़ा बयान

सारांश

AAP के राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने से पार्टी में सियासी भूचाल आ गया है। अशोक पराशर ने कहा कि दलबदलुओं को कोई फायदा नहीं मिलेगा। दिल्ली चुनाव हार के बाद AAP का यह संकट पंजाब तक असर डाल सकता है।

मुख्य बातें

AAP के कुछ राज्यसभा सांसदों ने 24 अप्रैल 2025 को पार्टी छोड़कर BJP की सदस्यता ग्रहण की।
AAP नेता अशोक पराशर ने कहा कि दलबदलुओं को BJP में जाने से कोई फायदा नहीं मिलेगा।
यह घटना दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AAP की करारी हार के बाद हुई, जब पार्टी पहले से संगठनात्मक संकट में थी।
AAP की राज्यसभा में संख्याबल और कमजोर होगी, जिससे संसद में विपक्षी भूमिका प्रभावित होगी।
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह दलबदल AAP की राजनीतिक स्थिति के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
पार्टी नेताओं ने BJP पर प्रलोभन देकर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया है।

मुंबई/लुधियाना, 24 अप्रैल 2025आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद देशभर में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने AAP के भीतर असंतोष की आग को हवा दे दी है और पार्टी नेताओं ने BJP पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे 'लोकतंत्र पर हमला' करार दिया है।

क्या है पूरा मामला

आम आदमी पार्टी के कुछ राज्यसभा सदस्यों ने हाल ही में पार्टी से इस्तीफा देकर BJP की सदस्यता ग्रहण की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब AAP पहले से ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस घटनाक्रम को 'सत्ता का दुरुपयोग' और 'जनादेश की अवमानना' बताया है।

अशोक पराशर का तीखा बयान

AAP के वरिष्ठ नेता अशोक पराशर ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि BJP में शामिल होने वाले सांसदों को इससे कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदा नहीं मिलने वाला। उन्होंने कहा कि जो नेता जनता का विश्वास तोड़कर दल बदलते हैं, उनका राजनीतिक भविष्य अंधकारमय होता है। पराशर ने यह भी आरोप लगाया कि BJP ने इन सांसदों को प्रलोभन देकर पार्टी तोड़ने की साजिश रची।

AAP के भीतर खुलकर आया असंतोष

इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली चुनाव 2025 में मिली हार के बाद से ही पार्टी में बिखराव की आशंका जताई जा रही थी। आलोचकों का कहना है कि यह AAP के संगठनात्मक ढांचे की कमज़ोरी को उजागर करता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक पैटर्न

गौरतलब है कि भारतीय राजनीति में दलबदल की यह प्रवृत्ति नई नहीं है। 1985 में बनाए गए दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के बावजूद राज्यसभा सदस्यों के मामले में कानूनी स्थिति अपेक्षाकृत जटिल रहती है। उल्लेखनीय है कि 2022 से अब तक कई क्षेत्रीय दलों के सांसद और विधायक सत्तारूढ़ BJP में शामिल हो चुके हैं, जिसे विपक्ष 'वॉशिंग मशीन राजनीति' कहता आया है।

राजनीतिक प्रभाव और आगे की राह

इस घटनाक्रम का सीधा असर AAP की राज्यसभा में संख्याबल पर पड़ेगा, जिससे पार्टी की संसदीय ताकत और कमजोर होगी। पंजाब में जहां AAP की सरकार है, वहां भी इस घटना का राजनीतिक संदेश नकारात्मक जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी ने अपने संगठन को जल्द नहीं संभाला तो आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आने वाले दिनों में AAP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस राजनीतिक प्रयोग के क्रमिक विघटन का संकेत है जिसे 'आम आदमी की राजनीति' कहा जाता था। विडंबना यह है कि जो पार्टी भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ खड़ी हुई थी, उसके अपने सांसद अब उसी सत्ता की ओर आकर्षित हो रहे हैं जिसे वे कभी चुनौती देते थे। दिल्ली में हार, अरविंद केजरीवाल की कानूनी लड़ाइयां और अब राज्यसभा में बिखराव — ये सब मिलकर AAP के राष्ट्रीय विपक्षी दल बनने के सपने को कमजोर कर रहे हैं। मुख्यधारा की मीडिया इसे सिर्फ दलबदल की खबर बना रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत में क्षेत्रीय आंदोलन से उभरी पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर टिकाऊ विकल्प बन सकती हैं?
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AAP के कौन से राज्यसभा सांसद BJP में शामिल हुए?
आम आदमी पार्टी के कुछ राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा देकर BJP की सदस्यता ग्रहण की है। इनके नाम और संख्या को लेकर पार्टी की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।
अशोक पराशर ने BJP में शामिल होने वाले सांसदों के बारे में क्या कहा?
AAP नेता अशोक पराशर ने कहा कि BJP में शामिल होने वाले सांसदों को इससे कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदा नहीं मिलेगा। उन्होंने इसे जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात बताया।
AAP के सांसदों के दलबदल का पंजाब पर क्या असर होगा?
पंजाब में AAP की सरकार है और यह दलबदल वहां पार्टी की साख को नुकसान पहुंचा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के पंजाब चुनाव से पहले यह घटना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
क्या दलबदल विरोधी कानून राज्यसभा सांसदों पर लागू होता है?
भारत में 1985 का दलबदल विरोधी कानून राज्यसभा सदस्यों पर भी लागू होता है, लेकिन इसकी कानूनी प्रक्रिया जटिल होती है। यदि दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं तो उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है।
AAP की राज्यसभा में अब कितनी सीटें बचेंगी?
इन सांसदों के जाने के बाद AAP की राज्यसभा में संख्याबल कमजोर होगी, जिससे संसद में उसकी विपक्षी भूमिका प्रभावित होगी। सटीक आंकड़े पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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