यूपीआई से भारत करता है 49%25 वैश्विक रियल-टाइम ट्रांजैक्शन, नन्दी ने मनी अल्फा समिट में गिनाई डिजिटल क्रांति की उपलब्धियां
सारांश
Key Takeaways
- यूपीआई के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन करता है।
- उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने 24 अप्रैल 2025 को ग्रेटर नोएडा में 'मनी अल्फा 360° समिट' का उद्घाटन किया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन ने भारत को विश्व की सबसे मजबूत डिजिटल सार्वजनिक संरचना में तब्दील किया है।
- रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं से लेकर वैश्विक निवेशकों तक — क्यूआर कोड और यूपीआई ने वित्तीय समावेश को नई परिभाषा दी है।
- उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।
- एआई, ब्लॉकचेन और फिनटेक तकनीकें भारत की वित्तीय प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बना रही हैं।
ग्रेटर नोएडा, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता 'नन्दी' ने शुक्रवार को घोषणा की कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से भारत आज दुनिया के कुल 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन का संचालन कर रहा है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित दो दिवसीय 'मनी अल्फा 360° समिट' के उद्घाटन सत्र में उन्होंने यह बात कही। यह आंकड़ा भारत की डिजिटल वित्तीय क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करता है।
नकद से डिजिटल तक — भारत की अभूतपूर्व यात्रा
मंत्री नन्दी ने कहा कि एक दशक पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह नकद और कागजी प्रक्रियाओं पर निर्भर थी, जहां बैंक शाखाओं में लंबी कतारें और धीमी लालफीताशाही आम बात थी। आज वही देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन की बदौलत विश्व की सबसे सशक्त डिजिटल सार्वजनिक संरचना के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा कि आज की वित्तीय गतिविधियां तीन मूलभूत स्तंभों पर टिकी हैं — गति, पारदर्शिता और समावेश। यह परिवर्तन केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक भी है।
यूपीआई — वैश्विक डिजिटल भुगतान का केंद्र
नन्दी ने बताया कि यूपीआई आज महज एक भुगतान माध्यम नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी साख का प्रतीक बन चुका है। विश्व स्तर पर होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में से 49 फीसदी अकेले भारत में यूपीआई के जरिए होते हैं — यह आंकड़ा अमेरिका, यूरोप और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी पीछे छोड़ता है।
गौरतलब है कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक यूपीआई के माध्यम से मासिक लेन-देन 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है — जो वर्ष 2016-17 की तुलना में हजारों गुना वृद्धि है।
समावेशी वित्त — छोटे विक्रेता से बड़े निवेशक तक
मंत्री ने जोर देकर कहा कि डिजिटल भुगतान अब केवल शहरी अभिजात वर्ग की सुविधा नहीं रहा। आज रेहड़ी-पटरी विक्रेता, चाय दुकानदार और ग्रामीण किसान तक क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। वहीं बड़े कॉर्पोरेट और वैश्विक निवेशक भी इसी प्रणाली के जरिए पूंजी का आदान-प्रदान कर पा रहे हैं।
यह समावेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, और डिजिटल वित्त ने उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
एआई, ब्लॉकचेन और फिनटेक — भविष्य की राह
नन्दी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्लॉकचेन और फिनटेक तकनीकों के समन्वय से भारत एक और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समावेशी वित्तीय प्रणाली की ओर तेजी से अग्रसर है। ये तकनीकें न केवल धोखाधड़ी रोकने में सहायक हैं, बल्कि ऋण उपलब्धता, बीमा और निवेश के नए द्वार भी खोल रही हैं।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में वही राष्ट्र और वही उद्यमी आगे निकलेगा, जो तकनीकी परिवर्तनों के साथ स्वयं को ढाल सके।
उत्तर प्रदेश का एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
नन्दी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि 'मनी अल्फा 360° समिट' जैसे मंच नवाचार और निवेश के बीच सेतु का काम करते हैं। इस प्रकार के आयोजन अब विकल्प नहीं, बल्कि डिजिटल आर्थिक भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुके हैं।
यह समिट इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के फिनटेक विशेषज्ञ, निवेशक और नीति-निर्माता एकत्रित हुए। आने वाले समय में यूपीआई का विस्तार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और तेजी से होने की उम्मीद है, जिससे भारत वैश्विक डिजिटल वित्त का नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में और मजबूती से आगे बढ़ेगा।