बांग्लादेश पर कर्ज का भारी बोझ: अगले 5 साल में चुकाने होंगे 26 अरब डॉलर

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बांग्लादेश पर कर्ज का भारी बोझ: अगले 5 साल में चुकाने होंगे 26 अरब डॉलर

सारांश

बांग्लादेश 2026-2030 के बीच 26 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाने की चुनौती का सामना कर रहा है। रूपपुर परमाणु परियोजना, वैश्विक संकट और कमजोर टैक्स बेस ने आर्थिक दबाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। 2063 तक कर्जमुक्त होने का अनुमान चिंताजनक है।

Key Takeaways

  • बांग्लादेश को 2026-2030 के बीच 26 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाना होगा।
  • देश का कुल बाहरी कर्ज 77 अरब डॉलर है, जो राष्ट्रीय आय का 19 प्रतिशत है।
  • 2026-2035 के दस वर्षों में कुल 51 अरब डॉलर का भुगतान करना होगा।
  • रूपपुर परमाणु परियोजना पर अकेले 11 अरब डॉलर का कर्ज है।
  • मौजूदा रफ्तार से बांग्लादेश 2063 तक ही कर्जमुक्त हो पाएगा।
  • ऋण-सेवा और राजस्व अनुपात 16.5%25 है, जो IMF की 18%25 जोखिम सीमा के करीब है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश इस समय गंभीर ऋण संकट की चपेट में है। कमजोर टैक्स बेस, वैश्विक अस्थिरता और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर विदेशी कर्ज की निर्भरता के चलते देश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 से 2030 के बीच बांग्लादेश को बाहरी ऋण चुकाने के लिए करीब 26 अरब डॉलर खर्च करने होंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डाल सकता है।

कर्ज का आकार और दायरा

जून 2024 तक बांग्लादेश का कुल बाहरी कर्ज लगभग 77 अरब डॉलर था, जो देश की राष्ट्रीय आय का करीब 19 प्रतिशत है। यह अनुपात लगातार बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है।

पिछले 54 वर्षों में बांग्लादेश ने बाहरी ऋण चुकाने पर कुल लगभग 40 अरब डॉलर खर्च किए हैं। लेकिन इस पूरी राशि के दो-तिहाई के बराबर भुगतान अकेले अगले पांच वर्षों में ही करना होगा — यह आंकड़ा बताता है कि संकट कितनी तेजी से गहरा हो रहा है।

वर्तमान में देश का ऋण-सेवा और सरकारी राजस्व अनुपात 16.5 प्रतिशत है, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 18 प्रतिशत के जोखिम स्तर से थोड़ा कम है। फिर भी विशेषज्ञ इसे खतरनाक मानते हैं।

2035 तक 51 अरब डॉलर का भुगतान

2026 से 2035 के बीच के दस वित्तीय वर्षों में बांग्लादेश को कुल 51 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाना होगा। यह राशि अगले पांच वर्षों की देनदारी से दोगुनी है।

2030 तक बांग्लादेश का सालाना कर्ज भुगतान बढ़कर 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहा, तो देश को कर्ज से पूरी तरह मुक्त होने में 2063 तक यानी करीब 37 साल और लग सकते हैं।

रेमिटेंस का सहारा, लेकिन पर्याप्त नहीं

2021 से 2025 के बीच बांग्लादेश को हर महीने औसतन लगभग 2 अरब डॉलर रेमिटेंस प्राप्त होता रहा। इस हिसाब से सबसे अधिक वार्षिक कर्ज भुगतान को पूरा करने के लिए लगभग तीन महीने की रेमिटेंस आय की जरूरत होगी।

हालांकि रेमिटेंस एक महत्वपूर्ण आर्थिक आधार है, लेकिन यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संघर्ष जैसी वैश्विक उथल-पुथल के कारण विदेश में काम करने वाले बांग्लादेशी श्रमिकों की आय और रोजगार पर भी असर पड़ा है।

