क्या अखिलेश यादव के आरोपों पर जिलाधिकारियों ने जवाब दिया?

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क्या अखिलेश यादव के आरोपों पर जिलाधिकारियों ने जवाब दिया?

सारांश

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों पर विभिन्न जिलाधिकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बनाए रखते हुए मतदाता डाटा साझा किया है। यह स्थिति चुनाव आयोग और सपा के बीच बढ़ते विवाद को उजागर करती है। जानिए पूरी कहानी में क्या है सच्चाई।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव के आरोपों का जिलाधिकारियों ने दिया जवाब।
मतदाता डाटा में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।
जिलाधिकारियों ने पारदर्शिता बनाए रखने का किया आश्वासन।

लखनऊ, 20 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'एफिडेविट' वाले बयान पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने अपने क्षेत्र में मतदाताओं के नाम काटने और जोड़ने के संबंध में जानकारी साझा की है।

कासगंज जिले के डीएम ने अखिलेश यादव के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा कि ईमेल द्वारा जनपद कासगंज की विधानसभा 101 अमांपुर के अंतर्गत आठ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटने की शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच में यह पाया गया कि सात मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दो बार होने के कारण एक नाम को हटा दिया गया। इन सात मतदाताओं के नाम आज भी मतदाता सूची में शामिल हैं। एक मतदाता की मृत्यु होने के कारण उनकी पत्नी ने फार्म-7 भरा था, जिसके आधार पर मृतक का नाम हटाया गया।

वहीं, बाराबंकी के डीएम ने एक्स पर पोस्ट किया- बाराबंकी जिले के विधानसभा क्षेत्र 266-कुर्सी के 2 मतदाताओं के शपथ पत्र उनके नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से काट दिए जाने के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुईं। जांच में पाया गया कि उपर्युक्त दोनों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं।

जौनपुर के डीएम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि ईमेल के माध्यम से जनपद जौनपुर की विधानसभा 366 जौनपुर के अंतर्गत पांच मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटने की शिकायत प्राप्त हुई थी। सभी पांचों मतदाता वर्ष 2022 के पूर्व ही मृतक हो चुके थे। इसकी पुष्टि स्थानीय सभासद और परिवार के सदस्यों द्वारा की गई। मृतकों के नाम नियमों के अनुसार हटाए गए हैं। अतः यह शिकायत पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है।

गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि जो चुनाव आयोग कह रहा है कि उन्हें यूपी में समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए एफिडेविट नहीं मिले हैं, वे अपनी पावती देख लें। इस बार हम मांग करते हैं कि चुनाव आयोग यह पुष्टि करे कि जो डिजिटल रसीद हमें भेजी गई है, वह सही है, नहीं तो चुनाव आयोग और डिजिटल इंडिया दोनों संदेह के घेरे में आ जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पूरे देश में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। प्रदेश के जिलाधिकारियों ने अपनी पारदर्शिता से यह साबित किया है कि वे चुनावी प्रक्रिया में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए एफिडेविट नहीं मिले हैं।
जिलाधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया में क्या कहा?
जिलाधिकारियों ने मतदाता डाटा साझा कर यह स्पष्ट किया कि सभी नाम सही ढंग से सूची में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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