अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला: पीडीए दबाव में सहयोगियों को सीटें देने की योजना, आरएलडी को 73, सुभासपा को 39 सीटें
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार, 18 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन के बढ़ते दबाव को देखते हुए, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने सहयोगी दलों को सीटें देने की योजना पर काम कर रही है। यादव ने दावा किया कि भाजपा को अपनी हार स्पष्ट दिख रही है और इसीलिए वह सहयोगियों को बिखरने से रोकने के लिए यह कदम उठा रही है।
प्रस्तावित सीट बंटवारे का पूरा ब्यौरा
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा ने कुछ चुनावी विशेषज्ञों की सलाह पर सहयोगी दलों के लिए सीटों का एक प्रस्तावित ढाँचा तैयार किया है। इसके तहत राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को 73 सीटें, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को 39 सीटें, निषाद पार्टी को 31 सीटें और अपना दल को 19 सीटें देने की योजना बताई जा रही है।
हालाँकि, सपा अध्यक्ष ने इस पूरी कवायद को अपर्याप्त करार दिया। उन्होंने कहा, 'यूं देखें तो ये एक सराहनीय बात है लेकिन पीडीए की जनसंख्या के अनुपात में ये भी आधे से कम ही है, इसीलिए ये योजना बुरी तरह असफल ही होगी।' यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि सपा पीडीए वर्ग की राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग को भाजपा के प्रस्तावित सीट बंटवारे से कहीं बड़ा मानती है।
शासन पर व्यापक आरोप
सीट बंटवारे के मुद्दे से आगे बढ़ते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार की नीतियों पर व्यापक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता धर्म और धन से जुड़े विवादों, माताओं के कथित अपमान, बच्चों पर लाठीचार्ज, भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोज़गारी से त्रस्त है।
उन्होंने झूठे मुकदमों, कथित फर्जी मुठभेड़ों और बुलडोजर कार्रवाई का भी उल्लेख किया। यादव ने दावा किया कि लोगों के घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलाए गए तथा पुलिस हिरासत में मौत के मामले सामने आए। ये आरोप उत्तर प्रदेश में विपक्ष की ओर से लंबे समय से उठाए जाते रहे हैं।
शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक मुद्दे
अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है और परीक्षाओं में अनियमितताएँ सामने आई हैं। उन्होंने शिक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए सरकार पर उनकी माँगों की अनदेखी का आरोप लगाया।
रोज़गार के मोर्चे पर उन्होंने अग्निवीर योजना की आलोचना करते हुए कहा कि अल्पकालिक सैन्य भर्ती व्यवस्था लागू कर वर्षों से तैयारी कर रहे युवाओं का मनोबल तोड़ा गया। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती सहित कई भर्तियों में आरक्षण से जुड़े मुद्दे भी उठाए। इसके अलावा उन्होंने यश भारती सम्मान और उससे जुड़ी सम्मान राशि समाप्त किए जाने पर भी सरकार की आलोचना की।
आगे का राजनीतिक संदेश
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट का समापन एक सियासी नारे के साथ किया — 'जन-जन कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा।' उन्होंने भाजपा पर देश की संपत्तियाँ बेचने और संविधान को बदलने की साजिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता भाजपा और उसके सहयोगियों को पूरी तरह नकार चुकी है और अब उन्हें सत्ता से विदा करने के लिए तैयार है। यह बयान उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले सपा की आक्रामक चुनावी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।