कर्ज बढ़ने के मुख्य कारण

कर्ज के बढ़ते बोझ के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों कारण हैं। वैश्विक स्तर पर कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संघर्ष ने निर्यात, विदेशी निवेश और रेमिटेंस को बुरी तरह प्रभावित किया।

घरेलू मोर्चे पर, विदेशी कर्ज से चलने वाली बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बोझ का मुख्य कारण बनी हैं। इनमें प्रमुख हैं — रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (11 अरब डॉलर), कर्णफुली टनल, पद्मा रेल लिंक और शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा टर्मिनल। इन परियोजनाओं में देरी के कारण लागत और कर्ज दोनों बढ़ गए।

इसके साथ ही, टैक्स बेस का पर्याप्त विस्तार न होना और अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं द्वारा ब्याज दरों, चुकौती अवधि और ग्रेस पीरियड में किए गए बदलाव भी देश की कर्ज चुकाने की क्षमता पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

विश्लेषण: विरोधाभास और आगे की राह

गौरतलब है कि बांग्लादेश ने पिछले दशक में 'विकास के चमत्कार' का खिताब हासिल किया था — तेज जीडीपी वृद्धि, गरीबी में कमी और कपड़ा निर्यात में उछाल। लेकिन यह विकास काफी हद तक विदेशी कर्ज पर टिका था, और अब वही कर्ज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो श्रीलंका भी इसी तरह के ऋण-जाल में फंसकर 2022 में दिवालिया हो गया था। बांग्लादेश की स्थिति अभी उतनी गंभीर नहीं है, लेकिन संकेत चेतावनी देने वाले हैं।

आने वाले महीनों में IMF और विश्व बैंक के साथ बांग्लादेश की बातचीत और ऋण पुनर्गठन की संभावनाएं इस संकट के प्रबंधन में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

Point of View

बल्कि उस 'विकास मॉडल' की विफलता की कहानी है जो विदेशी कर्ज पर टिका था। विडंबना यह है कि जिन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को 'विकास की पहचान' बताया गया, वही अब देश की आर्थिक रीढ़ तोड़ रही हैं। श्रीलंका के दिवालियेपन से सबक न लेना और टैक्स बेस को मजबूत न करना — ये दो भूलें बांग्लादेश को महंगी पड़ रही हैं। भारत के पड़ोस में एक और आर्थिक संकट उभरना पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश पर कुल कितना बाहरी कर्ज है?
जून 2024 तक बांग्लादेश का कुल बाहरी कर्ज लगभग 77 अरब डॉलर था, जो देश की राष्ट्रीय आय का करीब 19 प्रतिशत है। यह अनुपात लगातार बढ़ रहा है।
बांग्लादेश को 2026 से 2030 के बीच कितना कर्ज चुकाना होगा?
वित्तीय वर्ष 2026 से 2030 के बीच बांग्लादेश को लगभग 26 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाना होगा। 2030 तक सालाना कर्ज भुगतान 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
बांग्लादेश का कर्ज इतना क्यों बढ़ा?
रूपपुर परमाणु परियोजना, पद्मा रेल लिंक जैसी बड़ी विदेशी कर्ज से चलने वाली परियोजनाओं में देरी, कोविड महामारी, यूक्रेन युद्ध और कमजोर टैक्स बेस मुख्य कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं द्वारा ब्याज दरों में बदलाव ने भी बोझ बढ़ाया।
क्या बांग्लादेश श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट में जा सकता है?
फिलहाल बांग्लादेश की स्थिति श्रीलंका जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन ऋण-सेवा अनुपात IMF की जोखिम सीमा के करीब है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुए तो संकट गहरा सकता है।
बांग्लादेश कर्जमुक्त कब होगा?
मौजूदा रुझान के आधार पर अनुमान है कि बांग्लादेश 2063 तक यानी लगभग 37 साल बाद कर्जमुक्त हो सकता है। यह अनुमान रेमिटेंस आय की मौजूदा दर पर आधारित है।
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